Friday , September 20 2019
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महज छः दिन में ही गोड्डा में औंधे मुँह सुकन्या योजना ,चाचा ने नाबालिग भतीजी संग रचाई शादी।

राघव मिश्रा/एक तरफ सरकार बेटियों के लिए पहले पढ़ाई फिर विदाई जैसे स्लोगन दे रही है वहीं दूसरी तरफ परिवार के अभिवावक ही अपनी प्रेम की जाल में नाबालिग बच्ची का शोषण कर रहे हैं ।

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प्रेम दो दिलों का भावना है ,सुना है प्रेम अंधा भी होता है,अलग अलग प्रेम की कई परिभाषाएं भी हैं लेकिन प्रेम,प्यार,मोहब्बत में लोग चाहे कितने ही अंधे बहरे लँगड़े हो जाएं इसे कानून से बाहर नही रखा जा सकता ।क्योंकि हमारे देश मे प्रेम विवाह करने के लिए भी कानून बनी है धाराएं बनी हैं ।हमारा संविधान हमे इस अंधे प्यार में कुछ भी कर गुजरने की इजाजत नही देता है ।
लेकिन इन कानून को ताक पर रखकर ,रिश्ते नाते को दरकिनार कर एक चाचा ने नाबालिक भतीजी संग रचा ली शादी।
मामला नगर थाना क्षेत्र का है जहां एक चाचा को अपनी भतीजी से वही अंधा वाला प्यार हो गया ,फिर क्या था अंधे प्यार की कहावत को सुने ही होंगे आप ।
वही कहावत को चरितार्थ करने के लिए फुर्र हो गए दोनो ।लड़की के घर वाले काफी परेशान हुए ,गुप्त रूप से खोजबीन जारी हुई और आखिरकार लड़की को पकड़कर उसके घरवाले ने ले आया। और कानून को ताखे पर रखकर उस नाबालिग बेटी की शादी आनन फानन में कहीं और तय कर दी।

प्रेमिका भतीजी की शादी की खबर सुन बावला हुआ प्रेमी चाचा ।
जैसे ही घर वालों ने अपनी नाबालिग बेटी के लिए वर ढूंढा इसी बीच प्रेमी चाचा ने भी उस वर को ढूंढ लिया और अपनी इश्क की दास्तां उसे सुना डाला ,फिर क्या था तय किए गए रिश्ते एक पल में बिखर गए और वर ने लड़की की शादी के रिश्ते को तोड़ दिया ।
फिर आपसी समझौते और परिवार वालों की रजामंदी के बाद उस इश्क में पागल दीवाना बना चाचा के साथ शादी की स्वीकृति दे दी ।

फिर न बाजा बजा न बराती आई लेकिन बिन बुलाए मेहमानों की हुजूम के बीच गोड्डा नगर थाना क्षेत्र के ही एक मंदिर में रचा दी गई वो नाबालिक बेटी, जिसे सरकार बचाने की बात करती है ।यहां न सुकन्या योजना को देखा गया न पहले पढाई फिर विदाई वाला स्लोगन ।

दिनभर दोनो पक्षों के साथ थाने में चली थी मैराथन बैठक।

इस प्रकरण के बीच लड़की पक्ष और लड़के पक्ष के साथ नगर थाना में भी घँटों मैराथन बैठक हुई थी लेकिन वहां से भी इस नाबालिक बेटी की शादी को रोकने में सभी नाकाम रहे ।और अंततः बात यही बनी की यह आपलोगों की आपसी बात है इसे आपलोग अपने स्तर से ही सुलह कर लें।
पुलिस को सूचना मिलने के बाद भी नही रुक सकी शादी।

इधर शादी का जश्न का माहौल मंदिर में चल रहा था ,दो पहले से बने रिश्ते एक नए रिश्ते को जन्म देने की तैयारी में थे ,लड़की के परिवार वाले भी अपनी बोझ उतारने पर आमादा थे कि इसी बीच किसी ने डायल 100 नम्बर पर फोन कर इस शादी की सूचना पुलिस को दे दी ।लेकिन जबतक पुलिस पहुंचती चाचा भतीजी के रिश्ते पति पत्नी में बदल चुका था ,यह देख पुलिस भी मौके से लौट गई ।

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3 जनवरी को ही झारखण्ड केबिनेट में सुकन्या योजना हुई थी पास।
मुख्यमंत्री सुकन्या योजना की शुरूआत 3 जनवरी को ही झारखण्ड केबिनेट की बैठक में पास हो गई है
महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव अमिताभ कौशल ने कैबिनेट की ब्रीफिंग में बताया था कि पहले से चली आ रही मुख्यमंत्री लक्ष्मी लाडली योजना को री-स्ट्रक्चर कर मुख्यमंत्री सुकन्या योजना शुरू की गई है. इसके तहत सात अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं, जिनमें लड़की के जन्म से लेकर उसके 20 साल होने तक राज्य सरकार सात अलग-अलग चरणों में पैसे देगी. उन्होंने बताया था कि इस योजना का मकसद महिला सशक्तिकरण, बालिका शिक्षा और बाल विवाह पर रोक लगाना है.।
लेकिन इन योजनाओं के धरातल पर आने के बावजूद भी नगर थाना क्षेत्र में खुलेआम समाज के सामने एक नाबालिग बेटी की शादी कर गोड्डा में महज 6 दिन में ही सुकन्या योजना को औंधे मुँह गिरा दिया गया है ।और जिला प्रशासन ने इस योजना की तरफ से भी कोई पहल नही कर सकी ।

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गोड्डा में सबसे ज्यादा होता है बाल विवाह।

गोड्डा में 63 प्रतिशत बाल विवाह,गोड्डा सबसे अधिक बाल विवाह वाला जिला है और झारखंड देश में चौथा. नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे-4 (एनएफएचएस) के मुताबिक गोड्डा में 63.5 फीसदी बाल विवाह होता है. गढ़वा में 58.8 प्रतिशत , और देवघर में  52.7 प्रतिशत. यह क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं. जबकि देशभर में बाल विवाह के मामले में झारखंड में 38 प्रतिशत  हैं. राजस्थान में सर्वाधिक 51.2 प्रतिशत, बिहार में 49.2 व पश्चिम बंगाल में 45.2 प्रतिशत बाल विवाह होता है ।
गोड्डा में भले ही सबसे अधिक बाल विवाह होता हो, लेकिन सीआईडी की रिपोर्ट की माने तो यहां पिछले चार साल में एक भी बाल विवाह नहीं हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार बीते चाल साल में (2014-17) में राज्य में बाल विवाह के मात्र 18 मामले ही दर्ज हुए हैं. इनमें घढ़वा, देवघर में दो-दो मामले दर्ज हुए हैं लेकिन गोड्डा का जिक्र नहीं है।

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मुख्यमंत्री ने भी गोड्डा में बाल विवाह को बताया था कलंक।

हाल ही में गोड्डा जनचौपाल के लिए 22 तारीख को गोड्डा पहुंचे मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी गोड्डा में हो रहे बाल विवाह पर गहरी चिंता जताई ,उन्होंने कहा कि बाल विवाह गोड्डा के लिए कलंक है ,इसके लिए समाज को आगे आना होगा ,उन्होंने कहा कि सरकार भी 1 जनवरी 2019 से मुख्यमंत्री सुकन्या योजना ला रही है जिसके तहत बेटी के जन्म से लेकर पढाई तक के लिए सरकार प्रोत्साहन राशि देगी ।उन्होंने कहा कि बेटी के जन्म के ठीक बाद प्रोत्साहन मिलेगा फिर प्रथम वर्ग में नामंकन के बाद प्रोत्साहन मिलेगा फिर पांचवी और भी 10वीं और ग्यारवीं क्लास में जाने पर इस सुकन्या योजना का लाभ मिलेगा और शादी का उम्र हो जाने के बाद शादी के लिए मुख्यमंत्री कन्यादान योजना से लाभ मिलेगा ,लेकिन सुकन्या योजना का लाभ लेने के लिए शर्त सिर्फ यह है कि पढाई पूरी करने तक उम्र से पहले बेटी कुंवारी हो ।

हमने अनुमंडल पदाधिकारी फुलेश्वर मुर्मु से इस बाबत जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने कहा कि प्रखण्ड विकास पदाधिकारी बाल विवाह के रोकथाम के लिए नोडल पदाधिकारी हैं ,हमने उन्हें इस सम्बंध में कार्रवाई का निर्देश दे दिया है ।

इस संबंध में हमने बाल संरक्षण समिति की अध्यक्षा कल्पना कुमारी झा से बात की उन्होंने इस विषय पर हमें बताया कि प्रखण्ड विकास पदाधिकारी को इस सम्बंध में कार्रवाई के लिए पत्र प्रेषित किया जा रहा है ,उनके नेतृत्व में जांच के बाद कार्रवाई होगी ।

अब देखने वाली बात यह होगी कि इस खबर के बाद जिला प्रशासन किस तरह कड़ी कार्रवाई की कदम उठाती है या फिर महज कागजों पर जांच कर मामला शांत हो जाएगा।

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