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क्या बेगूसराय के कन्हैया की तरह जनता में अपनी छाप छोड़ सकेंगे गोड्डा के वीरेन्द्र ?

झारखंड जनतांत्रिक महासभा जन मुद्दों को लेकर झारखंड में लगातार संघर्षरत रही है. वह चाहे खूंटी में पत्थलगड़ी आंदोलन के मुद्दे पर हो या झारखंड में विस्थापन के खिलाफ हो रहे जन संघर्षों हो या फिर जल-जंगल-जमीन को बचाने की लड़ाई हो या गाय और गौरक्षा के नाम पर मुस्लिम-दलित-आदिवासी का हो रहे मॉब लिंचिंग के खिलाफ आंदोलन हो या पारा शिक्षक-आँगनबाड़ीकर्मी-मनरेगाकर्मी तथा तमाम अनुबन्धकर्मी के सरकारीकरण का आंदोलन हो या फिर झारखंड में ST-SC-OBC का आरक्षण को 50% से बढ़ाकर 73% करवाने का आंदोलन हो इन तमाम आंदोलनों में झारखंड जनतांत्रिक महासभा की नेतृत्व और आंदोलनकारी भूमिका रही है.।

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इसी के तहत झारखंड जनतांत्रिक महासभा की ओर से पहले घाटशिला से रांची 24 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक और फिर 1 दिसंबर से 9 दिसंबर तक महागामा से गोड्डा-देवघर-मधुपुर होते हुए दुमका तक कि लगभग 430 किलोमीटर (दोनो पदयात्रा मिलाकर) की पदयात्रा किया गया.

झारखंड जनतांत्रिक महासभा अपने कर्तव्य को बखूबी निभाते हुए इस आम चुनाव में चुनाव में जनभागीदारी और युवाओं की हिस्सेदारी के लिए तथा भाजपा को भागने के लिए और गोड्डा से अडानी को भगाने के लिए तथा जान जमीन रोजगार और संविधान बचाने के अपनी प्रतिवद्धता को दोहराते हुए झारखंड जनतांत्रिक महासभा गोड्डा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने जा रही है.

झारखंड जनतांत्रिक महासभा ने गोड्डा लोकसभा से जेएनयू के छात्र नेता वीरेंद्र कुमार को उम्मीदवार को चुनावी मैदान में उतारा है. बता दें कि वीरेंद्र कुमार जेनएयू के शोधार्थी (पीएचडी में) हैं.

वीरेंद्र कुमार का घर दुमका जिले एवं गोड्डा लोकसभा क्षेत्र के हँसडीहा का रहने वाला है. उनके पिता दैनिक मजदूरी (फर्नीचर बनाने का काम) का काम करते हैं. वीरेंद्र जेएनयू जाने से पूर्व छात्र राजनीति के साथ साथ किसान-मजदूर, पारा शिक्षक-अनुबन्धकर्मियों के आंदोलन में सक्रिय थे. जेएनयू जाने के बाद भी जेएनयू के छात्र राजनीति में तथा सामाजिक न्याय के आंदोलन में सक्रियता के साथ रहा.

जेएनयू जाने से पूर्व वीरेंद्र कुमार पारा शिक्षक के रूप में भी काम कर चुके हैं और पारा शिक्षकों के आंदोलन में सक्रिय तथा नेतृत्व के रूप से अपनी भागीदारी निभाते आए हैं.

वीरेन्द्र कहते हैं कि गोड्डा लोकसभा से हमारी लड़ाई भाजपा तथा अडानी के खिलाफ है. गोड्डा में अडानी पॉवर प्लांट के नाम पर किसानों-आदिवासियों का जमीन जबरदस्ती छीनने का काम कर रही है और भाजपा के गोड्डा से निवर्तमान सांसद निशिकांत दुबे गोड्डा में अडानी का एजेंट के तौर पर काम कर रहा है.

वो बताते हैं कि गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में जनता के पास अबतक विकल्प नहीं है. लोग निशिकांत दुबे के खिलाफ हैं, गुस्से में है. और लोगों को प्रदीप यादव तथा इनके पार्टी झारखंड विकास मोर्चा पर भरोसा नहीं है, क्योंकि इनके पार्टी के पिछले 2 बार से लगातार आधे से ज्यादा विधायक झारखंड विकास मोर्चा के टिकट पर चुनाव जीतते हैं और बाद में भाजपा में बिककर शामिल हो जाते हैं.
झारखंड जनतांत्रिक महासभा ने वीरेंद्र कुमार के रूप में झारखंडी जनों के समक्ष जनता का विकल्प के रूप में जनआंदोलनों के मजबूत आवाज के रूप में उभरा है. और सिर्फ गोड्डा ही नहीं महासभा आने वाले दिनों में संपूर्ण झारखंड में तीसरे विकल्प/जनता के विकल्प के रूप में उभरकर सामने आएगा.उनका कहना हैै की यह चुनाव जन सहयोग से लड़ रहे है, अभी घर घर जाकर लोगों से आर्थिक सहयोग भी ले रहे हैं. नामांकन के बाद ऑनलाइन तरीके से क्राउडफंडिंग भी करेंगे.

अभी झारखंड के संघर्षरत कई साथी एवं जेएनयू के कई छात्र नौजवान गोड्डा लोकसभा में प्रचार प्रसार में लगे हैं. और नामांकन के बाद जेएनयू, डीयू, जामिया मिलिया इस्लामिया और झारखण्ड समेत देश भर के छात्र नौजवान व नामी चेहरे आएंगे.ये जानकारी विरेन्द्र के सहयोगी लोक जनतांत्रिक महासभा द्वारा प्रेस व्यज्ञप्ति जारी कर दिया गया ।

अब देखने वाली बात यह होगी कि विरेन्द्र जेएनयू से आकर गोड्डा में अपनी कितनी छाप छोड़ सकते हैं ।

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