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अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस : अपने उत्कृष्ट कार्यों से जिले की मान बढ़ाने वाली सभी नारी को सलाम ।

राघव मिश्रा/अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर आज हर तरफ महिलाओं के लिए कार्यक्रम आयोजित किए गए ,चारों तरफ महिलाओं की तारीफ में कशीदे पढ़े जा रहे है ,ये तारीफ जायज भी है ,इसलिए क्योंकि महिलाएं न सिर्फ आज सशक्त हुई है बल्कि महिलाएं तो शुरू से सशक्त और संघर्षरत रही है ।ऐसी ही कुछ महिलाओं के बारे में आज मैं हूँ गोड्डा आपको बताने जा रहा है जो जिले का नाम रौशन की है :ऐसी और उन तमाम नारियों को भी अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर सैल्यूट रहेगा ।

बंदना दुबे :

बंदना दुबे

स्वामी विवेकानंद अनाथ सुरक्षा आश्रम की संचालिका बंदना दुबे आज किसी परिचय की मोहताज नही है ,लेकिन उनके संघर्स के दिन बहुत कठिनाइयों से गुजरा है ,पेशे से निजी वाहन चालक रहे पिता स्व.सुभाष चन्द्र दुबे की पुत्री बंदना का जन्म 1986 में हुआ ,घर की माली हालात को देख बंदना ने बचपन मे ही यह ठान ली थी की हमे गरीबी और अशिक्षा पर काम करना है ।इनके परिवार की माली हालात इतने खराब थे कि इन्हें परिजनों के यहां पलना पड़ा था ,जहां खाने को भी ठीक से नही मिलते थे।

एक दिन अपने ही काम की तलाश में निकली बंदना को दो बच्ची दिखी जो बंदना को उसके बचपन की याद ताजा कर दी ,दोनो बच्ची काफी गरीब परिवार से आती थी वो भी उन्ही हालातों से जूझ रही थी जो कभी बंदना ने झेली थी ।वहीं से यह प्रेरणा मिली की इन बच्चों पर हमें काम करने की जरूरत है और वहीं से बंदना दुबे ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा बच्चों के लिए दे दी
कुंवारी रहते हुए 40 से अधिक अनाथ बच्चों की मां बनी ,उनकी पढ़ाई लिखाई से लेकर लालन पालन तक उनके जिम्मे रहा ,जिसके बाद उन्हें राष्ट्र्पति के हाथों राजीव गांधी सेवा सम्मान मिला ।
कोरोना काल मे भी बंदना दुबे ने आगे आकर अपनी अहम भूमिका निभाई ,चाहे मजदूरों को शर्बत पिलाना हो ,चाहे जानवरों को भोजन ,या फिर महिलाओं लड़कियों के लिए सैनेटरी पैड का वितरण ,इन कार्यों में भी बन्दना ने बढ़चढ़कर हिसा लिया और सुदूरवर्ती इलाकों में जाकर लोगों को राशन तक पहुंचाई ।
बंदना दुबे के कार्यों को हाल ही में झारखण्ड विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो ने भी सरहाना की है ।
आज की तारीख में बंदना ने सिस्टम और कानूनी पेंचों के थपेड़ों से डटकर सामना किया है ,और वहां शिक्षा का अलख जगा रही हैं जहां सरकार की नजरें नही पहुंच पाती है ।

ऐसे उत्कृष्ट कार्यों के लिए मैं हूँ गोड्डा अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर इस मां को सलाम करती है ।

दीपिका पांडेय सिंह :

दीपिका पांडेय सिंह

1976 को एक राजनीतिक परिवार में जन्मी दीपिका पांडेय सिंह ने गोड्डा जिले का नाम ऊंचा उठाई है ,यह जिले की पहली महिला विधायक है जिन्होंने राजनीतिक परवरिश के बावजूद काफी संघर्स की है ,दीपिका पांडेय सिंह ने बीएससी की शिक्षा विज्ञान विषय से रांची के सेंट जेवियर कॉलेज 1994-97 में पास की ,1998-2000 में इन्होंने MBA की डिग्री जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सर्विस रांची से ली ,इसके बाद इन्होंने 2008-11 में LLB की पढ़ाई को ऑपरेटिव कॉलेज जमशेदपुर से पूरी की इनकी माता प्रतिभा पांडे पूर्व महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी हैं ।

इनकी शादी गोड्डा जिले के महगामा अनुमंडल क्षेत्र के खिरोंधी गांव में रत्नेश कुमार सिंह से हुई है जो पूर्व में एकिकृत बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री अवध बिहारी सिंह के बेटे हैं ,अवध बिहारी सिंह उस वक्त चार बार महगामा से विधायक भी रह चुके हैं ।

दीपिका पांडेय सिंह की राजनीतिक कैरियर नेशनल यूथ कांग्रेस से हुई है ,यूथ कांग्रेस में इन्होंने जेनरल सेक्रेटरी का पदभार भी निभाई है ।इन्हें कांग्रेस में नेशनल कमिटी में भी यूथ सेक्रेटरी का पद मिला ,महिला शक्ति के रूप में उभरकर सामने आई दीपिका पांडेय सिंह को 2014 लोकसभा चुनाव के बाद गोड्डा जिले की कोंग्रेस अध्यक्ष के रूप में पद मिला जिससे जिले में महिला के रूप में एक प्रखर ,निडर और साहसी नारी मिली जसके दम पर जिले में पार्टी मजबूत बनी और एक अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल सराहनीय रहा ।उन्होंने महिलाओं और जनता की बातों को प्रमुखता से उठाई ,हर एक आंदोलन को धरातल पर उन्होंने जोर शोर से उतारी और फिर 2018 में उन्हें नेशनल कांग्रेस में महिला कमिटी में जगह मिला फिर यह सफर बढ़ता ही गया और 2019 के चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर महगामा विधानसभा से चुनाव लड़ी और 12499 वोट से अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के अशोक कुमार भगत को हराकर जिले की प्रथम महिला विधायक बनी ।इन्हें जिले में आयरन लेडी के रूप में जाना जाने लगा है ।फिलहाल असम चुनाव में इन्हें नेशनल कोंग्रेस ने स्क्रीनिंग कमिटी में चुना है ।

ऐसी संघर्ष से उभरकर जिले की प्रथम महिला विधायक बनकर जिले के नाम को रौशन करने वाली विधायक दीपिका पांडे सिंह को मैं हूँ गोड्डा सलाम करता है ।

काव्य श्री :

काव्य श्री

काव्य श्री का जन्म 1997 में हुआ है ,2009 से ही खेल के प्रति काव्य श्री का रुझान बढ़ा । काव्य श्री के पिता विपिन प्र. दुबे पेशे से शिक्षक हैं,मूलतः गोड्डा जिले के बन्दनवार गांव की यह बेटी 30 से अधिक कैरम में नेशनल गेम खेल चुकी है ,साथ ही काव्य श्री इस्टजोन में लगातार 3 बार से उपविजेता भी है ,जिला में लगातार कैरम गेम में 14 वर्षों से जिला चैंपियन रही काव्य श्री कैरम खेल के प्रति अपनी अधिक रुचि रखती है,काव्य श्री एक भाई और दो बहन है,बहन भी कैरम में जिला डबल में चैंपियन रह चुकी है ।
कोरोना काल मे ऑनलाइन नेशनल कैरम में भी काव्य श्री ने 1 to 8 में जगह बनाई थी ।

ऐसी होनहार बेटी को जिले का नाम रौशन करने के लिए महिला दिवस पर मैं हूँ गोड्डा सलाम करता है ।

ऋतु रानी :

ऋतु रानी

ऋतु एक महिला क्रिकेट खिलाड़ी है जिसका जन्म 1991 को हुआ है । गोड्डा जिले की जन्मी बेटी ऋतु रानी राज्य की महिला क्रिकेट की हिस्सा है ।ऋतु के पिता का नाम सत्यकाम राहुल है जो पेशे से शिक्षक हैं ।ऋतु की स्कूली शिक्षा सेंट थॉमस स्कूल गोड्डा से शुरू हुई जिसके बाद ,रामगढ़ कॉलेज से ऋतु ने आईएससी की फिर गोसनर कॉलेज रांची से बीएससीआईटी की पढ़ाई पूरी की उसके बाद रांची यूनवर्सिटी से मैथमेटिक्स डिपार्टमेंट से एमसीए की पढ़ाई पूरी की ।इसके अलावे ऋतु नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया,पटियाला से क्रिकेट की कोचिंच की कोर्स भी पूरी की है ।

ऋतु बचपन से ही पढ़ाई के अलावे खेल में रुचि रखती है ऋतु ने टेनिस बॉल क्रिकेट में तकरीबन 15 नेशनल ,ड्यूज बॉल क्रिकेट में 3 नेशनल ,एथलेटिक्स में 2 नेशनल ,वॉलीबॉल में 2 नेशनल एवं नेट बॉल में 1 नेशनल गेम का प्रतिनिधित्व की है ।

ऋतु रानी राज्य महिला क्रिकेट टीम की कप्तानी भी निभा चुकी है साथ ही अपने यूनिवर्सिटी के तरफ से भी ऋतु खेल चुकी है ,ऋतु रानी को खेल के अलावे ड्राइंग पसंद है ।ऋतु बताती है कि इस महिला दिवस पर बस इतना ही कहना चाहूंगी की हर अभिवावक को बेटियों को समझना होगा साथ ही बेटी को भी प्रोत्साहन देनी चाहिए ताकि बेटी भी आगे आकर अपने बल पर अपने जिले राज्य या देश का नाम ऊपर उठा सके ।साथ ही ऋतु कहती है कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो ताकि महिलाओं को कहीं आने जाने में अकेलेपन और भय का सामना न करना पड़े ।

अपने जिले की मान बढ़ाने के लिए इस बेटी को महिला दिवस पर मैं हूँ गोड्डा सलाम करता है ।

मोनालिसा :

मोनालिसा

मोनालिसा जिले की नेशनल नेट बॉल खिलाड़ी है मोना का जन्म गोड्डा जिले के गंगटा में 1996ई.को हुआ है ।
स्कूली पढ़ाई लिखाई नवप्रभात मिशन स्कूल से पूरी करने के बाद ,मोनालिसा ने ग्रेजुएशन की फिर बीपीएड कम्प्लीट की मोनालिसा के पिता जी का नाम बैधनाथ डेहरी है जो पेशे से पंचायत सेवक हैं ,मोना की मां अब इस दुनियां में नही है ।

मूलतः पोड़ैयाहाट प्रखंड के पिण्डराहाट बोहा की रहने वाली इस लड़की ने सबजूनियर ,जूनियर ,सीनियर मिलाकर 36 नेशनल गेम खेल चुकी है , 3 बार इंडिया कैम्प कर चुकी है जिसमे दो बार सलेक्ट हुई एक बार मौका नही मिल पाया ।
इधर मोनालिसा वर्ल्ड चैंपियन के लिए केनियाँ जाने की तैयारी कर रही जो जुलाई में जाना है ।नेटबॉल की अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी मोनालिसा तीनो कैटरगरी को मिलाकर 12 बार चैंपियन रही है ।मोनालिसा ईस्ट जोन से अकेली लड़की है जो इंडिया प्रतिनिधित्व करेगी ।

मोना कहती है जब वो 8 क्लास मे थी तबसे नेट बॉल खेल रही है इससे पहले बचपन से लेकर 8 क्लास तक टेनिस बॉल क्रिकेट खेली जिसमे 4 नेशनल खेली है ,उस वक्त मोनालिसा की आयु 15 वर्ष की थी, फिलहाल मोनालिसा 11 वर्षों से नेट बॉल खेल में सक्रिय है ।
वर्तमान में मोनालिसा न सिर्फ नेट बॉल खेल में भारत का प्रतिनधित्व कर रही है बल्कि ,मोनालिसा नेट बॉल खेल का जिले में अलख भी जगा दी है तकरीबन 500 से अधिक बच्चों को मोनालिसा नेट बॉल खेल सिखा चुकी है ।

ऐसी बेटी को जिले का नाम रौशन करने के लिए महिला दिवस पर मैं हूँ गोड्डा सलाम करता है ।

बेनु चौबे :


नगर की उपाध्यक्षा बेनु चौबे का जन्म वर्ष 1982 को हुआ है,वो जमशेदपुर में पली बढ़ी हैं स्कूली शिक्षा दीक्षा भी जमशेदपुर में ही प्राप्त की है । 10 वीं के बाद शादी हुई ,पति का उमाशंकर चतुर्वेदी पेशे से पारा शिक्षक हैं जो मूलतः गोड्डा जिले के मेहरमा प्रखंड के बुधासन की रहने वाले हैं
बेनु चौबे फिलहाल गोड्डा के शांतिनगर मोहल्ले में रह रही है ।बेनु चौबे का राजनीति कैरियर तब शुरू हुआ था जब भाजपा से बाबूलाल मरांडी मुख्यमंत्री थे ,भाजपा महिला मोर्चा में मंत्री के पद पर रही ,बेनु चौबे बताती हैं की प्रोन्नति दुबे ने राजनीति में उन्हें कदम रखवाई ।जहां से उनका सफर शुरू हुआ ,शुरुआती दिनों में घर मे छोटे बच्चे रहने के कारण परिवार से राजनीति में इधर उधर जाने की अनुमति कम मिलती थी ,लोग तरह तरह की बातें करते थे लेकिन पति ने बहुत साथ दिया ,इसके बाद जेवीएम गठन के बाद सक्रिय रूप से जेवीएम में महिला मोर्चा की अध्यक्ष के रूप में कार्य करने का इन्हें मौका मिला ।इसके बाद लगातारा समाजिक कार्यों में बढ़चढ़कर भाग ली ,2008 में नगर पंचायत चुनाव में वार्ड नम्बर 15 से पार्षद चुनी गई ,2013 के निकाय चुनाव में फिर से दोबारा पार्षद चुनी गई ।2018 में तीसरी बार नगर परिषद चुनाव में नगर उपाध्यक्ष के रूप में जीतकर प्रतिनिधित्व करने का इन्हें मौका मिला ।वर्तमान में नगर उपाध्यक्षा हैं

बेनु चौबे

इन्हें परिवारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा,बच्चे छोटे थे जिस कारण परिवार में भी राजनीति करने की उतनी छूट नही मिल पाती थी ,धीरे धीरे स्थिति सामान्य होते गया और पति के अथक प्रयास से सबकुछ सही होता चला गया ।

संघर्स से आगे निकलकर जिले के नाम को रौशन करने वाली बेनु चौबे जी को मैं हूँ गोड्डा सलाम करता है ।

डॉ. प्रभा रानी प्रसाद :

डाक्टर प्रभा रानी प्रसाद

डाक्टर प्रभा रानी प्रसाद का जन्म 1962 में हुआ ,रांची में रहकर अपनी शिक्षा दीक्षा पूरी की इसके बाद आगे NMCH मेडिकल कॉलेज पटना से 1983 में मेडिकल की पढ़ाई शुरू की ,पढ़ाई पूरी होते ही 1990 में नौकरी लग गई थी ।डाक्टर प्रभा रानी प्रसाद वर्तमान में न सिर्फ डाक्टर है बल्कि लायंस क्लब की रीजन चेयरपर्सन भी हैं ,डॉक्टर प्रसाद
2015 से क्लब में सक्रिय हैं वो आईएमएम झरखण्ड की महिला विंग की सेक्रेटरी के साथ साथ गोड्डा जिला आईएमए की भी सेक्रेटरी है ।यही नही बल्कि वो जिले की पहली महिला हैं जो किसी खेल में उपाध्यक्ष के पदभार में भी अपना योगदान दी है ।
कोरोना काल मे प्रभा रानी प्रसाद ने अपनी महती भूमिका निभाई वो कोरोना काल को याद करते हुए बताती हैं
कोरोना काल मे पहला पेशेंट प्रेगेंट लेडी आई थी जो कोरोना पोजेटिव थी, जिसका ऑपरेशन करना अनिवार्य था ,बच्चे और मां दोनों को खतरा था ,यह ऐसा दौर था जब कोई कोरोना पेशेंट को हाथ नही लगाना चाहता था उस वक्त मुश्किल घड़ी में सबके साथ मिलकर खड़ी रही,ऑपरेशन सफल रहा बाद में दोनों स्वस्थ्य थे । वो खुशी मन को सुकून देता है ।

इसके बाद गोड्डा जिले की तात्कालिक उपायुक्त किरण कुमारी पासी का भी सफल ऑपरेशन कोरोना काल मे की थी जो काफी टफ था ,एक डीसी का ऑपरेशन सफलता पूर्वक कर हमें खुशी मिली थी।
इसे डाक्टर प्रसाद बड़ी उपलब्धियों में मानती हैं ।

उन्होंने महिला दिवस पर कहा है कि सशक्तिकरण शब्द से लोगों को ऊपर उठना होगा ।इतने अधिक रेप केस हो रहे हैं ऐसे में औरत होकर प्रताड़ित होना पड़ता है ।ये जबतक बंद नही होगा हमे एक दिन महिला दिवस मनाने से कुछ नही होगा ।
प्रभा रानी प्रसाद कोरोना काल मे अपनी चिकित्सीय सेवा एवं सामाजिक सेवा दोनों में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया है जिसके लिए इस महिला दिवस पर डॉक्टर प्रभा रानी प्रसाद को मैं हूँ गोड्डा सलाम करता है ।

आरती कुमारी :

आरती कुमारी

गोड्डा मुख्यालय के शांतिनगर मोहल्ले की रहने वाली आरती का जन्म 2000 ई.में हुआ है ,आरती के पिता का नाम स्व. सुभाष प्रसाद सिंह है ,आरती मैट्रिक की पढ़ाई बिरसा मुंडा स्कूल से पूरी की फिर इंटर की पढ़ाई बिहार के खेतान कालेज से पूरी की ।आरती का नाम जिले में डांस के क्षेत्र में उभरकर सामने आया ,आरती बताती हैं की 2015 से ही डांस सीखना शुरू की डांस का जुनून ऐसा था कि आरती ने डांस में बीएड भी कम्प्लीट कर ली है ।आरती को बचपन मे ही लगा कि अगर डांस में आगे कुछ करना है तो डांस जारी रखना होगा ।हालांकि आरती बताती है कि बचपन मे जब वो डांस सिख रही थी तो न घर से न ही समाज से उसे कोई सपोर्ट मिला लेकिन जब वो डांस सीखाने लगी तब घर परिवार से लेकर चारों ओर से सपोर्ट मिलने लगा ।आरती 6 बहन 2 भाई है ।
आरती 2013 में एक्टिंग के लिए रांची गई थी ,जहां उत्कृष्ट प्रदर्शन कर भारत सरकार द्वारा सम्मानित भी हुई थी ,साथ ही 2016 ई.में डांस कोरियोग्राफी में मथुरा में अच्छी कोरियोग्राफी के लिए आरती को डांस का इंटरनेशनल सर्टिफिकेट भी मिला था ।
फिलहाल आरती अभी डांस एकेडमी चला रही है जहां 55 बच्चों को डांस सीखा रही है, जिसमे 50 लड़कियां है ।

ऐसी संघर्षरत होनहार बेटी को जिले का नाम रौशन करने के लिए मैं हूँ गोड्डा सलाम करता है ।

सलाम उन तमाम महिलाओं का करता है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी नारी जनने का गर्व समाज को करवाया है ।

आपके लिए दो शब्द :-

हे नारी !

यदि तुम नि:शक्त हो तो मेरा शक्तिशाली होना हास्यास्पद है,यदि तुम अपमानित हो तो मेरा सम्मानित होना स्वांग है ।
यदि तुम दुखी हो तो मेरा सुखी होना भ्रम है ,यदि तुम असुरक्षित हो तो मेरा पौरुष व्यर्थ है ।
यदि तुम शिक्षित नहीं हो तो मेरी विद्वत्ता का कोई मोल नहीं ।यदि तुम्हारा सर झुका हुआ है तो मेरा मस्तक कैसे उठ सकता है ?
अगर तू गुस्से से लाल है,तो मेरा शांत रहना कर्तव्य बनता है।हमे तुम्हारी क़द्र है,क्योंकि तुम्हे हमारी फ़िक्र है।मैं तलवार हूँ तो तुम धार हो ।मैं नाम से राघव हूँ और तुम काम से ‘देवी’ हो , मै पुष्प हूँ तो तुम सुगंध हो,मैं शरीर हूँ तो तुम प्राण हो,मेरा होना ही इसलिए है क्योंकि तुम्हारा होना है ।
संज्ञा ,सर्वनाम, क्रिया, विशेषण सब में पहले तुम हो,यदि तुम नहीं तो कुछ भी नहीं है…..।
हे मातृशक्ति तुम्हारे हर रूप को सादर नमन ..तू बहन है,जो प्यार का दर्पण है,तू पत्नी है,जो खुद का समर्पण है, तू भाभी है,जो भावना का भंडार है ,मामी मौसी बुआ है तू ही,जो स्नेह का सत्कार है,तू काकी है जो कर्तव्य की साधना है,तू साथी है जो सुख की संभावना है
और तू ही “माँ” है जो साक्षात “परमात्मा” है ।

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