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कृषि विधेयक के विरोध में कांग्रेस का राजभवन मार्च, राज्यपाल को सौंपा गया ज्ञापन ।

रांची:केंद्र सरकार की ओर से संसद में पास कराए गए 3 कृषि विधेयकों को रविवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी मंजूरी दे दी है। अब सभी विधेयक कानून में तब्दीवल हो गए हैं। उधर, देश भर में विपक्षी दल और किसान संगठन इस कानून का विरोध जारी रखे हुए हैं। इस विरोध के बीच राजधानी रांची में भी मोरहाबादी मैदान से राजभवन तक कांग्रेस ने पैदल मार्च निकाला।

राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन ।

कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस के सभी सांसद और विधायक राजभवन मार्च में शामिल हुए। मोरहाबादी मैदान से कांग्रेसियों ने राजभवन तक पैदल मार्च किया। इसके बाद कांग्रेस की 6 सदस्यीय टीम ने राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को कृषि बिलों के खिलाफ एक ज्ञापन सौंपा। राज्यपाल से मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने बिलों के खिलाफ दिए ज्ञापन को राष्ट्रपति को सौंपने का अनुरोध किया है।

केंद्र पर जमकर बरसे कांग्रेसी

कृषि बिल के विरोध में कांग्रेस के सभी सांसद और विधायक केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीति पर जमकर बरसे। मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि किसानों की आवाज के साथ कांग्रेस खड़ी है। केंद्र ने किसानों के लिए काला कानून बनाया है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार कोर्ट जाने का विचार कर सकती है।

‘कई राज्यों के सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना’

मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि केंद्र सरकार भले ही जबरदस्ती कानून किसानों पर थोप दे, लेकिन पार्टी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बात करेगी। पंजाब सरकार इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस बिल के खिलाफ कोर्ट जाने पर विचार कर रहे हैं। इसके अलावा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर उरांव, स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, सांसद धीरज साहू, गीता कोड़ा, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने भी कृषि विधेयकों की तीखी आलोचना की।

महगामा विधायक दीपिका पांडे ने भी बिल को बताया काला कानून ।

महगामा विधायक दीपिका पांडे सिंह ने बिल के विरोध में कहा कि ये किसानों के हित मे नही है सरकार MSP की बात करती है तो इस बिल में क्यों नही लाया गया ।ये सरकार किसान विरोधी है ,किसानों को हमेसा मजदूर बनाकर रखना चाहती है ,इस बिल के जरिये किसानों का नही उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाया जाएगा ।

महिला मोर्चा के साथ विरोध में शामिल विधायक दीपिका पांडे सिंह
महिला मोर्चा के साथ विरोध में शामिल विधायक दीपिका पांडे सिंह

महगामा विधायक दीपिका पांडे सिंह ने प्रधानमंत्री की बातों पर निशाना साधते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी जी ने कहा 15 लाख आएंगे ,उन्होंने कहा 100 दिनों में काला धन आएगा,उन्होंने रोजगार देने की भी बात कही क्या हुआ सबका ,जनता सबकुछ समझ रही है तो फिर कैसे करे किसान प्रधानमंत्री पर भरोषा?

किसान,मजदूर,छोटे कारोबारियों की आजीविका पर यह एक क्रूर हमला है।मोदी और भाजपा सरकार किसान विरोधी है। इस सरकार ने जो बिल लाए हैं, इससे किसान तो बर्बाद होंगे बेरोजगारी बढ़ेगी। किसान अपने ही खेत में मजदूर बनकर रह जाएंगे।

कृषि विधेयक के विरोध में कोंग्रेसी नेता
कृषि विधेयक के विरोध में कोंग्रेसी नेता

विधायक प्रदीप यादव ने भी कृषि बिल को बताया किसान विरोधी ।

पोड़ैयाहाट विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पारित ये कानून किसान विरोधी हैं, इस महामारी में भी हमारी अर्थव्यवस्था को किसी ने बचाया था तो किसान और खेती ने, अब खेती पर बड़े-बड़े उद्योगपतियों की नज़र है, किसान मज़दूर बनकर रह जाएगा। ये देश के अन्नदाताओं के साथ धोखा हुआ है।

जानिए, कृषि विधेयकों के विरोध का कारण

न्यूनतम समर्थन मूल्य की सरकार ने आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
नई कृषि बिल में किसानों को ओपन मार्केट में फसल बेचने की छूट दी गई है।
अगर कोई पूंजीपति लागत मूल्य से कम पर फसल खरीदना चाहे, तो किसान चाहकर भी विरोध नहीं कर पाएगा।
बाजार समिति जैसे संगठन इस कृषि बिल से कमजोर हो जाएंगे।
पूंजीपति चाहे तो किसानों के साथ फसल उगाने से पहले ही अनुबंध कर सकते हैं, जो किसान के खिलाफ है।
नए कृषि बिलों में कई उत्पाद जमा करने पर कानूनी कार्रवाई के प्रावधान को खत्म कर दिया गया है।
दाल, तेल, प्याज जैसी चीज के भंडारण पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती है। यह उपभोक्ताओं पर असर डालेगा।

Source : The Followup

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