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सभी पत्रकारों को लगेगी वैक्सीन! हेमंत सरकार के इस फैसले में एक बड़ा झोल है, समझिए कैसे…

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक ट्वीट किया। ट्विटर पर लिखा कि राज्य के सभी पत्रकारों को प्राथमिकता के तौर पर कोरोना टीकाकरण अभियान के साथ जोड़ा जाएगा। इस आशय हेतु मैंने अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) को निर्देश दे दिए हैं। कोरोना की इस लड़ाई में हम मिलकर लड़ते हुए ही जीत हासिल करेंगे। कोरोना फिर हारेगा। झारखण्ड फिर जीतेगा! अच्छी बात है। पर इसमें एक झोल है।

सीएम का ट्वीट और सरकारी आदेश में अंतर
मुख्यमंत्री ने जो ट्वीट किया और सरकार ने वैक्सीनेशन के लिए आदेश की जो कॉपी निकाली है उसमें बहुत बड़ा अंतर है। खेल सभी बनाम 45 वर्ष का है। सीएम ने ट्वीट में लिखा कि सभी पत्रकारों का टीकाकरण किया जायेगा। सरकार के आदेश की कॉपी कहती है कि 45 वर्ष से अधिक आय़ु के पत्रकारों का टीकाकरण किया जायेगा। इसमें समस्या क्या है, स्टोरी में आगे बताएंगे।

45 वर्ष से अधिक आय़ु के पत्रकारों को वैक्सीन
सरकार ने पत्रकारों की वैक्सीनेशन को लेकर जो आदेश जारी किया है उसके मुताबिक 45 वर्ष से अधिक आय़ु के पत्रकारों को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन लगाई जायेगी। आदेश में लिखा है कि सूचना संग्रह करने के लिए पत्रकार ग्राउंड में घूमते हैं। उनके जीवन की रक्षा काफी अहम है। इसलिए, 45 वर्ष से अधिक आयु वाले सभी पत्रकारों का प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण किया जाये ताकि वे निर्भीक होकर अपना काम कर सकें। बात ये है कि 45 वर्ष से अधिक आयु के लोग तो पहले से ही प्राथमिकता सूची में हैं। उनका वैक्सीनेशन भी जारी है। यहीं झोल है।

पत्रकारों को शब्दों में उलझाने की कोशिश कैसे
गौरतलब है कि 1 अप्रैल से वैक्सीनेशन का दूसरा चरण शुरू किया गया था। इसमें देश में 45 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों को टीकाकरण की प्राथमिकता सूची में रखा गया था। जाहिर है कि उसमें इस आय़ु वर्ग के पत्रकार भी आते हैं। उनके लिए अलग से आदेश की जरूरत थी ही नहीं।

पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित करने की मांग
कई राजनीतिक पार्टियों, यहां तक की सत्तारूढ़ पार्टी के विधायकों द्वारा भी मांग की गयी थी कि सभी पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर्स मानते हुए उन्हें वैक्सीन लगाया जाये। युवा पत्रकार ज्यादा संख्या में ग्राउंड रिपोर्टिंग में हैं। उनकी जिंदगी भी कीमती है। सरकार ने शब्दों के जाल में उलझाने की कोशिश की है। पर ये तो पत्रकार हैं। शब्दों से ही खेलते हैं। कैसे बेवकूफ बनाया जा सकता है। बता दें कि राज्य में अभी तक आधा दर्जन पत्रकारों की जान जा चुकी है। कई बीमार हैं।

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