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माता-पिता से हुई बदसलूकी ने बना दिया IPS, संस्कृत भाषा से UPSC क्लियर करने वाले ये है गुप्तेश्वर पांडेय


अभी हाल ही में सोशल मीडिया पर ट्रेड बन चुके पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय इन दिनों प्रशासनिक सेवा से हटके आस्था में लीन होते दिख रहे हैं। सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है। बता दें गुप्तेश्वर पांडेय का नाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है, क्योंकि वो अक्सर लाइमलाइट में रहे हैं। और अपने कामकाज के सख्त तरीके हमेशा चर्चा में बने रहते हैं। इन दिनों अपने नए अवतार को लेकर सुर्खियों में छाए हुए हैं।

खासकर उनके बयान अक्सर सुर्ख़ियों में रहते हैं।

1987 बैच के IPS अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय इससे पहले मुजफ्फरपुर के जोनल आईजी भी रहे हैं। उन्होंने 31 वर्षों तक पुलिस विभाग को अपनी सेवाएँ दीं है। एसपी, रेंज डीआईजी, एडीजी मुख्यालय और डीजी बीएमपी सहित कई पदों पर उन्होंने अपनी सेवाएँ दी हैं। हालांकि, 2019 में उन्हें बिहार के डीजीपी का कार्यभार सौंपा गया था। उन्होंने एएसपी, एसपी, एसएसपी, आईजी, आईजी और एडीजी के तौर पर बिहार के 26 जिलों में अपनी बार भी उनके हाथ निराशा लगी।

बचपन से ग्रेजुएशन तक का सफर:

गुप्तेश्वर पांडेय का जन्म 1961 में बिहार के बक्सर जिले के गेरुआबंध गांव में हुआ है। वो बचपन से ही भोजपुरी बोलते हैं। उनके पिता एक साधू थे। परिवार में गुप्तेश्वर पांडे से पहले कोई भी स्कूल नहीं गया था। ज्यादा से ज्यादा सबको हस्ताक्षर करना आता था। बता दें की जिस स्कूल में वह पढ़ने के लिए जाते थे। वहां पर बैठने के लिए बेंच भी नहीं होती थी। साइंस और मैथ में कमजोर होने के कारण उन्होंने आर्ट्स से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। एक बात रोचक है कि उन्होंने संस्कृत में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। एमए का सेशन लेट होने के कारण वो यूपीएससी की तैयारी में लग गए।

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IRS बनने के बावजूद भी IPS बने:

1986 मे पहले संस्कृत भाषा में यूपीएससी परीक्षा के लिए उपस्थित हुए थे जिसके मुताबिक उन्हें आईपीएस भारतीय राजस्व सेवा आईआरएस (IRS) के लिए चयनित किया गया, लेकिन वो अपनी नौकरी से संतुष्ट नहीं थे। और उनका सपना आईपीएस अफसर बनने का था और उन्होंने फिर दूसरे प्रयास‌ में आईपीएस (IPS) बने। जब गुप्तेश्वर पांडे 10 साल के थे तो उनके घर पर पुलिस वालों ने सेंधमारी थी। हालांकि, उनके परिवार का कोई दोष नहीं था। लेकिन तलाशी के दौरान उनके घर को निशाना बनाया गया था। साथ ही पुलिस वालों ने गलत तरीके से बातचीत की थी। जिसका असर उनके ज़हन में काफी लंबे समय तक रहा। ऐसे में वह कभी भी एक पुलिसवाले नहीं बनना चाहते थे। तब से ही पुलिस के प्रति उपजे नकारात्मक इमेज को दूर करने के लिए वो इस क्षेत्र में आए।

400 दागी अफसरों को जेल में डाल चुके है:

प्रशासनिक विभाग में जाते ही वो बेबाक अंदाज में अपना ड्यूटी निभाने लगे। अपराधी को ढूंढ ढूंढ कर कारागार में ठुसने लगे। अब तक उन्होंने 400 दागी अफसरों को पुलिस डिपार्टमेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। साथ ही उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में 42 मुठभेड़ों को शांत कराया है। सुशांत सिंह राजपूत (SSR) मामले में भी उन्होंने जिस तरह से पीड़ित परिवार का साथ दिया और केस को सीबीआई (CBI) तक भेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस दौरान उनकी सक्रियता सभी ने देखी।

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