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फ़ोटो पहली पत्नी के साथ बच्चे

हमेशा इंसानियत शर्मसार नही होती ,कभी सैल्यूट मारने का भी मौका दे जाती है ।

इंसानियत का उदाहरण

अक्सर खबर बनाते समय एक पत्रकार या आम इंसान की भाषा मे लिखने या सुनने को मिल जाता है कि इंसानियत की शर्मसार करने वाली घटना। तड़पता रहा घायल सड़क पर किसी ने भी मदद के लिए नही बढाया हाथ।
लेकिन हमेशा ऐसा नही होता है। कभी-कभी हमारे सामने कुछ ऐसा उदाहरण सामने खुद ब खुद खड़ा हो जाता है जब उस वाकया को खबर की दृष्टिकोण से नही बल्कि इंसानियत को परिभाषित करने के लिए बनाने का मन करता है।।
समय को बलवान मानने वाले दूसरों के मदद के लिए इसे खराब नही करना चाहते है लेकिन आज दिन के चार बजे कारगिल चौक के समीप एक तेज रफ्तार से गुजर रहा युवक सामने से एक आदिवासी महिला को ठोकर मार दिया। महिला सड़क के किनारे गिर गयी। कुछ लोग दौड़ कर उसके पास पहुँचे तो कुछ लोग बाइक सवार को पकडने के लिए लपके।

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महिला सड़क पर गिरी हुई कराह रही थी तभी सामने से आ रही एक संभ्रांत घर की महिला ने उसे सहारा देकर उठाया। उसे मदद करते देख एक दूसरी लड़की भी आगे आई और पानी के बोतल से उसके चेहरे और जख्म को साफ की। बैग से एक हैण्डीप्लास्ट निकाल कर उसके कटे हुए भाग में लगाई।
पूरे प्रकरण में सिर्फ संवेदना नज़र आई क्योंकि उपस्थित सभी लोग एक दूसरे से अनजान थे और आदिवासी महिला के आंसू उसके दर्द को बयां कर रहे थे क्योंकि उसकी भाषा को कोई समझ नही पा रहा था।
संयोग से ट्रैफिक पुलिस की नज़र पड़ी तो उसने एक टोटो गाड़ी को रुकवा कर उस धक्का मारने वाले वाले युवक के साथ अस्पताल भेजवाया और सही सलामत वापस लाने तक उसकी बाइक को अपने पास सुरक्षित रख लिया।
ये खबर कोई बहुत बड़ी नही थी लेकिन औरतों के पहल पर ये खास बन गया।
ये उदाहरण समाज के लिए है कि हम एक सामाजिक प्राणी है और एक दूसरे के सुख-दुख में साथी है ।

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