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हाफिज उल हसन बने झारखण्ड के हेमंत सरकार में मंत्री, राजभवन में ली शपथ

झारखंड के पूर्व मंत्री दिवंगत हाजी हुसैन अंसारी के बड़े पुत्र हफीज उल हसन ने शुक्रवार को हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल के 11वें सदस्य के रूप में शपथ ली. राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने राजभवन के बिरसा मंडपम में आयोजित एक सादे एवं संक्षिप्त समारोह में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. हफीज उल हसन ने अल्लाह के नाम पर उर्दू में शपथ ली.

बता दें कि मंत्रिमंडल विस्तार का यह कार्यक्रम कल देर शाम तय किया गया था. राजभवन को जिस वक्त इसकी सूचना भेजी गयी थी, उस वक्त राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू उड़ीसा में थीं. वह आज सुबह लगभग साढ़े दस बजे रांची लौटीं. इसके बाद अपराह्न लगभग सवा बारह बजे शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ.  शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झामुमो के सुप्रीमो शिबू सोरेन, कैबिनेट मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव, आलमगीर आलम, बादल पत्रलेख, बन्ना गुप्ता, जोबा मांझी, चम्पई सोरेन, मिथिलेश ठाकुर, सत्यानन्द भोक्ता सहित कांग्रेस व जेएमएम के कई विधायक उपस्थित थे.

पूर्व मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के निधन से हेमंत सरकार कैबिनेट में मंत्री पद खाली थी. हाजी हुसैन अंसारी हेमंत सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री थे. उनका निधन 3 अक्टूबर को कोरोना संक्रमण से जंग जीतने के बाद रांची के एक निजी अस्पताल में हो गया था.

छह महीने के भीतर बनना होगा विधायक

हाजी हुसैन फिलहाल विधायक नहीं हैं. संवैधानिक बाध्यताओं के अनुसार, उन्हें छह महीने के अंदर विधानसभा की सदस्यता हासिल करनी होगी. बता दें कि हाजी हुसैन अंसारी के निधन के बाद मधुपुर सीट पर उपचुनाव होना है. संभावना है कि निर्वाचन आयोग जल्द ही इस सीट पर चुनाव की घोषणा करेगा. ऐसी स्थिति में दिवंगत हाजी हुसैन के पुत्र हाफिज अंसारी का इस सीट से झामुमो प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है.

बिना विधायक बने CM या मंत्री बननेवाले चौथे व्यक्ति

झारखंड में बगैर विधायक बने मंत्री या मुख्यमंत्री पद पर शपथ लेने की यह चौथी राजनीतिक परिघटना है. राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने जब शपथ ली थी, तब वह झारखंड विधानसभा के सदस्य नहीं थे. बाद में उन्होंने रामगढ़ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जीत हासिल की थी. शिबू सोरेन ने भी बगैर विधायक बने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. इसके बाद वह तमाड़ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में उतरे थे, लेकिन राजा पीटर के हाथों पराजित होने के कारण उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था. इसके बाद मधु कोड़ा के मंत्रिमंडल में भवनाथपुर के विधायक भानु प्रताप शाही के पिता हेमेंद्र प्रताप नाथ देहाती ने भी विधायक बने बगैर मंत्री पद की शपथ ली थी.

Source: newswing

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