ग्रामीण भाषा में करोना का संदेश छूले त बेटा गेले, लौट रहे मजदूर,हर घर लौट रही है खुशियां । – मैं हूँ गोड्डा- maihugodda.com
Home / ताजा खबर / ग्रामीण भाषा में करोना का संदेश छूले त बेटा गेले, लौट रहे मजदूर,हर घर लौट रही है खुशियां ।

ग्रामीण भाषा में करोना का संदेश छूले त बेटा गेले, लौट रहे मजदूर,हर घर लौट रही है खुशियां ।

रजूआ के घर से इन दिनों लड़ाई झगड़ा गाली गलौज की आवाज सुनाई नहीं देती है । शाम ढले रोड पर पियक्कड़ो की धींगामस्ती व हो हल्ला सुनाई नहीं पड़ती है । टिपोरिया नए सिरे से घर के आगे गाय एवं भैंस का खुट्टा गाड़ने में लगा हुआ है ताकि मवेशियों के बीच काफी दूरी रहे। झनपटिया अपनी सुगनी गाय , छमिया बकरी और घुंघरू खस्सी को दूर-दूर में बांधती है और लोगों को आगाह करना नहीं भूलती है खबरदार कोई अगर इससे सटा तो उसको खुट्टा में ही साट देंगे।

लॉक डाउन की कहानी, ग्रामीणों की जुबानी में आदमी का कौन कहे पशुओं को भी एक दूसरे से दूर रख रहे हैं ।

हटिया में शराबबंदी के कारण घर घर में है शांति ।

परमानंद मिश्र(वरुन)/दरअसल यह किसी आंचलिक कहानी की पटकथा नहीं और ना ही प्रेमचंद्र की कहानी का कोई अंश है बल्कि लतौना गांव में कोरोना को लेकर लॉक डाउन के कारण ग्रामीण जीवन में आ रहे बदलाव के संकेत है। ग्रामीण खुद शारीरिक दूरी के साथ-साथ मवेशियों को भी इससे दूर रखना चाहते हैं ताकि कहीं उसे भी यह रोग न हो जाए ।

गांव में महिलाएं मवेशी का खयाल रखती हुई
गांव में महिलाएं मवेशी का खयाल रखती हुई

दूसरे टोले में नीतू देवी काफी खुश है इन दिनों और लॉक डाउन की शुक्रिया अदा करते नहीं थकती । चाहे चापाकल में पानी लाने जाए या फिर गोबर लाने लॉक डाउन की चर्चा अवश्य करती है ।

शराब छोड़ घर पर पत्नी के साथ रसोई में बैठा पंकज
शराब छोड़ घर पर पत्नी के साथ रसोई में बैठा पंकज

कहती है लॉक डाउन बढ़कर काफी अच्छा हो गया क्योंकि लॉक डाउन के कारण उसके घर में शांति है । अब उसका पति पंकज इधर-उधर बौखलाता नहीं है और ना ही शराब पीकर घर आता है । आजकल उसके घर का वातावरण काफी ठीक है उसका पति पंकज बच्चों के साथ समय बीताता है और पत्नी के कार्यों में हाथ भी बंटाता है ।

लेकिन पहले ऐसे कहां था ।पहले तो वह इधर-उधर घूमते रहता था और शराब पीकर घर आता था । झगड़ा लड़ाई करना उसका दिनचर्या था। जितना कमाता था ,ज्यादा पैसा शराब में ही फूंक देता है।

अपने घर पर ही गप्प मारती महिलाएं
अपने घर पर ही गप्प मारती महिलाएं

पनिया माय बोलती है इस बार जब बेटा बाहर से आया है तो घर में बहुत शांति है, ना बेटा पुतोहू में झगड़ा होता है न कचरकचर, बेटा के दिन भर घर पर रहने से पुतोहू उन्हें मानने लगी है।

पहले ऐसे कहां होता था। बोलती है अच्छा किया पुलिस ने जो हटिया में दारू बेचने पर और हटिया लगाने पर मारपीट करके भगा दिया सबको। इसी बीच भजन भी वहीं पर पहुंच जाता है। बाप रे बाप रजौन हाट में जे मारा मारी है । पूरा हटिया पुलिस से भर गया है। शिवजतन दारू पीते ही पकड़ा गया । उसको पुलिस ने डंडा मार मार के ठीक कर दिया। हटिया जा रहे सभी लोग वापस लौट गए हैं। यह रोग भयानक रोग है एक दूसरे को छूने से मर जाता है। बाहर से किसी आदमी को गांव में घुसने नहीं देना है। देखो रांची से होते हुए देवघर होते हुए गोड्डा की सीमा पर पोडै़याहाट पहुंच गया है अब क्या है पलक झपकते किधर घुस जाएगा कहना मुश्किल है। सावधान रहो ।भजन अपनी आदत के मुताबिक बोलते बोलते आपसी वार्तालाप में जोर जोर से बोलने लगता है और सभी ग्रामीणों को इसकी जानकारी देता है।

ऐसा प्रतीत होता है कि गांव में कम पढ़े लिखे लोगों के बीच उसे कोरोना वायरस और लॉक डाउन के विषय में ज्यादा जानकारी रखता है । इस बीच रमुआ खैनी रटते हुए आता है जैसे उसे खाने रटाते देखता है कि देवान उससे खैनी मांगता है और जैसे ही खैनी देता है तो उसी वक्त भजन रोकते हुए कहता है छूले तै बेटा गेले। एक दूसरा कै छूना नहीं है। एक दूसरे को छूने से कोरोना रोग हो जाता है ।कुछ शराबियों ने तो शराब का नाम ही कोरोना रख दिया है,किसी को नशा में देख कहता है ई कोरोना मार लिया है इसको छूना नही । छूने के बाद खूब बढ़िया से मलमल के साबुन से हाथ धोना है। दिन भर में चार पांच बार साबुन से हाथ धोना चाहिए ।तब जाकर नाक मुंह या कोई अन्य चीजों को छू सकता है ।

बातचीत करते हुए मुंह में गमछा बांध लो। जगह-जगह साबुन आदि बांटा जा रहा है। इस गांव में भी बटेगा। घर के दरबाजे पर बैठा महेश सिंह जो अपनी आंखों की रोशनी खो दिया है उसका बीपीएल कार्ड भी नहीं है बोलता है गांव वालों के रहते हम भूखे मर जाएंगे।

तभी रोहित बोल पड़ता है तुम्हें भूखे मरने नहीं दिया जाएगा। अभी मुखिया जो चावल दिया है ,विवेकानंद आश्रम गोड्डा से जो चावल आया है ।वह खत्म होगा तो तुम्हें और चावल मिल जाएगा । तुम निश्चिंत रहो। इतना गांव वाले के रहते एक-दो परिवार तो ऐसे ही पोसा जाएगा। सरकार सब के लिए सोच रही है।

गांव के चौपाल पर बैठी सोशल डिस्टेंसिंग में महिलाएं कहानी सुनाती हुई ।
गांव के चौपाल पर बैठी सोशल डिस्टेंसिंग में महिलाएं कहानी सुनाती हुई ।

गांव के चौपाल के बगल में दूर-दूर बैठी महिलाएं भी गप सुन रही थी बोलती है बाप रे बाप कौन जमाना आ गया कि आदमी को छूने से मर जाता है। बड़ा सोच समझ कर रहना पड़ेगा।जान बचतै तै यहाय मांटी और यहाय जमीन पै कोदरा पारी पारी जीवन चलाय लैबे ।

महिलाएं कहती है कहिया हय रंग होय जाते के जाने छै?वो कहती है आबै आपनो बच्चा कै प्रदेश नाय भेजबै ,कोरोना से ज्यादा लोग हदरी कै मरी जातलै ,हय तै मुख्यमंत्री सबकै मंगाय रहलो छौं।

घर घर प्रदेश से लौट रहे प्रवासी मजदूर, लौट रहे घर के बच्चे ,छात्र छात्राओं पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहती है ।

हय नाय करतलै तै परिवार हदरी जयतीये ।आबै कम से कम घरों में नजरी के सामना में आगू पर बच्चा कै देखबै तै ।

कमोबेश यही कहानी है हर गांव की जहां एक ओर शराब पीने वालों में भारी कमी आई है तो दूसरी ओर महिलाएं अपने घरों में परिवार के साथ खुशियां बांटने में लगी है ।

 

 

About मैं हूँ गोड्डा

MAIHUGODDA The channel is an emerging news channel in the Godda district with its large viewership with factual news on social media. This channel is run by a team staffed by several reporters. The founder of this channel There is Raghav Mishra who has established this channel in his district. The aim of the channel is to become the voice of the people of Godda district, which has been raised from bottom to top. maihugodda.com is a next generation multi-style content, multimedia and multi-platform digital media venture. Its twin objectives are to reimagine journalism and disrupt news stereotypes. It currently mass follwer in Santhal Pargana Jharkhand aria and Godda Dist. Its about Knowledge, not Information; Process, not Product. Its new-age journalism.

Check Also

What Is PFI: पीएफआई क्या है, कैसे पड़ी इसकी नींव?क्यों हो गया बैन,जाने सबकुछ ।

पीएफआई पर क्या आरोप हैं? पीएफआई क्या है? पीएफआई को फंड कैसे मिलता है? क्या …

07-18-2024 17:02:09×