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गांवों में दुकानदारों की पूंजी सिक्कों में जाम, न बैंक ले रहे,न ही थोक विक्रेता !

लोगों ने कहा अघोषित सिक्का बंदी जैसा हालात

बैंक सिक्का जमा नहीं ले रहा है इसके कारण दुकानदार, कारोबारी एवं आम लोग परेशानी में है। शहर से गांव तक यह समस्या दिनों दिन गहराती जा रही है।
स्थिति यह हो गई है कि कारोबारियों ने सिक्के बोरा में भरकर घर में रख दिया है। जब ग्राहक बैंकों में सिक्का जमा करने जाते हैं तो बैंक कर्मी सिक्के लेने में आनाकानी करते हैं। कोई ना कोई बहाना बनाकर ग्राहकों को घर वापस भेज दिया जाता है।

जबरदस्ती करने पर एक हजार रुपए के सिक्के ही एक्सचेंज करते हैं। बैंक के अड़ियल रवैये के चलते दुकानदार भी सिक्का लेने में अपनी असमर्थता जताते हैं। यह कोई नई बात नहीं है।

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आज से दो वर्ष पूर्व नोटबंदी हुई थी। पांच सौ एवं एक हजार के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद बैंकों ने नये नोट के साथ ही भारी मात्रा में सिक्का जारी कर दिया है। सिक्के ज्यादातर दस के थे।

लेकिन यह सिक्का दोबारा आज तक बैंक में जमा नहीं हो पाए। अधिकारी आरबीआई की नियमावली का हवाला देते हुए सिक्का लेने से इंकार कर देते है।

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नाम न छापने के शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि जितने भी सिक्के बैंक द्वारा दिये जाते है उसे दोबारा बैंक में नहीं लिए जाते है। यह सिक्का बाजार में घूमता रहे, बैंक का यही उदेश्य है।

नगर थाना क्षेत्र के सत्संग नगर स्थित एक किराने के दुकानदार ने दस का सिक्का लेने से इंकार कर दिया गया है। ग्राहक संतोष साह ने बताया कि दुकानदार ने सिक्का लेने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि बहुत सिक्का जमा हो गया है। अब और सिक्का नहीं ले सकते।

दुकान मालिक ने कहा कि मेरे पास दुकान में ही दस हजार से अधिक के सिक्के जमा हैं। वहीं घर में भी सिक्के रखे हुए हैं। इधर खुदरा विक्रेता रंजीत मोदी ने कहा कि मेरे पास 25 से 30 हजार रुपए के एक, दो, पांच व 10 के सिक्के जमा पड़े हैं। बैंक जब जमा करने जाता हूं तो बैंक कर्मी सिक्के लेने में टाल मटोल करते हैं।

पेट्रोल पंप मालिकों के पास भी भारी मात्रा में सिक्के जमा हो गए हैं। नंदन पेट्रोल पंप मालिक प्रीतेश नंदन ने बताया कि नोटबंदी के बाद से ही सिक्कों का जमा होना शुरू हो गया था। लाखों रूपये के सिक्के जमा हो गए हैं।

यह सिक्का परेशानी का सबब बन गया है। ग्राहक आए दिन सिक्का ही दे रहे है। लेकिन सिक्का लेने से इंकार कर देते है।
इसके अलावे अन्य पेट्रोल पंप मालिक का कहना था कि बैंक सिक्का जमा नहीं ले रहे तो मैं क्यों सिक्का लूं। बैंक को दबाव देता हूं तो 1000 के सिक्के प्रतिदिन बड़ी मशक्कत से लेते हैं।

जबकि मेरे पास तीन से चार हजार के सिक्के शाम तक जमा हो जाते हैं। हर तरफ सिक्कों को लेकर परेशानी है। व्यापारियों का कहना है कि नोटबंदी के बाद यह स्थिति पैदा हुई है। पहले तो सिक्के मिलते नहीं थे। खुदरा की बराबर किल्लत रहती ।
पुलिस को नहीं पहुंच सकती शिकायत :

सिक्का नहीं लेना आम लोगों की नजर में कोई बड़ी बात नहीं है। यह दिनचर्या का हिस्सा हो गया है। दिन भर कहीं न कहीं ऐसा लोग या दुकानदार मिल ही जाते है जो सिक्का लेने से इंकार कर देते है।

यही सबसे बड़ा कारण है कि लोगों द्वारा इसकी शिकायत नगर थाना या फिर जिला प्रशासन को नहीं करते है। लोगों को यह छोटी मोटी घटनाएं लगती है।
आरबीआई का क्या है निर्देश :

आरबीआई के निर्देश को मानें तो बैंकों में 1000 की सीमा केवल कॉमर्शियल ट्रांजेक्शन के लिए है जबकि बैंकिंग ट्रांजेक्शन के लिए यह सीमा नहीं है। ग्राहक कितने भी मूल्य के सिक्के बैंक में जमा कर सकते हैं। कोई भी बैंक एक या दो रुपए के सिक्के लेने से मना नहीं कर सकता। दिक्कत होने पर तौल के सिक्के लिए जा सकते हैं। अधिक सिक्के जमा होने पर सिक्कों को करेंसी चेस्ट में भी भेजने का प्रावधान है।

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