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17 महीने से मृ’तक के साथ रह रहा था 12 लोगों का परिवार, अभी भी मृ’त मानने से कर रहा इंकार

कानपुर में एक परिवार 17 महीने पहले हुई मौत के बाद भी मृ’तक के शरीर को घर मे रखकर उसे जिंदा मान रहा था,घर वाले उसे मृ’त मानने को तैयार ही नही ,सास ससुर की बातों के चलते मृ’तक की पत्नी भी उसके हां में हां मिला रही थी आखिरकार पत्नी ने फोन कर विभाग को सारी जानकारी दी

उत्तर-प्रदेश के कानपुर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां 12 सदस्यों वाला एक परिवार 1 ला’श के साथ बीते 17 महीने से रह रहा था। परिवार 17 महीने से ये मानता रहा है कि उनके परिवार का सदस्य जिंदा है और कोमा में है। परिवार को भरोसा था कि वो ठीक हो जाएगा। हैरानी की बात है कि पड़ोसियों को इस बात की भनक तक नहीं लगी क्योंकि लाश से बदबू नहीं आ रही थी। 2 दिन पहले जब एक गुप्त सूचना पर विभागीय अधिकारी पहुंचे तो पूरे मामले का खुलासा हुआ।

अप्रैल 2021 में ही हुई थी विमलेश की मौत
प्राप्त जानकारी के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर में अप्रैल 2021 को आयकर विभाग में कार्यरत विमलेश सोनकर की तबीयत बिगड़ी। अस्पताल में डॉक्टरों ने विमलेश को मृत घोषित कर दिया। डेथ सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया। परिजन शव को घर ले आए और अंतिम संस्कार की तैयारी की जाने लगी। तभी परिजनों को लगा कि विमलेश की धड़कन और सांसें चल रही है। परिजनों ने अंतिम संस्कार टाल दिया और विमलेश के पार्थिव शरीर को घर के बाहर वाले एक कमरे में पलंग पर रख दिया। तब से लेकर अब तक परिवार के लोग, विशेष रूप से मृत विमलेश की मां उसके शव को नहलाती-धुलाती रही। उसके कपड़े बदलती रही। पड़ोसियों के मुताबिक बीते डेढ़ साल से रोजाना घर में ऑक्सीजन सिलेंडर भी लाया जाता था। चूंकि परिवार किसी से ज्यादा मतलब नहीं रखता। बात नहीं करता इसलिए पड़ोसियों ने भी बहुत पूछताछ नहीं की।

पत्नी मिताली ने विभाग को दी थी जानकारी
मिली जानकारी के मुताबिक विमलेश की पत्नी मिताली जोकि को-ऑपरेटिव बैंक में मैनेजर के रूप में काम करती हैं उन्होंने विभाग को इस बात की सूचना दी। मिताली का कहना है कि पति विमलेश की मौत अप्रैल 2021 में ही हो चुकी थी लेकिन उनके सास और ससुर इस बात को मानने को तैयार नहीं थे। मजबूरन मुझे भी उनकी हां में हां मिलाना पड़ा। धीरे-धीरे मेरे पति का शव काला पड़ने लगा। मांस सूखकर हड्डियों में चिपक गया था। हालात बिगड़ते जा रहे थे तब मैंने विभाग को सूचना देने का फैसला किया।

अलग-अलग एंगल से जांच में जुटी है पुलिस
पुलिस का कहना है कि मामले में आर्थिक फायदा लेने का कोई एंगल सामने नहीं आया है। जांच इस बात की हो रही है कि क्या मामले में अंधविश्वास का कोई एंगल है। क्या परिवार के सदस्य मानसिक रूप से स्वस्थ हैं। क्या उनको किसी ने तंत्र-मंत्र के चक्कर में उलझाया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक डॉक्टरों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि विमलेश की मौत डेढ़ साल पहले हो चुकी थी। पुलिस के लिए हैरान करने वाली बात ये है कि 12 सदस्यों वाले परिवार में किसी ने भी शव को घर में रखने का विरोध नहीं किया।

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