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राष्ट्रपति के हाथों मानव सेवा पुरस्कार लेने वाली वंदना के साथ सरकारी तंत्रों ने किया अमानवीय व्यवहार ।

राघव मिश्रा/गोड्डा एक बच्चों का लालन पालन करना कितना कठिन है ये उन माँ से जाकर पूछ सकते हैं जो अपने बच्चों को ठुमकते हुए बचपन से लेकर पढ़ाई लिखाई कर लायक बंनाने तक झेलती है ।

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लेकिन यहां तो 37 बच्चों की बात हो रही है ।जी हां हम बात कर रहे हैं स्वामी विवेकानंद अनाथ आश्रम गोड्डा की,जिसकी संचालिका वंदना दुबे ने 12 जनवरी 2005 से लेकर अबतक लगातार 1 लाख 22 हजार घण्टे से उस नाबालिक मासूम बच्चे के लिए कार्य कर रही है जिसे न पिता का सहारा मिला न माँ की ममता और न ही किसी नेता पदाधिकारी का संरक्षण ।वंदना ने जिस जुनून,जिम्मेदारी के साथ बिना सरकारी सहायता के अपने कार्यों का निर्वहण कर रही है उसे देखकर लगता है कि वाकई कोई देवी के रूप में माँ बनकर अपने बच्चों के लिए सेवा दे रही है ।

लागातर सरकारी विभाग से हुई उपेक्षित

सोसायटी एक्ट के आधार पर 2007 से ही वंदना का स्वामी विवेकानंद अनाथ आश्रम चल रहा है,हालांकि ये संस्था 2005 से ही बच्चों पर काम कर रही है ।जिसमे अबतक CWC के द्वारा भी सैकड़ों बच्चों को रखा गया है ।

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सड़क पर फेंकी गई बच्ची को वंदना ने अपनी ममता की छांव में रखा और आज वंदना को वो बच्ची माँ कहकर पुकारती है ,ऐसे कई उदाहरण हैं जिसे वंदना ने अपनी ममता में पाला है ।लेकिन वाबजूद इसके सरकार से मिलने वाली तमाम सुविधा से वंदना को वंचित रखा गया ।

चाइल्ड लाइन की बैठक में भी वंदना को नही बुलाया गया

2005 से लागातर नाबालिक बच्चों पर काम कर रही वंदना को जिले की चाइल्ड लाइन की कई बहुमूल्य बैठक से भी दूर रखा गया इसपर वंदना कहती है कि मैं बच्चों पर काम करती बच्चों के लिए सेवा देना ही मेरा धर्म है लेकिन मुझे जब ऐसे बैठक में न बुलाया गया तो मैं काफी आहत हुई ,चूंकि CWC किसी दूसरे संस्था को फोकस करना चाहती थी इसलिए हमें ऐसे बैठक से दूर रखा गया जबकि मैं लगातार 14 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हूं ।

जे.जे एक्ट के लिए दिए आवेदन को भी दबाया गया ।

वंदना का नाबालिक बच्चों पर काम करना और स्वामी विवेकानंद अनाथ आश्रम के द्वारा बच्चों की देखभाल करने वाली वंदना कहती है कि मैं 2005 से ही इस क्षेत्र में काम कर रही हूं ,जबकि जे.जे एक्ट की शुरुआत 2015 में हुई और इसके तहत संस्था का निबंधन अनिवार्य कर दिया गया ।

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मै जिस निस्वार्थ भाव से बच्चों के प्रति काम कर रही थी उससे हमे विस्वास था कि जे.जे एक्ट में आसानी से निबंधन हो जाएगा लेकिन बार बार आवेदन देने के बावजूद हमारे कागजों को दबाया गया,कई बार बाल संरक्षण पदाधिकारी द्वारा निरीक्षण करने के बाद हमारे कार्यों को सराहा भी गया है ,मैं जे जे एक्ट के सभी प्रक्रियाओं को सुझाव के बाद बदलती गई और रोज आम जनो का साथ मिलता गया लेकिन 2015 से लेकर अबतक कई बार जे.जे.एक्ट के तहत निबंधन के लिए समाज कल्याण पदाधिकारी से लेकर उपायुक्त,राज्यपाल,मुख्यमंत्री तक को आवेदन दी लेकिन मेरे द्वारा दिये कागजों को बंद पोटरी में दबा दिया गया ।

अनाथ आश्रम का विधान सभा मे भी उठा है मामला

16/3/2015 को उस वक्त के विधायक स्व.रघुनंदन मंडल ने भी स्वामी विवेकानंद अनाथ आश्रम के लिए विधान सभा मे कई सवाल खड़े किए थे,उन्होंने सदन में पूछा था कि
क्या यह सही है कि जिला मुख्यालय शहर में 1880 सोसाइटी एक्ट के तहत स्वामी विवेकानंद अनाथ आश्रम 2005 जनवरी से कार्यरत है ?

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क्या यह सही है कि उक्त अनाथ आश्रम में वर्तमान समय मे कुल 34 बच्चों का लालन पालन बिना सरकारी सुविधा एवं आम लोगों के सहयोग और चंदे से हो रहा है ।उन्होंने अनाथ आश्रम के भवन संबंधी भी सवाल किए थे कि क्या यह सत्य है कि स्वामी विवेकानंद अनाथ आश्रम एक निजी आवास में चल रहा है ।आगे उन्होंने सभी सवाल के बाद यह बात विधानसभा में रखा था कि अगर संस्था ऐसे उत्कृष्ट कार्य कर रही है तो क्यों इसे सुविधाओं से वंचित रखा गया है क्या इसे सरकारीकरण करना चाहती है?अगर हां तो कबतक ?अगर नही तो क्यों ?हालांकि विधानसभा में उठाये विधायक स्व.रघुनंदन मंडल उठाये सवाल का भी कोई विशेष फायदा वंदना को अबतक नही मिला है ।

बीमार बच्चों को CWC को देने के बावजूद कोई कार्यवाही नही

वंदना बताती है कि उनके द्वारा बीमार मोहन को CWC देने बावजूद उसपर कोई कार्यवाही नही करना और जब मेरे द्वारा पूछे जाने पर की क्या करूँ सर ये बहुत बीमार है तो CWC चेयरमेन का जवाब में कहना कि उसे बाहर छोड़ दो ।जो बातें मानवता से परे है ।ऐसे में ऐसे पदाधिकारी या अध्यक्ष बाल बच्चों पर क्या काम कर सकते हैं जिन्हें बच्चों का मर्म ही नही पता हो ।

जांच में पूछे गए बच्चों से अश्लील सवाल ।

वंदना बताती है की दिनांक 17/12/18 का दिन था उनके पिता की वार्षिक श्राद्ध का अंतिम समय था शांति पूजा हो रहा था ,उसी दिन बिना किसी सूचना के CWC चेयरमेन एवं समिति के सदस्य जांच करने पहुंचते हैं ,जबकि उसी दिन 3.30 बजे शाम में समाज कल्याण पदाधिकारी द्वारा बन्दना को मौखिक रूप से बैठक में बुलाया गया था,बावजूद ऐसे जांच की कहीं बात नही हुई और न ही कोई सूचना दी गई ।जांच के लिए पहुंची टीम से जब जांच का कारण पूछा गया तो बाल संरक्षण पदाधिकारी कल्पना कुमारी झा बताती है कि उपायुक्त का आदेश है ,उपायुक्त का आदेश का हवाला देकर जांच में जुट गई ,जांच टीम में शामिल सदस्य में चेयरमेन कल्पना झा के अलावा डॉ जुनैद आलम,डॉ मंटू टेकरीवाल,वार्ड सदस्य प्रीतम गाडिया एवं CWC के पदाधिकारी रितेश कुमार उपस्थित थे ।अचानक आई जांच करने टीम की बन्दना ने पूरी रिकॉर्डिंग श्राद्ध में आये कैमरा में से कराना शुरू की ,जैसे ही कैमरा ऑन हुआ तो बाल संरक्षण अध्यक्ष कल्पना झा अपना पर्स लेकर बाहर गई और दस मिनट के बाद वापस आई जिसके बाद जांच शुरू हुई,यहां सवाल बनता है कि आखिर उस पर्स में क्या था जो CWC अध्यक्ष कैमरा के सामने नही लाना चाहती थी ? जांच प्रारंभ हुआ जिसका पूरा रिकॉर्डिंग जारी था सबसे पहले तो दैनिक उपस्थिति रजिस्टर में जांच टीम में आये किसी सदस्य ने हस्ताक्षर नही किया और फिर टीम को छोड़ अध्यक्ष कल्पना झा जहाँ तहां जांच करने लगी इस दौरान वो कई बार रिकॉर्डिंग कर रहे कैमरा मेन को भी डांटकर कैमरा बन्द करवाई है यह कहते हुए की पर्सनल बातें हो रही है ,जबकि वंदना को कैमरा से कोई फर्क नही था चूंकि जांच स्पष्ट होने के लिए ही वो रिकॉर्डिंग भी करवा रही थी जबकि ये काम जांच टीम की होनी चाहिए ।जांच के दौरान ही वंदना के मुह पर कई बार मोबाइल कैमरा लगाकर अनर्गल बातें की गई इस दौरान बन्दना के बेड रूम में भी मोबाइल से रिकॉर्डिंग करते नजर आई चेयरमेन कल्पना झा ।

 

कैमरा के रिकॉर्डिंग के अनुसार काफी तनाव में थी CWC की अध्यक्ष कल्पना झा ।जांच के दौरान बार बार उपायुक्त का भय दिखा रही थी एवं वंदना के पिता की लगी तश्वीर को भी नीचे फेंक दी जब बन्दना ने इसका विरोध किया तो फिर उपायुक्त का आदेश है कहकर आगे माता पिता के रूम की ओर जाने लगी ,जबकि वंदना अपने अनाथ आश्रम को जिस भूमि पर चला रही है उसका पूरा विवरण एवं कागजात सरकार के पास मौजदू है बावजूद इसके आश्रम को छोड़ जांच घर तक पहुंच गया ।इससे वंदना काफी आहत है और उनका कहना है कि जब जांच समिति में आये कुल पांच लोग थे तो समिति को दूर रखकर सिर्फ CWC अध्यक्ष कल्पना झा एवं CWC पदाधिकारी रितेश कुमार के द्वारा ही जहाँ तहां जांच क्यों किया गया ?बाल संरक्षण पदाधिकारी रितेश कुमार बच्ची के कमरे में अचानक पहुंचकर अश्लील सवाल किए उसका बाथरूम तक जाकर मोबाइल से कपड़े की तश्वीर ली गई इस दौरान रिकॉर्डिंग कर रहे कैमरा मेन को डांटकर भगाया गया और खुद वंदना को भी दूर रखा गया ,ऐसा कौन सा जांच था जहां ऐसे करने के बाद बच्चियां रोने लगी ।
मैं हूँ गोड्डा के पास वो तमाम दस्तावेज एवं वीडियो उपलब्ध हैं जिसमे ये पूरी जांच की गई है उस वीडियो में भी कहा गया है कि ये जांच नही पर्सनल बात हो रही है ।और वही पदाधिकारी बार बार उपायुक्त मैडम का आदेश का हवाला दे रही है ।

वंदना के इस सेवा भाव के कार्य को कई पदाधिकारी एवं मंत्री ने सराहा है ।

स्वामी विवेकानंद अनाथ आश्रम में मौजूद प्रतिक्रिया देने वाली रजिस्टर के मुताबिक अबतक सैकड़ों पदाधिकारी एवं नेता मंत्री ने बन्दना के इस कार्य को सराहा है ,
सरहाने वाले में महिला एवं समाज कल्याण मंत्री लुइस मरांडी भी हैं इनके अलावा उपायुक्त हर्ष मंगला,सतीश प्रसाद (पुलिस अधीक्षक),उमेश सिंह (पुलिस अधीक्षक),राकेश बंसल,अजय लिंडा,हरिलाल चौहान ,संजीव कुमार (पुलिस अधीक्षक)के आलावे उपायुक्त राजेश शर्मा ,उपायुक्त अबुबकर शिद्धकी ,उपयुक्त विरेंद्र कुंवर,उपायुक्त के.बी.पी सिन्हा, उपायुक्त भुवनेश प्रताप ,पुलिस महानिरीक्षक उमेश सिंह ,प्रिया दुबे पुलिस निरीक्षक,एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने भी बन्दना के उत्कृष्ट कार्य की भूरी भूरी प्रसंसा की है साथ ही लिखा है ,आश्रम आने के उपरांत मानवता की सच्ची अनुभूति होती है ,यह संस्था बिना सरकारी सहायता से विगत वर्षों से कार्य कर रही है ।

राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित हो चुकी है वंदना ।

झारखण्ड राज्य स्थापना दिवस समारोह 2016 में वंदना को उत्कृष्ट सेवा पुरुस्कार मिला ।

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एवं 14 नवम्बर 2016 को ही राष्ट्र्पति के हाथों सुश्री वंदना को बाल कल्याण और विकास हेतु उनके उत्कृष्ठ योगदान और समर्पित सेवा हेतु राजीव गांधी मानव सेवा पुरस्कार से नवाजा गया ।

वंदना एक संक्षिप्त परिचय

वंदना एक अत्यंत ही साधारण परिवार की बेटी है ,जो बच्चों के लिए 2005 से काम कर रही है ,पिता एक प्राइवेट गाड़ी ड्राइवर थे, जिसकी रोज की कमाई से वंदना के साथ 5 भाई बहन की पेट की आग बुझती थी ,अत्यंत ही गरीबी के कारण वंदना को पेट भर भोजन के लिए रिश्तेदार के यहां छोड़ दिया गया जहां उसे काल कोठरी की तरह रखा गया ।हालात की मारी वंदना जब सड़क पर एक भूखी लड़की को मांग कर खाते देखी तो वहां से उन्हें बच्चों के लिए कुछ करने की प्रेरणा मिली हालांकि वंदना को हालात ने ऐसा तोड़ दिया था कि वो अपने ही तरह दूसरे बच्चों को देखना नही चाहती थी ,इसलिए उसने ठान लिया कि अब ऐसे बच्चों को कभी ऐसी हालत से जूझने नही देंगे ,वर्तमान में गोड्डा जयप्रकाश नगर स्थित स्वामी विवेकानंद अनाथ आश्रम की संचालिका है वंदना और 37 बच्चों की लालन पालन के साथ उसकी पढाई लिखाई की भी जिम्मेदारी को संभाले हुए है ।

 

ऐसे में हो सकता है जे.जे एक्ट के लिए वंदना के पास संसाधनों की कमी हो,परंतु बच्चो के परवरिश और प्रेम में वंदना ने कोई कमी नही की है शायद इसी वजह से वंदना के आंख से निकले आंसू को देख सभी बच्चे रो पड़े ।
वंदना खुद कुंवारी रहकर जिस त्याग और अपने कठीन मेहनत की बल पर बच्चों को पाला है और परवरिश दी है उसमें किसी को भी कोई संदेह नही है ।आम लोगों से मिले अनुदान एवं सहयोग की गई वस्तु से आज भी अनाथ आश्रम चल रहा है ,हाल के दिनों में वंदना के इस कार्य को देखकर जिले में थर्मल पावर की कंपनी अदानी फाउंडेशन ने भी बच्चों के भोजन की व्यवस्था की है !

क्या होगी कार्रवाई ?

अब ऐसी परिस्थिति में सरकारी तंत्रों द्वारा ऐसे जांच कर आखिर क्या दिखाने की मंशा है जो आनन फानन में वंदना के पिता के वार्षिक श्राद्ध के दिन जांच टीम गई ,टीम के सभी सदस्यों द्वारा सभी जगह जांच भी नही की गई ,संचालिका से अनावश्यक सवाल किया गया ,बच्चों से अश्लील सवाल करना कहां तक जायज है ,ऐसे में जिला प्रशासन अगर समय रहते उचित कदम उठाकर दोषियों पर शख्त कार्रवाई नही करती है तो ऐसे जांच से टूट चुकी वंदना के साथ आश्रम में पल रहे 37 बच्चों पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा ।
आगे की कहानी में पढ़िए वंदना का एक मार्मिक पत्र

About मैं हूँ गोड्डा

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