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तीन तलाक का मामला आया सामने न्याय के लिए भटक रही है महिला !

पंचो के सामने करारनामा कर दिया तीन तलाक 

गोड्डा जिला बलबड्डा थाना क्षेत्र की मुर्गियाचक के मो0 अबुल हसन (55 वर्ष) ने अपनी पत्नी बीबी सईदा खातून (45 वर्ष) को पंचो से भरी सभा में करार कर दूसरी बार अपनी पत्नी को तलाक दे दिया !

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2008 में भी दिया था तीन तलाक

 

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ज्ञात हो कि पहली बार 2008 मे अबुल हसन ने अपनी पत्नी को तलाक दिया था जिसमे 22650 रुपये देन मोहर पर तय हुआ जिसमें 5000 रुपये नगद दिया तथा शेष राशि 17650 रुपये बाद में देने की बात हुई थी।लेकिन बाद में मुस्लिम शरीयत के अनुसार हलाला के बाद पुनः निकाह करवाया गया था !

दूसरी बार फिर दिया तीन तलाक 

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7 वर्ष बाद 8-1-2018 को अबुल हसन ने दुबारा अपनी पत्नी को तलाक दे दिया जिसमें 109500 रुपये देन मोहर का फैसला पंच ने किया जिसको देने के लिए अब वो खेत बेचने की बात कर रहा है।

चार बच्चों की माँ है पीड़िता

पीड़ित महिला सईदा खातून  चार बच्चो की माँ है ,और अपने एक बेटे की शादी भी कर चुकी है ।

न्याय के लिए लगा रही गुहार ,पुलिस ने नही लिया संज्ञान !

पीड़ित महिला न्याय के लिए इधर उधर भटक रही है जबकि बलबड्डा थाना में मामला दर्ज करवाने गई तो थाना प्रभारी ने मामला दर्ज करने से इंकार कर दिया !

क्या है तीन तलाक ?

इस्लाम धर्म में,विवाह, जिसे निकाह कहा जाता है ,एक पुरूष और एक स्त्री की अपनी आजाद मर्जी से एक दूसरें के साथ पति और पत्नी के रूप में रहने का फैसला हैं। इसकी तीन शर्ते हैं : पहली यह कि पुरूष वैवाहिक जीवन की जिम्मेदारियों को उठाने की शपथ ले, एक निश्चित रकम जो आपसी बातचीत से तय हो, मेहर के रूप में औरत को दे और इस नये सम्बन्ध से दुरी का  समाज में घोषणा हो जाये। इसके बिना किसी मर्द और औरत का साथ रहना और शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करना गलत ही नही बल्कि एक बड़ा अपराध माना जाता है ।

तीन तलाक पर क्या है कानून 

लोकसभा से पारित होने के बाद तीन तलाक  से जुड़ा विधेयक अब राज्यसभा की देहरी पर  है. विधेयक मेंतीन तलाक  देने को अपराध बना दिया गया है जिसके लिए तीन साल की कैद के साथ जुर्माने का भी प्रावधान है. साथ ही, पीड़ित महिला अदालत से भरण-पोषण का दावा भी कर सकती है. बीते अगस्त में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर रोक लगा दी थी. इसपर सरकार का कहना है कि कानून  के बगैर सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू करना मुश्किल है, इसलिए यह विधेयक लाया गया है !

हो सकती है तीन वर्ष की सजा 

एक झटके में तीन  बार तलाक  बोलकर या लिखकर तलाक  देने की प्रथा “तलाक– ए-बिद्दत” सुप्रीम कोर्ट द्वारा गैरकानूनी करार दी जा चुकी है। और इसमें तीन वर्ष की सजा का भी प्रावधान है ,लेकिन उस फैसले की प्रक्रिया में ही अदालत ने केंद्र सरकार को इस संबंध में कानून बनाने के लिए भी कहा था, जिसके लिए बिल लाने की तैयारी अपने अंतिम चरण में है !

 

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