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महगामा विधायिका के सवालों पर सरकार का जवाब ,बंद होगी वित्त रहित शिक्षा नीति ।

महगामा विधायिका दीपिका पांडे विधानसभा सत्र के दौरान अमेरिका यात्रा पर थी ,उन्होंने सदन में अपने सवालों को उठाने के लिए  विधायक राजेश कच्छप को अधिकृत की थी, अल्पसूचित प्रश्न को विधायक राजेश कच्छप ने सदन के सामने रखा। उन्होंने सरकार से पूछा कि राज्य में वित्त रहित इंटरमीडिएट कॉलेज-स्थापना अनुमति प्राप्त उच्च विद्यालय, संस्कृत विद्यालय एवं मदरसा सहित 1250 शिक्षण संस्थान के लिए क्या अनुदान दी जाती है। क्या यह सही है कि वित्त रहित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मी वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। इस सवाल का जवाब स्वयं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिया।

उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षण संस्थानों से संबंधित बहुत-सी खामियां हैं, जिनसे शीघ्र निजात मिलेगा। सरकार बहुत जल्द निर्णय लेगी। इसी प्रश्न पर विधायक प्रदीप यादव ने सरकार से मांग की कि नीतिगत फैसला लेते हुए वित्त रहित की समस्या से जूझ रहे संस्थानों की समस्या का निदान किया जाना चाहिए। अनुदान देकर वित्त रहित शिक्षा नीति को एक कमेटी बनाकर लागू करना चाहिए, ताकि लड़कों का भविष्य बन सके।बंद प्रज्ञा केंद्र खोले जाएंगे, समस्याएं दूर होंगी

विधायक किशुन कुमार दास ने सदन में अल्पसूचित प्रश्न के दौरान राज्य के प्रज्ञा केंद्रों की कार्यशैली पर सवाल उठाया। उन्होंने प्रज्ञा केंद्रों से जाति, आवासीय, आय, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, समाजिक सुरक्षा सहित सभी प्रभार के सरकारी व गैर सरकारी प्रमाण पत्रों के संपादन में भेदभाव का आरोप लगाया। यह भी कहा कि अधिकतर प्रज्ञा केंद्र बंद हैं। इसपर विभागीय मंत्री ने जवाब दिया कि वर्तमान में 14500 प्रज्ञा केंद्र चालू हालत में हैं, जहां से सभी सरकारी सुविधाएं दी जा रही हैं। जो प्रज्ञा केंद्र किसी कारण से बंद हैं, उन्हें शुरू किया जाएगा।लघु उद्योगों के प्रोत्साहन के लिए निविदा व शर्तों में छूट दे रही है सरकार

विधायक भानु प्रताप शाही के लघु उद्योगों को बढ़ावा नहीं मिलने के सवाल पर विभागीय मंत्री ने कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में कार्यरत सूक्ष्म एवं लघु औद्योगिक इकाइयों को वार्षिक टर्नओवर व कार्य अनुभव से संबंधित निविदा एवं शर्तों में छूट दी गई है। लघु उद्योगों को निविदा निस्तारण का लाभ मिल रहा है। जो कमियां हैं, उसे दूर की जाएगी।

बालू गाडिय़ों से पैसे वसूलती है पुलिस, हो रही है कालाबाजारी

विधायक कमलेश कुमार सिंह ने सदन को बताया कि बालू गाडिय़ों से पुलिस पैसे वसूलती है। गरीबों को बालू नहीं मिलता है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास निर्माण, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तथा निजी गृह निर्माण में बालू का उठाव नहीं होने से प्रतिकूल असर पड़ रहा है। बालू की कालाबाजारी हो रही है। वास्तविक मूल्य से चार से पांच गुणा अधिक दर पर बालू मिल रहा है, जिससे आम लोगों को परेशानी हो रही है।

इस सवाल के जवाब में विभागीय मंत्री ने झारखंड बालू खनन नीति का हवाला देते हुए दो कैटेगरी के बालू घाटों की जानकारी दी। कहा कि बालू घाटों से पंचायत के अंतर्गत विकास कार्यों एवं निजी कार्यों के लिए पंचायत नि:शुल्क बालू का उपयोग करती है। वहीं, कैटेगरी-टू के अधीन 17 बालूघाट वर्तमान में चालू हालत में हैं। मंत्री ने बताया कि सभी उपायुक्तों को बालूघाट के दोनों कैटेगरी से अवगत कराया जा चुका है।

पुलिस बालू वाले वाहन की जांच नहीं करेगी। राज्य में अवैध खनिज उत्खनन, भंडारण व प्रेषण की रोकथा के लिए राज्य खनिज एवं जिला स्तरीय खनिज टास्क फोर्स गठित है। इससे अवैध खनन व प्रेषण की निगरानी की जाती है। अब तक राज्य में अवैध तस्करी व भंडारण मामले में 1132 प्राथमिकियां दर्ज हैं। 3554 अवैध वाहन जब्त हो चुके हैं और करीब दो करोड़ 82 लाख रुपये का जुर्माना भी वसूला जा चुका है।

वित्त रहित शिक्षा के लिए कमेटी गठन का कांग्रेस ने किया स्वागत

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के स्तर से विधानसभा में वित्त रहित शिक्षा नीति को समाप्त करने के लिए कमेटी गठन के प्रस्ताव का स्वागत किया है। कमलेश ने कहा है कि वित्तरहित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों को सिर्फ अनुदान पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

शिक्षक नियुक्त करने का उठा मामला


विधानसभा में विधायक नवीन जायसवाल ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से कॉमर्स प्रशिक्षित छात्रों को शिक्षक पद पर नियुक्त नहीं होने का मामला उठाया। इसपर सरकार ने स्वीकार किया कि ऐसे कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति के बाद हटा दिया गया है। मंत्री जगरनाथ महतो ने झारखंड हाई कोर्ट में राज्य सरकार द्वारा जारी शपथपत्र का हवाला देते हुए कहा कि कॉमर्स के विद्यार्थी प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षक नियुक्त नहीं हो सकते।

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा, 2005 द्वारा प्रारंभिक विद्यालयों के वर्ग छह से आठ तक के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम में इतिहास, भूगोल तथा राजनीति विज्ञान से संबंधित विषय वस्तु ही है। हालांकि, स्पीकर रवींद्रनाथ महतो ने कहा कि सरकार चाहे तो इसपर निर्णय ले सकती है। कई अन्य विधायकों ने भी इसपर निर्णय लेने की मांग की।

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