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नियमों को ताख पर रख,हो रहा फोर लेन सड़क निर्माण कार्य ।

अभिषेक राज गोड्डा/ गोड्डा-पंजबारा सड़क को फोरलेन में तब्दील करने वाली योजना भले ही आगामी दिनों में लोगों का समय बचाएगी। लेकिन वर्तमान में इस सड़क से गुजरने वाले लोगों का जीना मुहाल कर रखा है।

फोरलेन निर्माण के लिए गोड्डा से पंजबारा के बीच जगह जगह पुलिया व ड्रिनेज बनाने के लिए तोड़ी गयी पुरानी सड़क से उड़ती धूल से लोग परेशान हो रहे है।

सड़क से उठे धूल के गुब्बार लोगों के लिये परेशानी का सबब बन रहे है। फोरलेन सड़क के तय मापदंड के अनुसार दिन में दो बार टंकर से पानी का छिड़काव करना है।

यह काम निर्माण कार्य तक करने की बात है। लेकिन विगत छह माह जब से निर्माण कार्य शुरू किया गया है तब से शायद ही टंकर से पानी का छिड़काव करने आया हो।

वर्तमान स्थिति यह है कि 13 किलोमीटर सड़क पार करने में लोगों नरकीय सड़क से गुजरना पड़ रहा है।

फोर व्हीलर, भारी वाहन, बस आदि चलते हुए अपने साथ धूल का गुब्बारा भी लेकर साथ चलती हैं जिसके कारण दो पहिए व तीन पहिये वाहनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं।

खास कर गोढ़ी से रामनगर तक नगर परिषद का क्षेत्र हैं जहां लोग सड़क किनारे दुकान व घर बना कर रहते है। यहां के लोग भी इस धूल के गुब्बारों से परेशान है। इसके अलावे भी कई नियमों का कंपनी राजवीर कंट्रक्शन उल्लंघन कर रही है।

स्थानीय लोगों की माने तो गड्ढों में भरी उक्त मिट्टी के ऊपर से वाहन गुजरने पर धूल का बड़ा गुबार उठता है।

जिससे सामने व पीछे से आ रहे वाहनों के चालकों को गुबार की वजह से कुछ नजर नही आता है। जो बिहार को जोड़ने वाली सड़क जैसे महत्वपूर्ण स्थान में बड़ी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकते है, हालांकि छोटी-मोटी दुर्घटनाएं रोजना घटित हो रही है।

क्षेत्रीय निवासियों एवं रोजाना उक्त मार्ग से सफर करने वाले लोगों अनुसार धूल के गुबार प्रदूषण फैला रहे है।

जिससे आधे दर्जन गांव के लोग परेशान हो रहे है। लोगों को दुर्गापूजा जैसे सामाजिक व धार्मिक त्यौहार पर परेशानी अलग झेलनी पड़ने वाली है।

विशेषकर खाद्य सामग्री बेचने वाले दुकानदार अपने विक्रय हेतु रखे गये खाद्य पदार्थो में चौबीसों घंटे पडऩे वाली धूल से परेशान हो रहे है। यही नही उक्त मार्ग से गुजरने वाले लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

लोग मुंह कर कपड़ा बांधकर निकल रहे है, ताकि धूल के कण सांस के जरिये अंदर न जा सकें। यही नही वर्तमान में खेतों में धान की फसल लगायी गयी है।

इसके अलावा अन्य फसलें अभी खेतों में लगी हुई है। उक्त मार्ग से उठे धूल के गुबार खेतों में जाने से फसलें प्रभावित हो रही है।

जानकार यह भी बताते है कि सड़के के किनारे की मिट्टी गड्ढों में डाली जाने से कहने को गड्ढे पूर दिये गये है।

जो कि समाधान के स्थान पर अनेको समस्याओं को जन्म दे रहा है। सड़क निर्माण करने वाले लोगों पर निगरानी या तो रखी नही जा रही है अथवा मिलीभगत के चलते महज खानापूर्ति कर संबंधितों द्वारा अपनी जेब गर्म की जा रही है।

वजह चाहे जो भी हो इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।

उल्लेखनीय है कि पूर्व में गोड्डा-पंजबारा सड़क में पड़े गड्ढे इतने बड़े-बड़े थे कि पता ही नही चलता था कि सड़क में गड्ढे है, अथवा गड्ढे में सड़क कहां है। अब धूल के उठे गुबार देखकर प्रतीत होता है कहीं तूफान तो नही आ गया है।

बहरहाल सड़कें जो किसी भी राष्ट्र, प्रदेश व जिले की विकास रेखा मानी जाती है उनके साथ खिलवाड़ करना देशद्रोह से कम नही है। जिला प्रशासन से जनहित में क्षेत्रवासियों एवं उक्त मार्ग से आवागमन करने वाले वाहन चालकों द्वारा अपेक्षा व्यक्त की गई है कि हो रहे फोरलेन सड़क निर्माण कार्य की जांच करवाई जाये। साथ ही दोषियों के विरूद्ध उचित कार्यवाही की जाये ।

एलर्जी के केस बढ़ गए : विशेषज्ञ

इधर शहर के प्रख्यात चिकित्सक डॉ अशोक कुमार की माने तो धूल के कणों से एलर्जी के केस बढ़ गए हैं। अस्थमा और क्रानिक आब्सट्रेटिक पल्मोनरी डिसीज (सीओपीडी) के मामले भी दोगुने हो गए हैं। इन बीमारी से पीड़ित लोगों को मास्क लगाकर ही वाहन चलाना चाहिए।

साथ ही भीगने से बचना चाहिए। इसके अलावे उन्होंने बताया कि मोटरसाइकिल चालक हेलमेट व चश्मा का इस्तेमाल वाहन चलाते वक्त करें इससे काफी हद तक धूलकणों से बचा जा सकता है।

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