Home / गोड्डा प्रखण्ड / गोड्डा / दस वर्ष से घर के बाहर रह रही कुषमी देवी,आज शौचालय में काट रही जीवन !चार बेटों की मर चुकी संवेदना ।

दस वर्ष से घर के बाहर रह रही कुषमी देवी,आज शौचालय में काट रही जीवन !चार बेटों की मर चुकी संवेदना ।

“तुम सच में हो घर की बुनियाद, तुमसे ही दुनिया बने महान, तुम्हारी हम है पहचान, तुम में जीवन की वह प्यारी शक्ति है, तुम अद्वितीय हो, अनुठी हो, अनमोल दिव्या की शक्ति हो, तुम से घर का प्रज्वलित घर का हर कोना-कोना, कैसा भी रहा हो समय सुख का दुख का, मगर तुम न बदली, तुम हो ज्ञान का वह प्रकाष पुंज,जो कभी नहीं बुझता,नारी हो मां “

यह कविता की कुछ चंद लाइन एक बेटे द्वारा अपने मां के लिए लिखी गयी है। लेकिन आज हम उन बेटों की बात करेंगे जिसे समाज कलियुगी कहता है। जिला मुख्यालय के महज चार किलोमीटर की दूरी पर सदर प्रखंड के कन्हवारा पंचायत के हरिपूर गांव अवस्थित है। जहां एक कुषमी देवी (65) वर्ष की वृद्धा अपने कलियुगी बेटों के कारण एक चार फीट लंबा व चार फीट चौड़े शौचालय में रहने को मजबूर है। इस मां की कहानी काफी दर्दनाक है। विगत बीस वर्ष पूर्व ही इसके पति बनेली राउत का देहांत हो गया। इसके बाद पूरा परिवार अलग अलग रहने लगा। कुषमी देवी का चार बेटा है। इसमें राजेन्द्र राउत, महेन्द्र राउत, मनोज राउत व अनुज राउत शामिल है। इसके अलावे दो बेटी भी हैं जिसकी शादी हो चुकी है। वह वर्तमान में स्वच्छ भारत अभियान के तहत बनाए गए शौचालय में रहने को मजबूर है। इसके पूर्व की कहानी और भी दर्दनाक है। यह बिना घर के लगभग पांच दस साल से रह रही है। वह बताती है इसके पहले वह इधर उधर गांव में भटकते फिरती थी। गांव के ही एक समाजसेवी के घर में रहती थी। इसके अलावे उसका बसेरा गांव के मंदिर, मंडली आदि जगहों पर भी रहता था। उसके हिस्से कुछ जमीन भी है। लेकिन इस उम्र में उसे इतनी ताकत भी नहीं जो वह अपना छत बना सके। दबी आवाज में वह बताती है कि जब उसके पति का देहांत हुआ तो थोड़ा दिन सब कुछ ठीक ठाक रहा। जैसे जैसे बेटों की शादी होती गयी वैसे वैसे जीवन की तस्वीर भी बदलती गयी। अचानक चारों बेटा अलग अलग रहने लगा। कुछ दिनों तक एक दूसरे बेटे के यहां पर रही। लेकिन अब उसे रखने में बेटे भी कतराने लगे। जिस हाथ से बेटों का लालन पालन किया था आज उसी हाथ ने उसे घर से धक्का मार कर बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस दौरान वह भीख मांगने को भी मजबूर हो गयी। एक माह पूर्व एसबीएम के तहत उसके नाम पर एक शौचालय बनवाया गया। लेकिन आज वह इस शौचालय में रहने को ही मजबूर है।

नहीं मिला प्रधानमंत्री आवास का लाभ :

गांव के ही मनीष कुमार बताते है कि मिषन के तहत बन रहे प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ उसे नहीं मिल पाया है। इसे दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि एक ऐसे लाभुक जिसे सबसे ज्यादा जरूरत इस योजना की है उसे नहीं मिल रहा है। यह मामला सिस्टम पर भी सवाल खड़ करता है। जब प्रधानमंत्री आवास के लिए रोजगार सेवक, जनसेवक है इसके बावजूद कुषमी देवी को आवास योजना का लाभ नहीं मिला, यह खुद में एक सवाल खड़े करता है।

क्या कहते है मुखिया :

मामले की जानकारी मिली है। अगर वृद्ध महिला का नाम बीपीएल सूची में है तो इससे संबंधित इस योजना की लाभ दिलायी जाएगी। अगर नहीं है तो उसका नाम पहले बीपीएल सूची में जोड़ने के लिए आवेदन दिया जाएगा।

-परमानंद साह, मुखिया, कन्हवारा पंचायत।

 

और अंत में

घुटनों के बल से रेंगते-रेंगते,जाने कब पैरो पर खड़ा हुआ,मेरी ममता की छाव मे,जाने कब तू बड़ा हुआ !!

काला टिका दूध मलाई,कल तक सब कुछ वैसा था !!मैं ही मैं हूँ हर जगह,मगर प्यार ये तेरा कैसा है ?

About मैं हूँ गोड्डा (कार्यालय)

Check Also

सुशासन का दंभ भरने वाली बिहार पुलिस की बर्बरता का शिकार हुआ आशुतोष,पुलिस की पिटाई में मौत ।

राघव मिश्रा/लालू के जंगलराज को पटखनी लगाकर अपनी सुशासन की शंखनाद करने वाली बिहार सरकार …

10-30-2020 13:37:28×