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रात स्कूल में नहीं रहती है कस्तूरबा विद्यालय की शिक्षिकाएं !

बराबर घटनाओं के बाद भी नहीं चेत रहा विभाग, असुरक्षित रहतीं है छात्राएं ।

अभिषेक राज गोड्डा/ आए दिन कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्य़ालय घटित हो रहे घटनाओं के बाद भी न तो विभाग चेत रहा है और न ही स्कूल की शिक्षिकाएं। आलम यह है कि रात में वार्ड, शिक्षिकाएं स्कूल में नहीं रहती है। रात में उनका आशियाना अधिकतर अपने घर पर ही होता है। सरकार के लाख कोशिशों के बावजूद कस्तूरबा स्कूल की कर्मी अपने में बदलाव नहीं ला रही है। रात में वार्डन व शिक्षिकाओं का ठहराव हो इसके लि सरकार ने बायोमिट्रीक हाजिरी की व्यवस्था कर दी है। लेकिन आए दिन इन मशीनों में तकनीकि खराबी का हवाला देकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

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जिससे कर्मियों को हाजिरी बनाने की झंझट ही खत्म हो जाती है। जानकारों की माने तो जिला मुख्यालय के आसपास वाले कस्तूरबा विद्यालयों में हाजिरी बनाने के बाद अपने घर को लौट जाती है। फिर सुबह स्कूल समय के पहले विद्यालय पहुंच कर हाजिरी बनाती है। दिन भर कर्मियों से भरा पड़ा रहने वाला विद्यालय में मात्र दो या तीन कर्मी दिखेंगे। इसमें भी एक गार्ड और रसोईया शामिल रहती है।

कागज पर होता है अनुश्रवण :

राज्य परियोजना ने कस्तूरबा कर्मियों की नकेल कसने के लिए कई सारी नियम बना दी है। जिसे पूरा कराना जिला पदाधिकारी का काम है। लेकिन कर्मी तरह तरह के हथकंडे अपना कर रात में फरार रहती है। इसके लिए विभाग द्वारा सप्ताहिक अनुश्रवण का भी आदेश है। इसके लिए विभाग के अधिकारी गठित टीम के साथ कस्तूरबा की जांच करेंगे। लेकिन यह काम जिले मे कागज पर ही चल रहा है। अनुश्रवण का आदेश भले ही सप्ताहिक हो, लेकिन यह जांच एक या तो कभी कभार दो माह में होता है। वह भी सिर्फ खानापूर्ति करने के नीयत से की जाती है।
शिकायत के बावजूद नहीं होती है कार्रवाई :

इस मामले पर जिला परिषद की उपाध्यक्ष लक्ष्मी चक्रवर्ती ने कहा कि क्षेत्र भ्रमण में कई बार विभिन्न कस्तूरबा विद्यालय की जांच की गयी है। जांच का प्रतिवेदन जिला अधिकारी को भी समर्पित किया गया है। साथ ही स्कूल में शिक्षिकाओं की नहीं रहने की भी लिखित शिकायत की गयी है।

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लेकिन आश्चर्य है कि आज तक किसी भी कर्मी पर कार्रवाई नहीं हुई है। इस मामले को जिला परिषद की बैठक में भी उठाया गया है। प्रोसेडिंग भी दर्ज होता है लेकिन यह फाइल भी ठंडे बस्ते में चला जाता है।

क्या कहते है पदाधिकारी :

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बायोमिट्रीक मशीन कही भी खराब होने की सूचना नहीं है। इसके लिए राज्य से भी एक कर्मी को नियुक्त किया गया है। जो बायोमिट्रीक मशीन की मरम्मति करता है। जहां तक औचक निरीक्षण की बात है तो पिछले दिनों की गयी थी। सबकुछ ठीकठाक पाया गया था। स्कूल खुलने के बाद नहीं किया गया है। विद्यालय की छात्राओं के सुरक्षा के लिए विभाग प्रयासरत है। अगर ऐसा कहीं भी पाया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी।
जितेनद्र सिन्हा, जिला शिक्षा अधीक्षक, गोड्डा।

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