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विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस : क्या खतरे में है मीडिया?

प्रेस की आजादी और दिवस दोनो अलग अलग जगहों पर सिमट कर रह गई है ,मीडिया जगत या मीडिया में काम कर रहे कर्मी कहीं न कहीं प्रोफेशनल होते जा रहे हैं !लेकिन जरूरत है तो सिर्फ अपनी कलम की धार को बदलने की !

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मीडिया का काम सरकार की स्वच्छ  आलोचना करने की होती है लेकिन हमसभी किस ओर जा रहे हैं..आइये आज के दिन से शुरुआत करें ….

आज विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस है!प्रेस की आज़ादी को लेकर इस दिन की शुरुआत की गई थी,संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 मई को ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ की घोषणा की थी !

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इस दिन की शुरुआत पत्रकारों की स्वतंत्रता के लिए की गई थी, लेकिन आज पत्रकारों की स्वतंत्रता छीनी जा रही है,पत्रकार आज़ाद नहीं हैं, अब उन्हें भी डराया धमकाया जाता है ! सच्चाई को सामने लाने की उन्हें सज़ा दी जाती है या तो उन्हें मौत के घाट उतार दिया जाता है या फिर कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने के लिए फंसा दिया जाता है !पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है, लेकिन अब पत्रकारों के अधिकारों पर रोक लगती जा रही है !

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दुनियाभर में पत्रकारिता को लेकर हो रही चिंताओं और चुनौतियों के बीच पत्रकारिता के स्वरूप और चरित्र  में बदलाव आया है! कई पत्रकारों ने मीडिया को अपने व्यवसाय से जोड़ लिया है !

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अखबारों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण उनके खर्चे भी बढ़ रहे हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए ज्यादातर अखबार या मीडिया संस्थान सरकार और बड़ी कंपनियों पर निर्भर होने लगे हैं ! अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट’ के शोध के अनुसार, देश में वर्ष  1992 से अब तक 91 से अधिक पत्रकारों को मौत के घाट उतारा जा चुका है !वहीं अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स’ द्वारा 25 अप्रैल 2018 को विश्व प्रेस ‘स्वतंत्रता सूचकांक-2018’ रिपोर्ट जारी की ,इस रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग पिछले वर्ष की तुलना में दो स्थान गिरकर 138वें स्थान पर पहुंच गई है,भारत में प्रेस की स्वतंत्रता भारतीय संविधान के अनुच्छेद-19 में भारतीयों को दिए गए अभिव्यक्ति की आजादी के मूल अधिकार से सुनिश्चित होती है।
#WorldPressFreedomDay

राघव मिश्रा

About मैं हूँ गोड्डा (कार्यालय)

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