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3 वर्ष बाद प्रभा मुनि के चंगुल से बचकर आई ,लेकिन घर आया उसका शव ।

दिल्ली से रेस्क्यू कर लायी गयी नाबालिग लड़की की मौत बुधवार को रांची रिम्स में मौत हो गयी। गुरूवार को शव को पीड़िता के गांव लाया गया।

जहां परिजनों को सौंपा गया। परिजन पूर्व से ही इसका इंतजार कर रहे थे। इस दौरान महागामा अनुमंडल पदाधिकारी बंका राम मौजूद थे।

उन्होनें पीड़ित परिवार को दस हजार रूपया सहायता राशि के रूप में प्रदान की। इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना जतायी। साथ ही यह कुकर्म के पीछे आरोपी को सलाखों के पीछे लाया जाएगा।

उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पीड़िता के मां-बाप का वृद्धा पेंशन, इंदिरा आवास दिलवाने की भी बात कही।

साथ ही प्रखंड स्तर के एक पदाधिकारी को पूरे परिवार को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसका ख्याल रखने का निर्देश दिया।

मृतका के शव को एक ताबूत में बंद कर मिट्टी में दफन किया गया। इस दौरान बीडीओ राजीव कुमार के अलावे प्रधान एलेकजेंडर मालतो सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद थे।

मालूम हो कि नाबालिग पहाड़िया बच्ची दिल्ली के एक परिवार के यहां काम करती थी।

जहां उसे शारीरिक और मानसिक तौर पर बुरी तरह से प्रताड़ित किया गया था। ज्ञात हो कि 25 सितंबर को झारखंड बाल संरक्षण आयोग ने 16 बच्चों को मुक्त कराया था ।

जिनमें से दो गोड्डा की थी. और इन्हीं में से एक थी नाबालिग पीड़िता। जिसे दिल्ली से मुक्त कराने के बाद पहले गोड्डा भेजा गया था, जहां उसकी हालत बिगड़ी देख रांची के रिम्स में भर्ती कराया गया था।

उसका इलाज कर रहे चिकित्सकों ने भी बताया कि पीड़िता के कई बीमारियों से पीड़ित थी। उसे लगातार झटके भी आ रहे थे। डॉक्टरों ने उसका सिटी स्कैन भी कराया था। लेकिन झटके आने का सही कारण पता नहीं चल पाया था नाबालिग पहाड़िया बच्ची टीबी से भी पीड़ित थी।

इतना ही नही जहां पीड़िता रह रही थी वह परिवार इतना बेरहम था कि नाबालिग के मुंह में क्लिप लगा दिया था जिससे वह कुछ बोल न सके।

नाबालिग लड़की के जीभ में पिन लगाने के कारण उसकी जीभ चोटिल हो गयी थी और झटका आने के बाद जीभ काट कर बाहर आ गई थी।

उसने पुलिस को दिए बयान में सिमडेगा की मानव तस्कर प्रभा मुनि के काले कारनामों का भी खुलासा किया था।

उसने बताया था कि किस तरह दिल्ली में ले जाकर बेचा गया था और उसे किस तरह प्रताड़ित किया गया था।

उसने यह भी बताया था कि तीन वर्ष पूर्व कुसुमघाटी का ही सुरेन्द्र मालतो उसे नौकरी दिलवाने के नाम पर दिल्ली ले गया था।

जिसके बाद उसका कोई खोज खबर नहीं आयी। लेकिन तीन साल बाद वह पन्द्रह दिन के लिए जरूर लौटी लेकिन बुधवार को परिवार को उसके मौत की खबर आयी।

About मैं हूँ गोड्डा (कार्यालय)

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