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प्रकाश पुंज बनकर पथ प्रदर्शक बना हुआ है पोस्ट ग्रेजुएट चायवाला विद्यार्थी ।

बरुन मिश्रा.पोडै़याहाट : आज के युवा जहां पढ़ लिख कर बेरोजगारी के कई तर्क देते हैं .तनाव में आ जाते हैं .अभाव का रोना रोते हैं। रिजल्ट निकलने के बाद अवसाद में आकर गलत राह पकड़ लेते हैं । राह से भटके ऐसे युवकों के लिए गोड्डा कॉलेज के फोर्थ सेमेस्टर का छात्र रामानंद साह कार्यशैली प्रकाश पुंज बनकर पथ प्रदर्शक बना हुआ है

जून महीने में मेरी मुलाकात राजकीय कन्या उच्च विद्यालय में बने इंटर आर्ट्स के मूल्यांकन केंद्र में एक कोने में वह चाय बनाते रामानंद साह पर गया जो मूल्यांकन कार्य कर रहे परीक्षकों को चाय पिला कर जो समय बचता हुआ अपने पढ़ाई में लगाता था । एक दिन मेरा ध्यान उसके ड्रेस पर गया और पढ़ते हुए मुद्रा में। मैंने पूछा क्या करते हो तुम्हारा ड्रेस तो लग रहा है कि तुम कॉलेज के छात्र हो। उन्होंने बताया कि वह पोस्टग्रेजुएट फोर्थ सेमेस्टर का हिंदी विभाग का छात्र है।
उन्होंने जो कहानी बताया वह काफी मार्मिक था। उन्होंने बताया कि गरीबी उसे अभिशाप में मिला है । उसका पिता गर्ल्स हाई स्कूल के कैंपस में झालमुड़ी बेचकर किसी तरह अपने घर का रोजी रोटी का जुगाड़ करते हैं । मां गांव में ही एक परचून की दुकान खोले हुए हैं। एक बहन है जो बीए पार्ट वन में पढ़ रही है उसकी भी पढ़ाई और शादी का खर्च कहां से आएगा ।छोटा भाई दशम का परीक्षा दिया है आगे उसकी भी पढ़ाई करानी है। अकेला पिताजी इतने सारे कार्य इतने सारे जिम्मेदारी उठा रहे हैं तो उसी में मेरा भी एक सहयोग है। इसलिए कैंपस के अंदर चाय बेचने का काम कर रहा हूं। उन्होंने बताया कि जब मैट्रिक का मूल्यांकन कार्य चल रहा था तो वह प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में भी सभी परीक्षकों को के पास चाय बेचा करता था।

पढाई के साथ चाय बेचने वाला विद्यार्थी
पढाई के साथ चाय बेचने वाला विद्यार्थी

यह पूछे जाने पर आगे चलकर तुम क्या करना चाहते हो तो कहा कि पैसा जमा कर रहा हूं किसी तरह भी ऐड करके शिक्षक बन जाऊं यही उद्देश्य है । अन्य प्रतियोगी परीक्षा का तैयारी कर रहा हूं।
जिस देश में चाय बेचकर प्रधानमंत्री का मुकाम हासिल किया जा सकता है । क्या ऐसे में रामानंद को चाय बेचकर काम हासिल हो सकता है ? क्या या एक यक्ष प्रश्न है ?

प्रधानाचार्य व मूल्यांकन केंद्र निदेशक परितोष पाठक ने कहा कि ऐसे बिरवान छात्र कम ही मिलते हैं जो पढ़ते-पढ़ते परिवार के लिए आर्थिक रूप से सहायक होते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह चाय बनाते हुए या देते हुए इन्हें थोड़ी सी भी से झिझक नहीं है। एम ए में पढ़ने वाले छात्र अगर ऐसी सोच रखते हैं तो इसका भविष्य जरूर उज्जवल होगा।

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