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पारा शिक्षकों ने बढाया सियासत का पारा :पढ़िए एक सियासी पर्यावरण ।

अभिजीत तन्मय/पारा शिक्षकों ने बढाया सियासत का पारा सूबे में झारखण्ड स्थापना दिवस के दिन जिस तरह से पारा शिक्षकों ने सरकार के विरोध में आंदोलन किया और फिर सरकार द्वारा जिस तरह लाठीचार्ज कर उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया गया उससे पारा शिक्षकों में उबाल आ गया। कई शिक्षकों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया तो सैकड़ों शिक्षकों को बर्खास्त भी किया गया। इस आदेश के साथ कार्रवाई के बावजूद भी पारा शिक्षकों का आंदोलन व उबाल कम होने का नाम नही ले रहा है।

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हर प्रखंड मुख्यालय में विरोध स्वरूप पारा शिक्षकों ने गिरफ्तारी भी दी। अभी वर्तमान में सभी भाजपा के सांसद और विधायक के आवास पर #घेरा डालो डेरा डालो के तहत पारा शिक्षक धरना दे रहे है।
इधर सरकार ने सबों को अल्टीमेटम देते हुए तुरंत वापस काम पर जाने का निर्देश दिया था लेकिन इसका कोई प्रभाव नही पड़ा।सैकड़ों स्कूल बंद होंगे। विपक्ष की सिसायत भी तेज हो गयी। सभी पार्टी पारा शिक्षकों के हितैषी बनकर सरकार के विरोध में बयान देने लगे साथ ही साथ इन पारा शिक्षकों को प्रलोभन भी दिया कि हमारी सरकार बनने के बाद सबों को स्थायी कर दिया जाएगा।
अब सवाल ये उठता है कि पूर्व में जब उनकी सरकार थी तब क्या हुआ था?
इन आंदोलनों को देखते हुए साथ ही साथ विपक्ष का सहयोग देखते हुए भाजपा के ही सांसद और विधायक सरकार के खिलाफ़ आवाज उठाने लगे। सांसद निशिकांत दुबे के बाद भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सह बोरियो के विधायक Tala Marandi ने कल चेतावनी देते हए कहा कि अगर पारा शिक्षकों को बर्खास्त कर नई नियुक्ति की जाएगी तो अंजाम बुरा होगा। वे सत्ता में रहते हुए विपक्ष की भूमिका में नजर आएंगे। सरकार के खिलाफ खुल कर पारा शिक्षकों के समर्थन में उतर जाएंगे।
धनबाद जिला के बाघमारा विधानसभा के बाहुबली विधायक ढुल्लू महतो ने भी इस मुद्दे पर सरकार को चेताते हुए कहा कि अगर पारा शिक्षकों को बर्खास्त किया गया तो वो इस्तीफा दे देंगे।
पूरे राज्य के दर्जनों विधायक एवम मंत्रियों ने चुनाव को देखते हुए सरकार पर दवाब बनाने का निर्णय किया। कई विधायक सम्बंधित मंत्रियों से मिलकर फ़ोटो को सोशल मीडिया पर डाल रहे है ताकि क्षेत्र की जनता ये जान सके की वो इस मुद्दे पर कितना संजीदा है।
67000 पारा शिक्षकों का परिवार सरकार के आदेश से प्रभावित हो जाएगा। इतनी बड़ी संख्या अगर विरोध में उतर जाए तो सरकार की स्थिति और खराब हो जाएगी। चुनाव में नैया पार लगाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है यही कारण है सरकार अभी वेट एंड वॉच की स्थिति में है। किसी भी निर्णय को लेने से पहले घर(पार्टी) और बाहर का आंकलन कर रही है ताकि बाद में कोई संकट ना आ जाये।
ठोस निर्णय कब निकलेगा ये तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन सरकार अपना कदम फूँक-फूँक कर रख रही है।

30 नवम्बर को झाविमो के द्वारा राजभवन के सामने धरना प्रदर्शन आहूत है जो इस लड़ाई में घी का काम करेगी। वैसे तो सभी रोटी ही सकेंगे लेकिन अब आटा किसका गीला होगा या किसकी रोटी जलेगी ये समय बताएगा।

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