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कस्तूरबा विद्यालय के सुरक्षा पर महज खानापूर्ति  !

विभिन्न प्रकार की घटनाओं के बाद भी नहीं चेत रहा विभाग 

आए दिन विभिन्न जिलों में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में कई प्रकार की घटनाएं घटित हो रही है। हाल ही में जामताड़ा कस्तूरबा विद्यालय में छात्रा की लाश फंदे से लटकती मिली। इसके अलावे भी विगत माह में कई घटनाएं घटित हो चुकी है। लेकिन इन सब घटनाओं से सीखे लेने के बजाय विभाग महज खानापूर्ति करने में लगा हुआ है। कस्तूरबा विद्यालय के सुरक्षा के नाम पर महज कागजी प्रक्रिया पूरा कर लेने के बाद शांत हो जाते है।
अब तक नहीं हो पायी महिला पुलिस कर्मी की तैनाती :

जिले में शिक्षा परियोजना से आठ कस्तूरबा विद्यालस संचालित हो रही है। इनमें बसंतराय प्रखंड को छोड़कर अन्य सभी प्रखंडों में कस्तूरबा विद्यालय चल रहा है। विगत वर्ष 2017 के अगस्त माह में तत्कालीन परियोजना निदेशक मुकेश कुमार ने निर्देश दिया था सभी कस्तूरबा विद्यालयों में महिला पुलिस कर्मी तैनात होगी। इसके लिए निर्देशित पत्र भी सभी जिलों के उपायुक्त व जिला शिक्षा अधीक्षक को भेजा गया। जहां से सुरक्षा की मांग जिलों के एसपी से की गयी।

लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि महीनों बाद भी महिला पुलिस कर्मी की तैनाती नहीं हो पायी है। जिसके कारण अनहोनी घटना की आशंका बनी हुई है। आज भी कस्तूरबा विद्यालय के सुरक्षा की जिम्मेवारी एक निजी गार्ड द्वारा की जाती है जिसके पास आत्मरक्षा के लिए भी कोई हथियार नहीं है। ये सुरक्षा गार्ड दैनिक मजदूरी पर बहाल किए गए है। इसके अलावे भी कई प्रकार के निर्देश सुरक्षा के नाम पर दिए गए। जो सिर्फ कागजों पर ही सिमट कर रह गए है। इनमें रात्रि में पुरूष गार्ड की इंट्री पर रोक, छात्राओं के हॉस्टल में पुरूषों की पाबंदी आदि है।

न तो चाहरदीवारी की ऊंचाई बढ़ी न ही कटिले तार लगे :

विगत दो वर्ष पूर्व पथरगामा कस्तूरबा प्रककरण के बाद सुरक्षा पर कई सवाल खड़े हुए थे।  इतना ही नहीं मापदंड के अनुरूप जिले के ही नही राज्य के कस्तूरबा विद्यालय की सुरक्षा भगवान भरोसे थी। इस घटना के बाद विभाग ने तो सीखे लिया। लेकिन पदाधिकारी द्वारा लिए गए फैसले जमीन पर उतर ही नहीं पाए। सुरक्षा के नाम पर सीसीटीवी कैमरा लगाकर खानापूर्ति की गयी। इसमें तत्कालीन परियोजना निदेशक बी राजेश्वरी ने निर्देश दिया था कि कस्तूरबा विद्यालय के चहारीदवारी की लंबाई दो-दो फीट बढ़ा दी जाए। इसके ऊपर स्टैंड लगाकर कटीले तार भी लगाया जाए। जिससे किसी भी प्रकार का असमाजिक तत्व प्रवेश पर रोक लगायी जा सके।  लेकिन आज भी यह निर्देश फाइलों के पन्नों तक ही सिमट कर रह गया है।

कस्तूरबा कर्मी अपनी कार्यशैली से नहीं आ रहे वाज :

जिन पर कस्तूरबा विद्यालय की पूर्ण जिम्मेवारी है वही अपनी जिम्मेवारी नहीं समझ रही है। कस्तूरबा विद्यालय में वार्डन पर ही पूरी जिम्मेवारी है। लेकिन आए दिन कस्तूरबा में वार्डन सहित शिक्षिका अनुपस्थित पायी जाती है। जिला मुख्यालय के आसपास के अधिकतर कस्तूरबा विद्यालयों में रात में कोई भी कर्मी नहीं ठहरती है। सूत्रों की माने तो बायोमिट्रक हाजिरी बनाने के बाद वार्डन सहित शिक्षिका गायब रहती है। इस बात का खुलासा पदाधिकारियों औचक निरीक्षण में होते रहती है। पदाधिकारी के लाख समझाने के बावजूद कस्तूरबा कर्मी अपने कार्यशैली सुधारने का नाम नहीं ले रही है। इसके लिए बनायी गयी अनुश्रवण समिति के ढुलमूल रवैये के कारण कर्मी बच जाते है।

 

क्या  कहतीं है प्रभारी : 
जामताड़ा जिले में कस्तूरबा विद्यालय में घटना के बाद विभाग स्तर से किसी प्रकार का दिशा निर्देश नहीं मिला है। लेकिन जिला स्तर से विभिन्न कस्तूरबा विद्यालयों में काउंसिलिंग कराने की योजना है। जिसमें शिक्षिकाओं के साथ छात्राओं का बेहतर संबंध स्थापित हो सके। साथ ही शिक्षिकाओं  व वार्डन को भी निर्देश दिया गया है कि छात्राओं के साथ दोस्त बनकर उनके मन में चल रही बातों को जानने का प्रयास करें। जहां तक सुरक्षा का सवाल है इसमें परियोजना निदेशक के पत्र को संलग्न कर पुलिस अधीक्षक से सुरक्षा की मांग की गयी थी। लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हो पायी है। 

-सोनी कुमारी, जिला बालिका शिक्षा प्रभारी, झारखंड शिक्षा परियोजना गोड्डा।

 

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                                                                            मैं हूँ गोड्डा से अभिषेक राज की रिपोर्ट 

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