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परत दर परत खुल रही विद्यालय में नक्सली की धमक की खबर ।

आखिर कौन था वो सख्स जो काले ड्रेस में इंट्री लिया था विद्यालय में ?

फाइल फोटो ,ग्राफिक्स के जरिये दिखाने का प्रयास

*आखिर क्यों खौफ में है बच्ची ?

एक खबर ऐसी जो जिला प्रशासन से लेकर तमाम शिक्षा अधिकारी की नींद हराम कर दी थी,पिछले दिनों दो प्रतिष्ठित अखबार में छपी गोड्डा जिले के विद्यालय में नक्सली गतिविधि को लेकर आई खबर सुर्खियां बनी एवं आला अधिकारी को इसपर अपना पक्ष देने को मजबूर होना पड़ा लेकिन धीरे धीरे उस खबर की सुर्खियों ने नया मोड़ ले लिया है ।आज जैसे ही संथाल परगना की आईजी सुमन गुप्ता इस बात को नकारा कि गोड्डा के लिए जो भी खबर अखबार की सुर्खियां बनी वो भ्रामक थी ,ठीक उसी वक्त एक बच्ची उपायुक्त से मिलकर के इस बात की शिकायत करती है कि उसके साथ रात के अंधेरे में आज से ठीक एक माह पहले उसी विद्यालय में कुछ गलत हुआ था । वो बच्ची उसी मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक के पास भी गई थी लेकिन उसकी मुलाकात पुलिस अधीक्षक से नही हो पाई ।

काले ड्रेस में आई लड़की ने हथियार दिखाकर कही पूरे विद्यालय को उड़ा देंगे :पीड़िता

फाइल फोटो ,ग्राफिक्स के जरिये दिखाने का प्रयास
फाइल फोटो ,ग्राफिक्स के जरिये दिखाने का प्रयास

पीड़िता अपने बयान में आप बीती बताते हुए कहती है कि हम बाथरूम के लिए रात में उठे तो मुझे किसी के खड़े होने का आभास हुआ जब बाथरूम से लौटे तो देखे की वो आगे आ गई है और काले रंग के ड्रेस में थी,मुह पर भी कपड़ा बंधा हुआ था ,पैर में बूट वाला जुता था,कई पैकेट वाला पैंट पहनी हुई थी एक हाथ से मुझे पकड़ी और दूसरे हाथ मे हथियार था ,जब उसने पीड़िता का नाम पता पूछी तो पीड़िता ने डर के मारे जानबूझकर गलत नाम पता बता दी,जिसके बाद उसने विद्यालय के अंदर कहां क्या है और कौन कौन है जैसे सवाल पूछने लगी तो पीड़िता खौफ में आ गई नही बताने पर पूरे विद्यालय तक को उड़ा देने की धमकी तक दी गई ।काले ड्रेस वाली वो लड़की जो विद्यालय के अंदर प्रवेश की थी उसने एक केमिकल निकालकर रखी ,पीड़िता आप बीती के दौरान यह स्वीकार की है कि हम डरे परन्तु हिम्मत से काम लिए ,मुझे चक्कर आ रहा था बगल में पानी था जहां हम गिर गए जिसके बाद मुझे पकड़कर ले जाने का प्रयास किया गया लेकिन हम मरने का नाटक कर दिए ,मेरा गला भी दबाया गया ,हम कुछ देर के लिए सांसे रोक दिए बार बार मुझे छूकर देखा जा रहा था और हम सांस रोक रहे थे जिसके बाद मेरे मुह पर कपड़ा ढक दिया गया और उसके बाद मुझे कुछ याद नही है ।

अब सवाल ये उठता है कि आईजी के द्वारा क्लीन चिट देने के बाद पुलिस विभाग इस बात को कैसे स्वीकार करे कि उस विद्यालय में सचमुच ऐसी घटना को अंजाम दिया गया है ।लेकिन मीडिया के सामने दिए गए बयान में बच्ची इस बात को स्वीकार करके साबित कर दी है कि अंदर ही अंदर कुछ खिचड़ी जरूर पक रही है ।क्योंकि घटना दो जुलाई की रात की है जिसके बाद बयान में लड़की ने स्पष्ट रूप से कहा कि घटना हुई है ,जिसमे रात के अंधेरे में एक लड़की काले ड्रेस में विद्यालय में इंट्री लेती है ,जिसका चेहरा ढका हुआ था,वो उसे जबरन अपने साथ ले जाना चाह रही थी ,लेकिन यहां पर इस बच्ची की बहादुरी की दाद देनी पड़ेगी की की उस काले नकाब में आई लड़की के सामने डटकर खड़ी रही ,और गिरकर बेहोसी की नाटक कर जमीन पर पड़ी रही ,उस कर्म में उसके सिर में चोट भी आई ,सुबह स्कूल की शिक्षिकाओं के द्वारा उसे सदर अस्पताल में भर्ती भी करवाया गया ,जिस चीज का लिखित रिकॉर्ड अस्पताल के रजिस्टर में तीन जुलाई के तारीख में दर्ज भी है ।

परिजनों से भी छुपाया गया इतनी बड़ी बात :

इलाज के दौरान ही इस बात की जानकारी पीड़िता के परिजनों को दे दी गई ,यह कहते हुए की बाथरूम जाने के क्रम में चक्कर आ गया था जिसके बाद गिरकर बेहोश हो गई थी और फिर परिजनों को उसे घर ले जाने का दवाब भी बनाया गया ,लड़की घर जाने से साफ इंकार करते हुए पुनः विद्यालय चली गई लेकिन लड़की के आगे के बयान के अनुसार विद्यालय में उसे अपना मुह बंद रखने को कहा गया । वहाँ लड़की में विभाग की महिला पदाधिकारी से बात करने की इक्षा जताई लेकिन वहां भी उसकी बातों को दबा दिया गया ,उसने सुरक्षा के मुद्दे पर विद्यालय एसेम्बली में भी सवाल उठाए लेकिन वहाँ भी उसकी बातों को किसी ने नही सुना और दरकिनार कर दिया आगे वो कहती है कि स्कूल प्रशासन के द्वारा उसपर ही आरोप लगाया जाने लगा कि तुम यहाँ पर लड़का को बुलाकर मिलती हो जिस कारण बच्चों के बीच उसकी इज्जत धूमिल हो रही थी ,तब हारकर अपनी इज्जत की खातिर वो वापस घर आ गई ।

पढाई बाधित होने के कारण चिंतित है पीड़िता

उधर घर मे भी उसे मन नही लग रहा था ,क्योंकि पांच महीने के बाद इंटर का फाइनल परीक्षा होना है ,उसकी बैचेनी को देख घर वाले ने उससे इस बाबत पूछा तब उसने खुलकर हर बात बताई ,माँ बाप भी सकते में आ गए कि आखिर स्कूल प्रबंधन ने इतनी बड़ी बात छुपाकर क्यों रखी ,क्यों अंदेशे में रखकर इतना बड़ा खेल खेला जा रहा ?जबकि उसी विद्यालय में कक्षा छः से बच्ची पढाई कर रही है,और पढाई के साथ साथ खेल कूद में भी अव्वल है।इस बात की जानकारी उसकी माँ ने अपने बयान में दी है ।
इसी क्रम में आज पीड़िता ने लिखित शिकायत गोड्डा जिले की उपायुक्त किरण कुमारी पासी को दी एवं पुलिस अधीक्षक से न मिल पाने के बाद उनके कार्यालय में भी एक प्रति लिखित आवेदन दे दी है ।

विद्यालय संरक्षिका के द्वारा राज को दबाया गया :

पीड़िता के बयान में यह साफ तौर पर कहा गया है कि विद्यालय संरक्षिका के द्वारा दबाव बनाया गया था कि इस बात को कहीं पर भी मत बताना ।लड़की कहती है कि संरक्षिका के द्वारा यह सिखाया गया कि कोई पूछे तो बताना की बाथरूम गए थे जिसके बाद चक्कर आया और हम गिर गए ।

कई बार विद्यालय के अंदर बाहरी लोगों का आना जाने का खेल को दबाया गया है :पीड़िता

जब हमने पीड़िता से बात करने के दौरान यह सवाल किया कि क्या वहां कोई आता जाता है तो इसपर वह कहती है कि हाँ सर कई बार ऐसा हुआ है कई लोगों को अंदर आते हुए लड़कियां देखती है लेकिन देखकर भी अनदेखी कर देती है क्योंकि सभी के ऊपर दबाव बनाया जाता है कि कुछ न बोले ।

एक शिक्षिका के अलावा कोई नही रहती है विद्यालय में ,आने जाने का लगा रहता है खेल ।

पीड़िता के अनुसार विद्यालय में कोई शिक्षिका नही रहती है ,एक मात्र शिक्षिका ही देख रेख करती है ,बांकी संरक्षिका से लेकर सभी शिक्षिका आती जाती रहती है ,कोई भी विद्यालय में नही रहती है।

अबतक ये सिर्फ एक सवाल बनकर उभर रही है कि कौन थी वो लड़की जो रात के अंधेरे में विद्यालय आ धमकी थी ,और यह पहला मामला या यूं कहें कि नया नही है इस बात कि पुष्टि विद्यालय की कई लड़कियों के द्वारा पहले भी कही गई है जैसा उस पीड़ित लड़की ने बताया ,आखिर क्या कारण है कि इस बात की तह तक जिला प्रशासन नही पहुंचना चाह रही है ?आखिर क्या वजह है कि शिक्षा विभाग इस बात को दबाए हुए है ?मामला चाहे जो कुछ भी हो इसपर जांच तह तक होनी चाहिए ।

पिछले दिनों लगातार जारी था नक्सली पर एलआरपी

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हालांकि पिछले दिनों लगातार पड़ोसी जिले में नक्सली गतिविधि के विरुद्ध में जिले में भी पुलिस प्रशासन द्वारा एलआरपी जोरों पर किया गया था ,एवं उस दौरान यह कहा गया था कि इस एरिये में नक्सली की कोई सूचना नही है और प्रशासन की नजर लागातर बनी हुई है ,यहां तक कि एसएसबी के जवानों द्वारा भी नक्सली की किसी भी गतिविधि की सूचना पर कड़ी नजर रह रही है ।

प्रशासन का सीधे तौर पर नक्सली गतिविधि से इनकार ।

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इधर प्रशासन के अधिकारी से लेकर आला पदाधिकारी भी इस प्रकरण से अवगत होते हुए भी मामले को ढकने का पूरा प्रयास किया है ।और साफ तौर पर अपने बयान में कहा है कि ऐसी कोई घटना नही हुई है और अखबार में छपी खबर भी भ्रामक है ।

खौफ के साये में बच्ची :

घटना के बाद विद्यालय की वो पीड़ित लड़की के साथ साथ कई लड़कियां खौफ के साये में है ,इस तरह से रात के अंधेरे में किसी लड़की या पुरुष के काले ड्रेस में आ धमकने और हथियार दिखाकर डर पैदा करने के बाद लाजमी है कि खौफ पैदा होगा ही ।

क्या कहते हैं अधिकारी :

अखबारों में खबर प्रकाशित होने के बाद जब हमने जिले के उपायुक्त से बात की थी तो उन्होंने भी यह बात स्वीकारी थी कि अखबारों के माध्यम से जानकारी मिली है ,जांच के लिए बोला गया है ,जांच के बाद स्प्ष्ट होगा मामला।
जबकि उस समय ही जब ये जानकारी जिले के पुलिस कप्तान को दिया गया तो मामले और पूरी खबर को फेक बताया गया और उन्होंने भी एक सिरे से मीडिया में आई खबर को नकार दिया था ।

जबकि अब लड़की ने खुद आकर उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक के कार्यालय आवेदन दी तब जाकर जिले की उपायुक्त ने पुनः उसी बात को दोहराई की …
लड़की सहमी हुई थी,किसी बाहरी लड़की की घुसने की बात लड़की के द्वारा बताया गया है ,मामले की जांच कर उचित करवाई की जाएगी ।

किरण कुमारी पासी (उपायुक्त गोड्डा)

इधर कल गोड्डा पहुंची संथाल परगना की आईजी ने कहा कि…..

विद्यालय मामले की खबर भ्रामक है ,हम सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करते रहे हैं ,ऐसी कोई बात अबतक नही आई है ,इस विषय पर हमने पूछताछ एवं जांच के आदेश सम्बंधित पदाधिकारी को दे दी है ।

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सुमन गुप्ता (आईजी संथाल परगना)

ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि आखिर रात के अंधेरे में कौन थी वो लड़की जो हथियार के बल पर उठाकर ले जाना चाह रही थी पीड़िता को ?कैसे हुई विद्यालय प्रबंधन से चूक ?और कौन लोग हैं इस खेल में शामिल जो मामले को दबाने का कर रहे हैं प्रयास ?या फिर क्या पीड़ित लड़की ने मीडिया के सामने आप बीती की झूठी दास्तां सुनाई ?

बरहाल इस खेल में या यूं कहें कि इस पूरे घटना क्रम में जो कुछ भी हो रहा है अगर ऐसी स्थिति पैदा हो रही है तो इसमें प्रशासन सीधे तौर पर जिम्मेवार होगा ।आगे कोई अनहोनी या कोई बड़ी घटना सामने आती है तो प्रशासन इस बात को कहां और कैसे सामने रख सकेगी ?चूंकि जिले के तमाम आला अधिकारी ने ऐसी घटना होने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है ।

अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन अब किस ओर कदम आगे बढ़ाती है ,और जांच में क्या कुछ सामने आ पाता है ,और कार्रवाई के नाम पर किसकी नौकरी की बलि दी जाती है ?

फिलहाल पीड़िता सामने आ चुकी है और अपना आप बीती मीडिया के सामने रख चुकी है ।

राघव मिश्रा : ब्यूरो रिपोर्ट maihugodda.com

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