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भीड़ का अँधा इंसाफ़ । दुःशासन आज भी जिंदा है और कृष्ण अब अवतार नही लेते

दुःशासन आज भी जिंदा है और कृष्ण अब अवतार नही लेते दो दिन पहले हुई बिहार की घटना ने फिर से एक बार सबको सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर हम और हमारा समाज किधर जा रहा है। शक के आधार पर भीड़ तंत्र अंधी होकर एक औरत को सरेआम नग्न कर पत्थरों से मार रहा है।

सावन के समय में तांडव कर लिए अब किस मुँह से देवी पक्ष में मैया की आराधना करने जाओगे? 

जिन लोगों ने भी उसे नग्न कर अपनी मर्दांगनी दिखाई असल मे उस दिन वो ही नंगे हो चुके थे। अंतर सिर्फ इतना ही था कि उस औरत के जिस्म पर कपड़े नही थे और पूरी भीड़ के नग्न जिस्म पर वहशीपन दिख रहा था जो उस महिला के नग्नता से भी ज्यादा नग्न था। एक युवक के हत्या की आशंका ने भीड़ को उग्र कर दिया जो काफी दुखद था। पूरी भीड़ ने कानून को अपने हाथ मे ले लिया था। कानून के रक्षक तमाशाबीन बन तमाशाई का तमाशा देख रहे थे।

किसी पुलिसवालों ने इस कुकृत्य को रोकने का प्रयास नही किया। महाभारत के समय मे जुआ में हारी हुई पांचाली का चीरहरण हो रहा था,पांडव सर झुकाए खड़े थे लेकिन द्रोपदी की करुण पुकार पर कृष्ण अदृश्य रूप में आए और उसकी आबरू बचा लिए लेकिन उस भरे बाजार में एक ने भी आगे आकर उसे बचाने की जहमत नहीं उठाई। भीड़ की संख्या बढ़ती चली गयी। जिसने भी इसे देखा वो साथ होता चला गया।

औरत के नग्न जिस्म को देखने और फब्तियां कसने की चाहत में उपस्थित सभी लोगों ने अपने जिस्म से इंसानियत को निचोड़ कर फेंक दिया और उस नग्न महिला की तरह सभी नग्न हो गए। यत्र नारी पूज्यते,तत्र रमन्ते देवता वाले श्लोक अब अर्थहीन हो चुके है। इंसान के अंदर का इंसान मर चुका है वो अब नरपिशाच की तरह हो चुका है जिसे अब आदमी और जानवर में अंतर समझ मे ही नही आता है।

 

अभिजीत तन्मय 

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