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लोकसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज

आम जनता में लोकसभा चुनाव की सुगबुगाहट भले ही ना हो लेकिन चुनाव आयोग एवं राजनीतिक पार्टियां इसकी तैयारी में जुट गई है। राजनीतिक पार्टियां 2019 के चुनाव के मद्देनजर राजनीति की बिसात पर मोहरे सजाना शुरू कर दिया है ।धीरे धीरे सधे चाल से शह और मात के खेल परवान चढ़ते जा रहा है ।इसी क्रम में रविवार को आदिवासी ईसाई एवं धर्मांतरण को लेकर एक से एक तीर चलाए गए लेकिन यह कितने तीर निशाने पर सटीक लगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा। रविवार को वनवासी कल्याण केंद्र द्वारा एस एम महाविद्यालय में राष्ट्र शक्ति सम्मेलन का आयोजन किया गया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए।वनवासी केंद्र के शिक्षा प्रमुख बृजमोहन मंडल ने कहा कि झारखंड बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू ,चांद भैरव, जतरा टाना भगत ,नीलांबर-पीतांबर आदि की कर्मभूमि रही है। सरना सनातन धर्म संस्कृति ,परंपरा ,जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए अंग्रेजों से लड़ते हुए यह लोग शहीद हुए हैं। इनकी प्राणों की आहुति बेकार नहीं जाने दी जाएगी। आज चर्च से संबंधित संस्थाएं सेवा की आड़ में पुतना बनकर भोले-भाले जनजातियों को बड़ी संख्या में अपने परंपरागत धर्म संस्कृति से अलग करते जा रहे हैं जो बहुत दुखद है। आदिवासियों के साथ सबसे बड़ा धोखा हो रहा है ।आदिवासी का सबसे बड़ा कोई दुश्मन है तो वह चर्च है ।झारखंड में 22 सौ चर्च है । यह सभी चर्च आदिवासियों की जमीन पर बने हैं। इन गरीब आदिवासियों की जमीन के बदले बाइबल थमा दिया गया है, जो गलत है ।

आदिवासी ,जनजाति अपनी शक्ति को पहचाने और अपनी संस्कृति परंपरा को रक्षा के लिए आगे आए।

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वही प्रोफेसर प्रेम नंदन कुमार ने कहा कि झारखंड में 32 तथा पूरे देश में तकरीबन 600 जनजातियां निवास करती है । वनवासी कल्याण केंद्र इन सभी आदिवासियों को जोड़ने का काम करती है । यह संस्था 1969 से ही शिक्षा ,स्वास्थ्य, संस्कार, खेलकूद ,स्वाबलंबन एवं आर्थिक विकास के लिए सेवारत है ।समय और परिस्थिति के अनुसार आदिवासियों में भी चेतना का विकास हुआ है ।अब आदिवासी भी इस बात को समझने लगे हैं कि उनका शोषण और दोहन किया जा रहा है ।चर्च की आड़ में प्रलोभन देकर आदिवासियों का धर्मांतरण अब बंद होनी चाहिए।

पूर्व विधायक प्रशांत कुमार ने कहा कि आज 15% धर्मांतरित जनजाति 85% मूल जनजातियों का 80% आरक्षण का लाभ ले रहा है और 85% मूल जनजाति सिर्फ 20% का ही लाभ ले पा रहा है । इसे कौन रोकेगा इसको रोकने के लिए जनजातियों को आगे आना होगा। उन्होंने जनजातियों के पक्ष में चल रहे विभिन्न योजनाओ को बताया ।कहा कि धर्मांतरण के लिए आदिवासी समाज को जागना पड़ेगा ।उसे सामाजिक जागरण की जरूरत है ।तभी इस झारखंड में आदिवासी खुशहाल रह पायेगा । सम्मेलन को डॉ रामकिशोर हांसदा, बाबूराम सोरेन, संजय सोरेन, सूर्यनारायण हेंब्रम, रेखा हेंब्रम, शिवलाल किस्कू, सुलेखा कुमारी, रामजी पाल आदि ने संबोधित किया जबकि इस पर इस अवसर पर मोती सिन्हा ,मधुसूदन मंडल सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे । सर पर काफी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग जुटे हुए थे।

मैं हूँ गोड्डा से परमानन्द मिश्रा (वरुण )की खास रिपोर्ट 

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