Home / ताजा खबर / झारखण्ड के लाल: लद्दाख में शहीद हुए साहेबगंज के कुंदन ओझा नही देख सके अपनी 17 दिन की बेटी का चेहरा ।

झारखण्ड के लाल: लद्दाख में शहीद हुए साहेबगंज के कुंदन ओझा नही देख सके अपनी 17 दिन की बेटी का चेहरा ।

लद्दाख में भारत-चीन के बीच हिंसक झड़प में शहीद हुए कुंदन ।

साहेबगंज के सदर प्रखंड स्थित दीहारी गांव के थे निवासी ।

2011 में सेना की बिहार रेजिमेंट में हुए थे भर्ती ।

लद्दाख में चीनी सैनिकों से हुई हिंसक झड़प में साहेबगंज मुफस्सिल थाना क्षेत्र के डिहारी गांव के कुंदन कुमार ओझा शहीद हो गए। वे रविशंकर ओझा के तीन पुत्रों में दूसरे नंबर पर थे। करीब सात साल से भारतीय सेना में कार्यरत थे। मंगलवार की शाम परिजनों को उनकी शहादत की सूचना मिली। इसके बाद गांव में चीख-पुकार मच गई। करीब 15 दिन पूर्व ही कुंदन कुमार ओझा को पुत्री की प्राप्ति हुई थी।

कुंदन ओझा का परिवार
कुंदन ओझा का परिवार

करीब दो साल पूर्व कुंदन की शादी सुल्तानगंज के मिरहट्टी की नेहा के साथ हुई थी। कुंदन के बड़े भाई मुकेश कुमार ओझा धनबाद तो छोटे भाई कन्हैया ओझा गोड्डा में एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं। मंगलवार को घटना की जानकारी मिलने के समय घर पर उनके माता-पिता के अलावा पत्नी व भाभी थीं। छोटे भाई की अभी शादी नहीं हुई है। कुंदन ने हाईस्कूल दुबौली से मैट्रिक तक की पढ़ाई की। इंटर साहिबगंज कॉलेज से किया।

17 दिन पहले पिता बने थे साहेबगंज के कुंदन, बेटी का चेहरा देखने से पहले हुए शहीद ।

26 वर्षीय शहीद जवान कुंदन कुमार ओझा के पिता रविशंकर ओझा किसान हैं। वे 2011 बिहार रेजिमेंट कटिहार में भर्ती हुए थे। -शहीद कुंदन कुमार ओझा की फाइल फोटो।
26 वर्षीय शहीद जवान कुंदन कुमार ओझा के पिता रविशंकर ओझा किसान हैं। वे 2011 बिहार रेजिमेंट कटिहार में भर्ती हुए थे।

लद्दाख में भारत-चीन के बीच हिंसक झड़प में शहीद हुए कुंदन
साहेबगंज के सदर प्रखंड स्थित दीहारी गांव के थे निवासी
2011 में सेना की बिहार रेजिमेंट में हुए थे भर्ती

भारत और चीन के बॉर्डर पर लद्दाख के गलवान घाटी में चीनी सैनिकों से झड़प में साहेबगंज जिला के सदर प्रखंड स्थित दीहारी गांव के निवासी कुन्दन कुमार ओझा शहीद हो गए। शहीद की पत्नी ने 17 दिन पहले बेटी को जन्म दिया था, लेकिन कुंदन अपनी बच्ची का चेहरा तक नहीं देख पाए।

कुंदन के अलावा आर्मी के एक अफसर और अन्य 20 जवान शहीद हुए हैं। 26 वर्षीय शहीद जवान कुंदन कुमार ओझा के पिता रविशंकर ओझा किसान हैं। कुंदन2011 में बिहार रेजिमेंट कटिहार में भर्ती हुए थे। उनकी शादी 2017 में बिहार के सुल्तानगंज स्थित नीरहटी गांव में नेहा से हुई है। परिजनके अनुसार शहीद कुंदन कुमार पांच महीने पहले घर आए थे।

15 दिन पहले घरवालों से हुई थी बात
परिजन ने बताया- 15 दिन पहले उनकी बात कुंदन से हुई थी। सोमवार रात को उन्हें कुंदन के शहीद होने की जानकारी मिली। उधर, इस संबंध में उपायुक्त वरुण रंजन ने देर शाम को बताया कि आर्मी की ओर से ऑफिशियल तौर पर अभी तक लिखित में कोई जानकारी जिला प्रशासन को नहीं दी गई। आर्मी के एक सूबेदार ने उन्हें फोन कर कुंदन कुमार ओझा के शहीद होने की सूचना दी है। उन्होंने उनसे ऑफिशियल कम्युनिकेशन के तौर सूचना देने एवं अग्रसर कार्रवाई की जानकारी देने के लिए कहा है। सदर अंचलाधिकारी को शहीद जवान के घर आवश्यक जानकारी के लिए भेजा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा- झारखंड के बेटे पर सभी को गर्व

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि लद्दाख बॉर्डर पर सोमवार रात हुई हिंसक घटना को सुनकर परेशान, दुखी और निराश हूं। उन्होंने कहा कि सेना के उन जवानों को श्रद्धांजलि जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। मैं और झारखंड का हर व्यक्ति इस शोक की घड़ी में शहीदों के परिवार के सदस्यों के साथ खड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपने झारखंड के बहादुर बेटे कुंदन ओझा पर गर्व है, जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपने दो अन्य साथियों के साथ बलिदान दिया।

कुंदन के पड़ोसी जय भगवान ओझा ने बताया कि वह तीन-चार माह पूर्व गांव आया था। परिजनों ने बताया कि वे 16 दानापुर रेजिमेंट के जवान थे। 2011 में रांची में भर्ती कैंप लगा था जिसमें कुंदन का चयन हुआ था। बताया जाता है कि पुत्री प्राप्ति की सूचना के बाद वह छुट्टी लेकर आने की तैयारी कर रहा था। पत्नी को फोन कर बताया था कि जल्द ही छुट्टी लेकर आएंगे तभी यह घटना हो गई।

14 जनवरी को कुंदन ने शेयर की थी दो तस्वीर ।

कुंदन ने बीते 14 जनवरी को अपने फेसबुक पोस्ट के जरिये लगातार दो पोस्ट किए थे जिसमें उन्होंने पहली फ़ोटो दिल्ली एयरपोर्ट से और दूसरी फ़ोटो लेह एयरपोर्ट से सेल्फी लेकर डाला था ।

इससे पहले भी कुंदन ने अपने बेटे की तस्वीर को फेसबुक पोस्ट पर शेयर करते हुए लिखा था मेरा हीरो न.1

कुंदन के पोस्ट में बेटे की तस्वीर
कुंदन के पोस्ट में बेटे की तस्वीर

कुंदन ओझा जांबाज सेना की तरह दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गया ।इधर भारत के गृह मंत्री ,प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री की भी बैठक खत्म हो गई है ।भारत चीन के बीच इस मसले को कबतक सुझाया जा सकेगा अब लोगों का ध्यान गृह मंत्रालय की ओर टिका हुआ है और लोग सोशल मीडिया में अपने देश की सेना के साथ खड़े हैं और समर्थन कर रहे हैं ।

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