Home / गोड्डा प्रखण्ड / गोड्डा / जल संकट : क्या खत्म हो जाएगा कझिया नदी का अस्तित्व ?

जल संकट : क्या खत्म हो जाएगा कझिया नदी का अस्तित्व ?

अगर जागरूक नहीं हुएलोग तो इतिहास के पन्नों तक सिमट जाएगा नदियों की पहचान !

IMG-20180503-WA0035

जिले की लाइफलाइन कही जाने वाली कझिया नदी के अस्तित्व पर संकट !

IMG-20180503-WA0033

बालू माफिया द्वारा जिले के विभिन्न बालू घाटों से अवैध तरीके से बालू का उठाव करने से नदियों के अस्तित्व पर ही संकट मंडराने लगे हैं। बालू माफिया खनन विभाग से लीज लेने के बाद मनमाने तरीके से नदी से बालू का खनन करना शुरू कर देते हैं, इस कारण पूरे जिले में बालू के अवैध उठाव से नदी सिमटती जा रही है।

IMG-20180503-WA0032

जिले की लाइफलाइन कही जाने वाली कझिया नदी आज अपनी पहचान बचाने को लेकर जद्दोजहद कर रही है। जिला प्रशासन के ढुलमूल रवैये के कारण नदी आज मैदान बन चुकी है। जहां पाचं वर्ष पहले नदियों में बालू ही बालू दिखता था। आज वहां पर झाड़िया उग आयी है। वहां सूखा मैदान बन गया है।

खनन विभाग द्वारा आंख बंद कर लेने से माफिया की चांदी, पहले बालू अब मिट्टी पर नजर :

नदी से बेरतीब तरीके से बालू का उठाव होने से नदी की धारा भी विपरीत दिशा की ओर मुड़ना शुरू हो गयी है। खनन विभाग द्वारा भी आंख बंद कर लेने से माफिया की चांदी हो गयी है। बालू के इस अवैध खनन से एक ओर नदी खतरे में है। वहीं दूसरी ओर सरकार के राजस्व को भी करोड़ों रूपये की क्षति हो रही है। जानकारी के अनुसार बालू उठाव की लीज देने के बाद कांट्रैक्टर को कई प्रकार के नियमों का पालन भी करना होता है। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। लीज लेने के बाद केवल कांटेज्क्टर की ही चलती है। विभाग इस मामले में आंखें मूंद लेता है.।इसके पीछे कई वजह हैं, जो सर्वविदित है। जिला मुख्यालय में कई ऐसे घाट है जहां पर बालू अब है ही नहीं। बालू निकालने के चक्कर में नदियों में जगह जगह गढ्ढे बन चुके है। सीधे तौर पर अब माफियाओं की नजर नदी के मिट्टी पर है। कई घाटों पर तो ईंट के भट्टे भी लगे हुए है। चाहे बालू हो या मिट्टी इसमें सीधे तौर पर खनन विभाग को राजस्व का नुकसान लग रहा है। विभाग भी इस पर मूकदर्शक बनी हुई है।

Screenshot_20180503-213111

अंधेरे में नहीं करना है बालू का उठाव : 

खनन विभाग द्वारा बालू उठाव का लीज देने के बाद किसी भी नदी के बालू घाट से रात होने पर या अंधेरा हो जाने पर उठाव नहीं करने का प्रावधान है, लेकिन यह नियम सिर्फ कागजों पर ही होता है। बालू का उठाव सुबह में उजाला होने पर करना है। शाम को अंधेरा छाने के बाद नहीं करना है। शाम छह बजे के बाद किसी भी बालू घाट पर अगर बालू का उठाव हो रहा है तो वह गैरकानूनी माना जाएगा, लेकिन बालू के अवैध करोबार से जुड़े कांट्रैक्टर अपनी मनमानी से रात के अंधेरे में बेधड़क बालू का उठाव कर रहे हैं. हाल के दिनों में जिले के कई बालू घाटों पर रात के अंधेर में बालू का उठाव करने का मामला सामने आया है। बालू का उठाव हमेशा मैनुअली करना है, लेकिन सुदूरवर्ती क्षेत्रों में बालू उठाव में जेसीबी तक के इस्तेमाल हो रहे हैं।

 पदाधिकारी भी काट रहे कन्नी :

इस संबंध में जिला खनन पदाधिकारी रामनाथ राय से बात की गयी तो वे भी इस मूद्दे पर टाल मटोल करते नजर आए। उन्होंने दूरभाष पर बताया कि मिट्टी उठाए जाने की सूचना मिली है। विभाग कार्रवाई करेगी !

 

अभिषेक राज

About मैं हूँ गोड्डा (कार्यालय)

Check Also

DMFT के डॉक्टरों के वेतन भुगतान को लेकर IMA करेगा कार्य बहिष्कार,48 घंटे का अल्टीमेटम ।

शनिवार को IMA की हुई बैठक में एक अहम फैसला लिया गया । बैठक में …

10-20-2020 22:33:29×