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जिंदा जला दी गई एक माँ ,और मूकदर्शक बना रहा पूरा मोहल्ला ।

नपुंसक समाज

कुछ घटनाएं बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर देती है कि हम सचमुच कितने स्वार्थी हो गए है और अपराध के साथ – साथ अन्याय को बर्दाश्त करने वाले ही गए हैं।
गोड्डा शहर में मंगलवार की रात मुख्य बाईपास में एक बड़ी घटना हो जाती है और पूरा का पूरा मुहल्ला मूक दर्शक बन कर बैठा हुआ था।
एक बेटे ने अपनी बूढ़ी माँ को जिंदा जला दिया लेकिन उस मुहल्ले के नपुंसक समाज मूक दर्शक बन पूरे दृश्य को देख कर खामोश रहा था।
देश बदलने की इच्छा रखने वाले समाज का एक देखा हुआ अन्याय पुलिस या मीडिया के सामने नही रख सके और कहते हो कि देश भर में भ्रष्टाचार बढ़ गया है।
इसके जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ तुम हो।

भगत सिंह के जैसा क्रांतिकारी पैदा ले लेकिन वो पड़ोस के घर में क्योंकि तुम्हारा खून ठंडा हो चुका है।
रात में सूचना मिलने पर जब उस मुहल्ले पहुँचा तो जैसे #शोले का वो डायलॉग याद आ गया!

इतना सन्नाटा क्यों है भाई

पूरा मुहल्ला खामोश जैसे सबके घरों में साँप निकल गया हो।
इसकी सूचना पुलिस को भी दी गयी।

टाईगर मोबाइल के जवान और गश्ती वाहन एक चक्कर मार कर निकल गए क्योंकि उसे मरी महिला में क्या मिलेगा ये तो पता नही लेकिन 11 बजे रात में लक्ष्मी तो सड़क पर दौड़ रही थी।

सभी मैया की कृपा पाने के लिए लाइन में लग गये। किसी ने भी उस वृद्ध महिला के हत्या की जानकारी लेने की जहमत भी नही उठाई।
घटना के समाप्त होते ही जैसे परिजनों को इस बात की पुष्टि हो गयी कि उसकी मौत हो गयी उसे तुरन्त ही गाड़ी से लेकर अंतिम संस्कार के लिए निकल गए।
स्वाभाविक रूप से हुए मौत में भी अंतिम दर्शन के लिए मृत शरीर को रखा जाता है लेकिन अगर यहां सब कुछ ठीक ही था तो इतनी जल्दबाजी क्या थी अंतिम संस्कार की?
घर के आगे का पूरा बरामदा धो कर यानी सबूत मिटा कर क्रिमनल निकल गए और पूरा का पूरा मुहल्ला नपुंसक की तरह देखता रह गया।
उससे ज्यादा तकलीफ पुलिस की कार्यशैली पर हुई कि उसे सबकुछ बताने के बाद भी गाड़ी +2 हाई स्कूल के सामने लगा कर लक्ष्मी का इंतजार कर रही थी।
धिक्कार है से समाज और पुलिसिया व्यवस्था पर जो सबकुछ जानते हुए भी खामोश है ।

 

अभिजीत तन्मय

About मैं हूँ गोड्डा (कार्यालय)

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