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गदर एक प्रेम कथा -2 :अवैध दस्तावेजों के साथ वैध रिश्ते को बचाने की कवायद !

ग़दर:एक प्रेम कथा-2

अवैध दस्तावेजों के साथ वैध रिश्ते को बचाने की कवायद!
सन्नी देओल की फ़िल्म #ग़दर एक प्रेम कथा में जब हीरो अपनी पत्नी को उसके पिता के भरोसे पर मायके भेज देता है लेकिन उसके पिता द्वारा जबरदस्ती बेटी को रख लिया जाता है और पुराने सारे रिश्तों को भूल जाने की हिदायत दे दी जाती है तब हीरो अपने बेटे के साथ पाकिस्तान जाकर उसे लाने के लिए जी जान लगा देता है। अंत में सबकुछ ठीक भी हो जाता है लेकिन इस पार्ट 2 की कहानी उस फिल्म की कहानी से कुछ मिलती भी है और कुछ हट कर भी है।
इस फ़िल्म में हीरो बुंदेलखंड(यूपी) का रहने वाला है और नायिका गोड्डा(झारखण्ड) की। लगभग 10 साल पहले यहाँ का एक परिवार दिल्ली गया हुआ था वहां ये नायिका भी गयी हुई थी। हीरो के घर में ही भाड़े पर रहने वाला ये परिवार काफी हिलमिल गया था। इसी बीच नायिका को पूर्व से ही तलाकशुदा थी उसका दिल हीरो पर आ गया। हीरो भी पारिवारिक बंधन में बँधा हुआ था लेकिन कमबख्त इश्क़ ने सब कुछ भूला दिया।
बाद में इस रिश्ते के खुलासा होने के बाद वो परिवार दिल्ली से वापस गोड्डा आ गया लेकिन इश्क़ और आशिक दोनों बिछड़न की आग में जल रहे थे। अंत मे इश्क़ की इम्तेहान की घड़ी आई और नायिका ने अपने दर्द और जुदाई की दास्तान फोन पर सुनाई। आशिक भागते हुए गोड्डा पहुँचा और लोक लाज,परिवार एवम धर्म की भी परवाह ना करते हुए अपनी नायिका को समाज के सामने अपना लिया। दो समुदाय के बीच मे कुछ लोग विरोध में खड़े हुए तो कुछ लोग समर्थन में भी आये।
खैर शादी हो गयी और लड़की रजिया से राधा बन गयी। इस बीच कई साल बीत गए। दिल्ली में घर और पति की सरकारी नौकरी जो मायने रखता था।
नायिका का आनाजाना अपने मायके बना रहा जो कुछ लोगों को (धर्म के ठेकेदारों) अखरता था। इस बार भी पिछले माह ये परिवार दिल्ली से गोड्डा आया और नायिका के घर वाले उसे अपने घर ले गए।
शादी के 8-9 साल बाद अब फिर परिवार वालों को अपना धर्म याद आने लगा और नायिका अपने पति के साथ जाने को इनकार कर रही है। पत्नी के साथ 5 साल का बेटा भी है जिसे उसकी माँ ने रख लिया है।
नायक पिछले 10 दिनों से गुहार लगा रहा है लेकिन कोई भी हल नही निकल रहा है।
अंतिम सहारा पुलिस प्रशासन ही है लेकिन ये प्रमाणित करना कि रजिया कैसे राधा बनी ये टेढ़ी खीर है। नायिका के पूर्व का निकाह और तलाक के कागजात भी मौजूद नही है।
आज नायक सिर्फ उम्मीद के सहारे ही गोड्डा में पड़ा हुआ है कि “शायद उसका प्यार वापस आ जाये”
प्यार को भूल जाने को भी तैयार है लेकिन अपने बगिया का फूल को कैसे भूल जाये।

यह कहानी एक वास्तविक जीवन जीने वाले की है,जिसमें नाम को गोपनीय रखा गया है !

 

अभिजीत तन्मय
आगे की कहानी.अगले अंश में….

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