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टीबी के इलाज के तीन घंटे बाद बच्ची की मौत, विभाग पर उठे सवाल

घटना सुंदरपहाड़ी के काल्हाजोर गांव की

टीबी का इलाज के बाद एक बच्ची की मौत हो जाने का मामला ष्षुक्रवार को प्रकाष में आया है। इस घटना से विभाग के चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे है। आखिर लोग कैसे विष्वास कर सरकारी संस्थानों में इलाज कराने आएंगे।
क्या है मामला : जानकारी के अनुसार सुंदरपहाड़ी प्रखंड के काल्हाजोर गांव के बंगाली टोला निवासी मनोज पंडित की पुत्री आरती पंडित का तबियत सोमवार से ही खराब चल रहा था। मंगलवार को वह अपने बेटी को लेकर इलाज कराने के लिए एक निजी क्ल्निक गए जहां से उन्हें सुंदरपहाड़ी समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ले जाने की सलाह दी गयी। जहां पर वहां के प्रभारी डॉ राम दास पासवान ने उसका इलाज किया। इसमें कुछ जांच भी लिखा गया। जांच रिपोर्ट में बताया कि आरती कुमारी टीवी से ग्रसित है। जिसके बाद उसे ष्षुक्रवार को बुलाया गया। जहां पर करीब ग्यारह बजे मनोज पंडित अपने पुत्री को लेकर पहुंचे। जहां पर उसका चिकित्सक ने इलाज किया। इस दौरान दो इंजेक्षन व एक सिरप भी दिया गया। जिसके बाद उसे घर ले जाने की सलाह दी गयी। मनोज पंडित के भाई जगदीष पंडित ने बताया कि घर पर लाने के बाद ही आरती की हालत खराब होने लगी। करीब ढाई बजे वह पूरी तरह से स्थिर हो गयी। जिसके बाद उसकी मौत हो गयी। परिजनों ने एंबुंलेंस 108 सेवा के लिए भी फोन किया। जहां आसपास के लोगों ने एंबुलेंस को लौटा दिया गया। ये लोग काफी गरीब परिवार से है। इनकी माली हालत काफी खराब है।

दो चिकित्सक कर रहे थे इलाज :

जानकारी के अनुसार बच्ची का दो चिकित्सक मिल कर इलाज कर रहे थे। सुंदरपहाड़ी प्रखंड चिकित्सा प्रभारी डॉ रामदास पासवाव व डीटीओ डॉ सतीष ने भी बच्ची को देखा था। बच्ची का एक्स रे भी कराया गया था। इसके अलावे भी कई जांच कराने के बाद इलाज कर रहे थे। लेकिन इलाज करने के तीन घंटे के बाद मौत होने पर इनकी कार्यषैली पर भी सवाल खड़े हो रहे है।

दुर्गम क्षेत्रों में बेहतर सुविधा का दावा हो रहा फेल :

सरकार व विभाग के दावे सुंदरपहाड़ी जैसे दुर्गम इलाकों में फेल साबित हो रहा है। इस क्षेत्रों में जहां सरकार पदाधिकारियों को सक्रिय रहने की निर्देष देती है इस क्षेत्र में ऐसी घटना कही न कही इनकी कार्यषैली पर भी सवाल खड़ा करती है। सुंदरपहाड़ी प्रखंड सुदूर आदिवासी क्षेत्र है। जहां पर विभाग के पदाधिकारी हमेषा बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने की बात करते है। कागजों पर तो विभाग की रिपोर्ट ष्षत प्रतिषत रहती है लेकिन आज इस घटना ने रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े किए है।

क्या कहतीं है सीएस :

मामले की सूचना मिल है। उक्त बच्ची का इलाज दो चिकित्सक कर रहे थे। पूरी घटना की जानकारी देने को प्रभारी पदाधिकारी को कहा गया है। अगर टीबी का इलाज किया गया था तो विभाग स्वतः उसकी जांच करेगी।
डॉ बनदेवी झा, सिविल सर्जन, गोड्डा

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