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गोड्डा में बर्ड फ्लू की रिपोर्ट पॉजिटीव, विभाग सतर्क ।

विगत दिनों कौओं और मुर्गियों की जांच में पाया गया वायरस, भोपाल के लैब में की गयी जाांच।

जिले में बर्ड फ्लू की आशंका अब लगभग सत्य हो गयी है। विगत पन्द्रह दिन पूर्व जो कौओं और मुर्गियों का सैंपल भेजा गया था। उसका रिपोर्ट भोपाल से आ गया है। इसमें वायरस मिलने की बात कही गयी है। बता दे कि मेहरमा प्रखंड के खुहटरी गांव में बर्ड फ्लू फैल गया है। बता दे कि मेहरमा से मृत कौओं और मुर्गियों के शव को जांच के लिए भेजा गया था। कुछ अन्य प्रखंडों से भी जांच के लिए भेजा गया है। अभी तत्काल उसकी रिपोर्ट नहीं आयी है।

जिला प्रशासन ने खरीद बिक्री पर लगायी रोक :

इधर रिपोर्ट पॉजिटीव आने के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गयी है। साथ ही पूरी स्थिति को नियंत्रण में रखने का प्रयास कर रही है।

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जिला प्रशासन ने तत्काल मुर्गे, मुर्गियों, पॉल्ट्री सहित अन्य पक्षियों के खरीद बिक्री पर रोक लगा दी है। साथ वैसे जगह जहां पर पक्षियों का ज्यादा आना जाना होता हैं वैसे जगहों पर विशेष ध्यान रखने का भी निर्देश दिया है। वही स्वास्थ्य विभाग अपने अपने सीएचसी, एचएससी, पीएचसी को हाइ अलर्ट पर रखा है। अगर क्षेत्र से कोई भी संभावित मरीज आए तो इसकी सूचना तत्काल जिला स्तर के पदाधिकारी को देने का निर्देश दिया गय है।

महकमा पुनः पहुंचा मेहरमा :

रिपोर्ट पॉजिटीव आने के बाद पदाधिकारियों का महकमा एक बार पुनः मेहरमा पहुंचा। इसमे पशुपालन सहित अन्य विभाग के भी पदाधिकारी शामिल थे। इसमें पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान रांची के प्रभारी डॉ. आलोक सिंह, अनुमंडल पशुपालन पदाधिकारी डॉ. उमाकांत सिंह, प्रभारी जिला पशुपालन पदाधिकारी सपन रजक शामिल थे। टीम ने दोबारा नमूना लिया है।

मैं हूँ गोड्डा में लगी थी सबसे पहले खबर :

बता दे कि विगत 21 जनवरी मैं हूँ गोड्डा पोर्टल ने सबसे पहली बार जिले में बर्ड फ्लू की आशंका व्यक्त की थी। जिसके बाद विभाग सतर्क हुई थी।

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इसके बाद ही जिला प्रशासन ने पशुपालन विभाग को इस पर जांच करने का निर्देश दिया था। जिसके बाद मृत पक्षियों का शव जब्त कर रांची भेजा गया। जिसके बाद इसे भोपाल लैब में भेजा गया था।

अस्पताल में नाम का आइसोलेशन वार्ड :

संक्रमण बीमारियों से लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास नाम का सिर्फ व्यवस्था है। इसके पूर्व भी डेंगू, मलेरिया, डायरिया जैसे संक्रमण बीमारी जिले में फेल चुकी है। लेकिन विभाग के पास ऐसे संक्रमण बीमारियों से लड़ने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। विभाग के अधिकारी सदर अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड की बात करते है। लेकिन यह आइसोलेशन वार्ड सिर्फ नाम का ही है। मरीज आने के बाद एक अलग कमरे की व्यवस्था कर आइसोलेशन वार्ड बनाया जाता है।

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अगर हैं ऐसे लक्षण तो करायें जांच :

अगर किसी को भी तेज बुखार, खांसी, सर्दी, सिर दर्द, डायरिया, सांस लेने में समस्या आदि लक्षण पाए जाते है तो तुरंत नजदीकी चिकित्सक से सलाह लें।

About मैं हूँ गोड्डा (कार्यालय)

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