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जिले में भी हो सकता है बर्डफ्लू का खतरा !अब तक जिले में आधा दर्जन कौओं की मौत ।

जांच के लिए भोपाल भेजा गया मृत कौए का शव

अभषेक राज/जिले में बर्ड फ्लू का खतरा गहराता जा रहा है। दरअसल शहर में कई जगहों पर मृत कौएं का शव पाया जा रहा है। इसमें उपायुक्त आवास के आसपास भी पिछले दिनों कौएं का शव पाया गया था। इसके बाद से ही विभाग भी सतर्क है। कौएं से ज्यादा दूरी बनाने के लिए भी विभाग प्रयासरत है।

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सोमवार को जिला नियोजन कार्यालय के पीछे दो एक मृत व एक तड़पता हुआ कौआ पाया गया। जो उड़ नहीं पा रहा था। इसके अलावे भी मेहरमा, पथरगामा व महागामा में कौओं का मरना बदस्तुर जारी है। कही कही अधिकारियों के निर्देशानुसार मृत कौए को गड्ढा खोदकर जमींदोज किए जाने की भी बात कही जा रही है। रविववार को पशुपाल विभाग द्वारा मेहरमा से कौए का शव की जांच के लिए रांची भेज दिया गया है।

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जिसके बाद उसे भोपाल में लैब में जांच किया जाएगा। जिसके बाद ही पुष्टि हो पाएगी कि आखिर एक साथ कौएं की मौत क्यों हो रही है। लिहाजा अभी तक जिले में बर्ड फ्लू के वायरस की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन लगातार कौआ मरने के कारण बर्ड फ्लू फैलने की आशंका प्रबल हो गई है।
हालांकि जिला पशुपालन पदाधिकारी डा. सदानंद महतो कहते हैं कि जबतक रिपोर्ट नहीं आ जाती है तबतक यह कहना संभव नहीं है कि कौए की मौत बर्ड फ्लू के कारण हुई है या अन्य किसी कारण से। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट नहीं आने के बावजूद एहतियात जरूरी है। क्योंकि इस मौसम में बर्ड फ्लू के वायरस का प्रसार तेजी से होता है। इसलिए हर स्तर पर एहतियात बरतनी चाहिए।

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उनका एक तर्क यह भी था कि हर सृष्टि में हर जीव का जीने का एक समय सीमा है। अक्सर कौएं में देखा जाता है एक ही जगह वे लोग दम तोड़ते है।

सबसे पहले कौआ पर ही असर क्यों?

बर्ड फ्लू का संक्रमण पहले जिन जगहों पर होने की पुष्टि हुई वहां पहले कौए की ही मौत सामने आयी है। जिला पशुपालन पदाधिकारी डा. सदानंद महतो बताते हैं कि कौआ मृत जानवरों को भी खाता है। कुछ जलीय जीव हैं जिसमें यह वायरस हमेशा पाया जाता है। इसमें साइबेरियन बर्ड और बत्तख आदि प्रमुख हैं। संभव है कि इनमें से किसी पक्षी की मौत हुई हो और कौओ ने वह मांस खाया हो। इसके बाद पक्षियों में भी यह बीमारी संपर्क से ही बढ़ता है।

सदर अस्पताल में है आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था : सीएस

इधर दूरभाष पर जब सिविल सर्जन डॉ रामदेव पासवान से संक्रमण जैसे बीमारियों से निपटने के मूद्दे पर जानकारी ली गयी तो उन्होंने बताया कि वायरस जनित रोग अगर फेलता है तो इसके लिए विभाग तत्पर्य है। सदर अस्पताल में ऐसे रोगों के इलाज के लिए आइसोलेशन वार्ड है। इसके साथ चिकित्सकों को खास दिशा निर्देश भी दिया गया है। साथ ही जिले भर में कही भी ऐसा केस आता है तो इसकी जानकारी तुरंत जिला कार्यालय को देने की बात कही।

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