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गदर एक प्रेम कथा 2 का सुखद अंत ,और इस तरह सजनी मिली अपने साजन से ।

गदर एक प्रेम कथा 2 का भाग 4

बॉलीवुड के एक सिनेमा का डायलॉग जिसमे शाहरुख खान ने बोला था कि ,

इतनी शिद्दत से तुझे पाने की कोशिश की है….!
कि हर जर्रे ने तुझे मुझसे मिलाने की साजिश की है….!!
इस कहानी में भी कुछ ऐसा ही हुआ।
पिछले दो भागों में आपने पढ़ा कि किस तरह फ़िल्म का नायक ग़दर एक प्रेम कथा की तरह सियासतदानों के साजिशों का शिकार हो गया था।

ससुराल पहुंचा एक दामाद बुरी तरह मार खाकर मौत के दरवाजे तक पहुँच कर वापस आया।
पत्नी और बच्चे को पाने की खातिर जिंदगी और नौकरी तक को दाँव पर लगा दिया। चार माह की बिछड़न ने मानों 40 साल का दर्द दे दिया।

पुलिस और समाज के साथ साथ धर्म के ठेकेदारों तक गुहार लगाई लेकिन हर जगह निराशा ही हाथ लगी किंतु हीरो ने हार नही मानी।
इसी माह के शुरुआत में ही हीरो को बुरी तरह पीटा गया जब वो अपनी पत्नी और बच्चे को लेने आया था। पत्नी भी तैयार हो गयी थी वापस दिल्ली जाने के लिए लेकिन कुछ लोगों को ये नागवार गुजर रहा था।
मार के बाद जब हीरो की स्थिति चिंताजनक हो गयी थी तो उसे भागलपुर भेजा गया और फिर बेहतर इलाज के लिए दिल्ली गया।

दूसरा कोई और होता तो शायद इस डूबते रिश्ते को बचाने से पहले कई बार सोचता लेकिन इस हीरो के दिल-दिमाग मे सिर्फ एक ही चीज चल कि कैसे बीबी बच्चे को वापस लाया जाए।
अस्पताल से भागलपुर भेजते समय घायल पति के साथ पत्नी भी जाने को तैयार थी लेकिन उस समय भी कुछ लोगों ने उसे बहला फुसला कर जाने नही दिया।
इस घटना के बाद जब पुलिस प्रशासन पर दवाब बढा तब मारपीट के आरोप में पत्नी और उसके पिता को जेल में डाल दिया।
ठीक होते ही हीरो संजीव एकाएक बिना किसी को खबर दिए ही जेल पहुँचा और पत्नी नजमा उर्फ गीता से मिला जिसकी खबर फिर सियासतदानों को हो गयी। फिर शुरू हुआ विरोध का दौर लेकिन अपनी धुन का पक्का संजीव कुमार ने गीता का बेल करवाया और साथ मे ले जाने का इरादा कर लिया।
इधर पाँच साल का मासूम बच्चा अपने दिल-दिमाग मे चल रहे हजारों सवालों के बीच नानी घर मे रह रहा था।
एक पिता जीवन-मृत्यु के बीच मे झूल रहा था तो दूसरी तरफ माँ जेल में कैद थी। इस बीच के बिताए वो दिन उसके लिए एक बुरे सपने के समान था जिसको वो कभी भी याद नही रखना चाहेगा।
बेल के बाद निकलने के बाद फिर चला कानूनी प्रक्रियाओं का दौर।

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बच्चे पर माता-पिता का अधिकार है इसके लिए पति-पत्नी ने सीडब्ल्यूसी से फरियाद की और साथ ही साथ एस पी को भी आवेदन देकर गोड्डा से दिल्ली तक सकुशल पहुँचने के लिए पुलिस अभिरक्षा में जाने की गुहार लगाई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हीरो जे साथ मे पूर्व से ही सहयोग कर रहे हिंदूवादी संगठनों का जमावड़ा भी समाहरणालय परिसर में रहा।
शाम हो जाने के कारण गाँव से बच्चा को लाने का फैसला नहीं किया गया। रात में हीरो और हीरोइन दोनों को पुलिस अभिरक्षा में थाना में रखा गया।

सूत्रों के अनुसार परिजनों के साथ कुछ अन्य लोग भी आरोप लगा रहे थे कि लड़की को जबरदस्ती ले जाया जा रहा है तब पुलिस अधीक्षक के समक्ष रात में हीरोइन का बयान हुआ जिसमें उसने पति के साथ जाने का फैसला सुना दिया।

इस बयान से भी कई लोग नाखुश हुए।
आज सूरज उगते ही हीरो की जिंदगी में एक नया सवेरा लेकर आया जब एक माँ-बाप के बिना अकेला जीवन जी रहा बच्चा को उसका आशियाना मिला और एक अपनों के बिछड़न की तड़पन से तिल तिल मर रहे इंसान को पत्नी और बच्चा मिला।
पिछले चार महीनों से विरह की आग में जल रहे हीरो को शुकुन मिला। आज पूरा परिवार एक साथ पुलिस अभिरक्षा में गोड्डा से दिल्ली निकल गया।
इस तरह इस कहानी का अंत सुखद हो गया।
किसी फिल्म का एक डायलॉग याद आ गया कि किसी को अगर शिद्दत से चाहो तो सारी कायनात उसे तुमसें मिलाने की कोशिश में लग जाती है।
इस प्रकार इस ग़दर एक प्रेम कथा का अंत

हो गयी प्यार की जीत से हो गया।

About मैं हूँ गोड्डा (कार्यालय)

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