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दो वर्ष बाद कोयले की कोख से निकला दो कंकाल ।

29 दिसम्बर 2016 को ईसीएल राजमहल परियोजना में हुए खान हादसा जिसमे 23 मजदूरों की मलबे में दब कर मौत हो गई थी।
18 मजदूरों का शव घटना के कुछ दिन पश्चात ही मिल गया था 5 मजदूरों का शव की तलाश घटना के बाद भी जारी था ,जिसमे आज सुबह दो नर कंकाल मिला है जिसमें एक का सिर धड़ से अलग था कपड़े को देखकर जिसकी शिनाख्त गुजरात के रहने वाले मधुर श्याम पटेल की रूप में आशंका जताई जा रही है। जबकि दूसरा सिर्फ सिर ही मिला है।इसलिए उनकी अबतक कोई पहचान नही हुई है, महालक्ष्मी कम्पनी के अधिकारी के अनुसार कपड़े को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि बिना सर वाला नर कंकाल मधुर श्याम पटेल का हो सकता है।लेकिन डीएनए जांच के बाद ही यह पता चलेगा कि यह नर कंकाल किस का है।
नर कंकाल के मिलने के बाद एसडीपीओ राजा मित्रा ललमटिया थाना अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचकर नर कंकाल को कब्जे में लेकर डीएनए जांच के लिए धनबाद भेजने की तैयारी में हैं ।

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विदित हो कि 29 दिसम्बर 2016 को शाम सात बजे ईसीएल की राजमहल परियोजना में लैंड स्लाइड हुआ था जिसमे कई मजदूरों के दबे रहने की आशंका जताई जा रही थी।
प्रधानमंत्री ने भी ट्वीट कर जताई थी चिंता।
राजमहल परियोजना के ललमटिया खदान हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गोड्डा खदान हादसे पर चिंता व्यक्त की थी।उन्होंने झारखण्ड के मुख्यमंत्री से बात कर पूरी जानकारी भी ली थी ।बावजूद आजतक कोई भी करवाई नही हुई ।
आंकड़ों में उलझा रहा शवों और मुआवजा का खेल।
गोड्डा जिला के इसीएल के ललमटिया स्थित राजमहल कोल् माइंस को 29 दिसम्बर को हुए हादसे ने जिला ही नहीं बल्कि पुरे झारखण्ड और देश को झकझोर दिया था .यह हादसा पिछले दस वर्षों में देश का सबसे बड़ा खदान हादसा था .इस हादसे में 18 शवों की बरामदगी हुई मगर बाकी कितने लोग इसमें दबे रहे इस पर आज भी संसय बरक़रार है ।

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“ललमटिया “एशिया का सबसे बड़ा ओपन कास्ट कोल् माइंस राजमहल परियोजना जहां 29 दिसम्बर को एक भयानक हादसे में कई जिंदगियां मलबे के नीचे दफ़न हो गयीं थी,ये बात तो साफ़ हो गयी कि ये हादसा
इसीएल प्रबंधन और आउट सोर्सिंग कंपनी महालक्ष्मी दोनों ही के लापरवाही की मिलीभगत के कारण हुई ,मगर सबसे बड़ी बात जो अब तक छनकर सामने आई कि आखिर कितने मजदूर सही मायने में दफ़न हुए इसका आंकड़ा न तो महालक्ष्मी बताने को तैयार थी और ना ही इसीएल प्रबंधन ,महालक्ष्मी कंपनी द्वारा जिला प्रशासन को कभी भी सही आंकड़ा बताया ही नहीं गया .हादसे की अहले सुबह यानी 30 दिसम्बर को चश्मदीद के बयान के अनुसार 40 लोग मलबे के नीचे दबे हुए थे ।मगर एस डी एम को कंपनी द्वारा सिर्फ 7 लोगों के दबे होने की सूचना दी गयी थी।

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और फिर जब एक एक कर शवों के निकलने का सिलसिला शुरू हुआ तो 31 दिसम्बर को ये आंकड़ा 11 के पार पहुंचा तो कंपनी ने 20 लोगों के दबे होने की सूचना एस डी एम तक भिजवाई .
मगर जब तीन जनवरी को शवों का आंकडा 18 पहुंचा तो कंपनी ने बाकायदा लिखित रूप में 23 लोग और 17 गाड़ियों के मलबे में दबे होने की सूची एस डी एम तक पहुंचाई .इससे ये साफ़ जाहिर होता है कि इ सी एल प्रबंधन और महालक्ष्मी कंपनी द्वारा जिला प्रशासन को आंकड़ों के नाम पर बरगलाया जा रहा था,हालांकि उस वक्त एस डी एम ने बताया था कि जब तक कंपनी के द्वारा उपलब्ध कराये गए लिस्ट के अनुसार 23 लोगों का शव नहीं मिलता तब तक रेस्क्यू का काम जारी रहेगा ।
अलग अलग दिनों में कंपनी द्वारा दिए गए अलग अलग आंकड़ों से परेशान उस वक्त के महगामा एस डी एम संजय पाण्डेय ने कंपनी के दफ्तर से जाकर सभी मजदूरों का अटेंडेंस रोल जब अपने कब्जे में किया तब पता चला कि 90 मजदुर इसमें काम कर रहे थे जो 40-40 की शिफ्ट में काम पर लगाए जाते थे .अगर इस बात में सत्यता थी और पहले दिन के चश्मदीदों की बातों को माने तो 40 मजदुर दुर्घटना के वक्त खदान में मौजूद थे .मगर कंपनी द्वारा 23 का दावा किया जा रहा था,जबकि अबतक 18 शवों की बरामदगी हुई है,घटना के ठीक दो दिन बाद तक रेस्क्यू का काम बंद रहा।और सूत्रों की माने तो प्रबंधन और जिला प्रशासन पर रेस्क्यू बंद करने का दबाव भी बनाया जा रहा था ।
इधर सरकारी प्रावधान के अनुसार जब तक शव या शव का कोई हिस्सा जब तक बरामद नहीं होता तब तक उस व्यक्ति के परिजन को मुआवजा नहीं दिया जा सकता,यही सवाल जब घटनास्थल का निरिक्षण करने पांच सदसीय टीम के साथ सूबे के श्रम मंत्री भी पहुंचे थे तो उन्होंने रेस्क्यू कर शव निकाले जाने की बात तो जरुर कह डाली मगर रेस्क्यू का काम ही बंद हो गया तो फिर उन परिजनों को मुआवजा कैसे मिली जो घटना के बाद से ही अपनों के शव के इन्तेजार में रात दिन एक पैर पर खड़े थे।
एक बार पुनः मजदूरों के शव को निकालने की प्रक्रिया प्रारम्भ हुआ था जो घटना के दो वर्ष बीत जाने के बाद भी आज जारी है।जिसमे आज दो नर कंकाल मिला एक सिर्फ सर है तो दूसरा धड़।अब यह डीएनए जांच से ही स्पष्ट होगा कि यह एक ही मजदूर का है या अलग अलग मजदूर का।

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ईसीएल (ईस्टर्न कोल फील्ड) के राजमहल एरिया स्थित दो वर्ष पूर्व हुए हादसा स्थल से दो नर कंकाल में एक कंकाल गुजरात के रहने वाले मधुर श्याम पटेल का होने की आशंका है। वह महालक्ष्मी आउटसोर्सिंग कंपनी में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत था। 29 दिसंबर, 2016 को हुए खदान हादसे में उसकी मौत हो गई थी। उसका शव अबतक बरामद नहीं किया जा सका था। दूसरे कंकाल की केवल खोपड़ी मिली है। इसलिए उसकी पहचान नहीं हो पाई है। दोनों कंकालों को डीएनए टेस्ट के लिए धनबाद भेजने की तैयारी की जा रही है।

पूरी घटना का इतिहास
गौरतलब है कि 29 दिसंबर, 2016 की शाम ईसीएल के राजमहल एरिया में ओबी डंप धंसने से 23 कर्मी उसके नीचे दब गए थे। यह घटना आउटसोर्सिंग कंपनी महालक्ष्मी के साइड पर हुई। इनमें अधिकतर कोयला खनन में उपयोग होने वाली मशीनों के संचालक थे। आउटसोर्सिंग कंपनी महालक्ष्मी के इंचार्ज व दो सुपरवाइजर भी इसकी चपेट में आ गए थे। करीब एक सप्ताह तक चलाए गए अभियान के बाद 18 शवों को खोज निकाला गया था। पांच शवों के अवशेष भी नहीं मिले थे। शव खोजने का काम जारी था। इसी क्रम में बुधवार को दोनों कंकाल बरामद किए गए। हालांकि, जिन पांच कर्मियों का शव नहीं मिला उन्हें ईसीएल, आउटसोर्सिंग कंपनी महालक्ष्मी व सरकार ने मृत मान लिया था।
ईसीएल व महालक्ष्मी ने तो उनके परिजनों को मुआवजे का भुगतान भी कर दिया। राज्य सरकार ने अब तक उनके परिजनों को मुआवजा राशि नहीं दी है। मिले एक कंकाल के साथ कलम व बेल्ट भी मिला है। मधुर श्याम पटेल सुपरवाइजर होने की वजह से हमेशा पाकेट में कलम रखता था जिस वजह से शव उसका होने की आशंका जताई जा रही है।

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छह माह बाद दोबारा शुरू हुई शवों की खोज।
29 दिसंबर, 2016 को हुई घटना के बाद करीब 15 दिनों तक शवों की खोज जारी रही। इसी बीच अन्य जगह भी स्लाइडिंग होने लगी। डीजीएमएस की टीम ने निरीक्षण किया और किसी तरह के खनन पर रोक लगा दी। इसके बाद शवों की खोज का काम बंद हो गया। करीब छह माह बाद ईसीएल ने शवों की खोज के लिए ओबी हटाने का टेंडर निकाला। इसके बाद दुबारा शवों की खोज शुरू की गई। करीब डेढ़ वर्ष से पांच शवों की खोज का काम जारी था।
मिट्टी हटाने का काम लगातार जारी था।
खान हादसे के दो साल पूरा होने पर 29 दिसंबर 2018 को मैं हूँ गोड्डा ने प्रमुखता से खदान हादसे की पूरी सच्चाई लिखी थी। ठीक 25 दिन बाद दो कंकाल आज बरामद हुए। अन्य कंकाल भी शीघ्र बरामद होने की बात कही जा रही है। दूसरी ओर कंपनी ने 23 लोगों के मरने की बात कही थी जबकि कुछ यूनियन नेताओं का कहना था कि हादसे में 23 से अधिक लोग मारे गए। अगर दोनों कंकाल लापता पांच लोगों के अलावा दूसरे का निकलता है तो मरने वालों की संख्या में भी बढ़ोतरी आ जाएगी और आंकड़ा फेल भी हो जाएगा ।
इनका अबतक नहीं मिला था शव

1. लालू खान इंचार्ज
2. मधुर श्याम पटेल सुपरवाइजर
3. गगन सिंह सुपरवाइजर
4. परवेज आलम ट्रीपर ड्राइवर
5. भीम राम ट्रीपर ड्राइवर।

About मैं हूँ गोड्डा (कार्यालय)

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