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अमेरिका में अपने देश की लोकतांत्रिक परचम को लहराकर आज स्वदेश आ रही है दीपिका पांडे सिंह ।

गोड्डा जिले से निकली एक ऐसी राजनीतिक महिला जिन्होंने बचपन से ही अपनी रुचि राजनीतिक क्षेत्रों में रखी ,छात्र यूनियन से लेकर प्रदेश में भी कोंग्रेस पार्टी के संगठन का हिस्सा रही,विगत सात वर्षों से जिले में संघर्षत रही दीपिका पांडे सिंह पहली बार कोंग्रेस की टिकट पर पिछले विधानसभा चुनाव में अपना किस्मत आजमाने उतरी थीं,जिसे जनता ने चुनकर विधानसभा तक का सफर तय कर दिया ।

तश्वीर दीपिका पांडे की फेसबुक पोस्ट से
तश्वीर दीपिका पांडे की फेसबुक पोस्ट से

आज की तारीख में वो गोड्डा जिले के महगामा विधानसभा क्षेत्र की विधायिका हैं ।

70 वर्षों बाद मिले अमेरिकी महिलाओं को मतदान के अधिकार के 100वें वर्ष के जश्न कार्यक्रम में दीपिका को मिला था अमेरिकी न्योता । 

अमेरिका में महिलाओं को मतदान के अधिकार को लेने में 70 वर्षों का संघर्ष करना पड़ा ,इस अधिकार को मिलने के 100 वर्षों के जश्न कार्यक्रम में आने का न्योता दीपिका पांडे सिंह को भी मिला था ।

तश्वीर दीपिका पांडे सिंह की फेसबुक वाल से
तश्वीर दीपिका पांडे सिंह की फेसबुक वाल से

आज वही महिला नेत्री दीपिका पांडे सिंह अमेरिका में महिलाओं को वोट देने के अधिकार के 100वें वर्ष के जश्न कार्यक्रम में पिछले कुछ दिनों से अमेरिका दौरे पर रहकर अपने देश की लोकतांत्रिक खूबशूरती को परिभाषित कर स्वदेश लौट रही है ।

तश्वीर दीपिका पांडे सिंह की फेसबुक वाल से
तश्वीर दीपिका पांडे सिंह की फेसबुक वाल से

अमेरिकी दौरे की याद को विधायिका सिंह ने अपने फेसबुक के जरिये साझा किया है। विश्व के सबसे प्राचीन लोकतांत्रिक देश अमेरिका में उन्होंने विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश की खूबियों का परचम लहराया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी महिलाओं को अपना मतदान अधिकार प्राप्त करने के लिए 70 वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा, जबकि भारतीय महिलाओं को ये हक आजादी के बाद से ही प्राप्त है ।

तश्वीर दीपिका पांडे सिंह की फेसबुक वाल से
तश्वीर दीपिका पांडे सिंह की फेसबुक वाल से

फेसबुक के जरिये साझा की अपनी बात

वो लिखती है ….‘मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे देश से आई जिसने अपनी स्वतंत्रता के बाद से वोट देने का समान अधिकार महिलाओं को दिया था। ‘ मुझे गर्व है कि हमारे देश में महिला प्रधानमंत्री बनीं, राष्ट्रपति बनी देश के प्रमुख पदों पर महिलाएं रहीं हैं।

लेकिन अमेरिका को उस दिन को देखना है, जब सर्वोच्च पद पर महिला आसीन होंगी,और जल्द ही अमेरिका महिला राष्ट्रपति भी चुनेगी ।

तश्वीर दीपिका पांडे सिंह की फेसबुक वाल से
तश्वीर दीपिका पांडे सिंह की फेसबुक वाल से

महगामा विधायिका कहती है मैं आशान्वित हूं कि आने वाले वर्षों में अमेरिका वासी एक महिला राष्ट्रपति को देखेंगे।
श्रीमती सिंह ने अपने अमेरिकी दौरे के लिए वहां के वाक्य मंत्रालय को धन्यवाद दिया है।” मैं अमेरिका के एक्सटर्नल अफेयर्स के मंत्रालय को धन्यवाद देती हूं कि मुझे आप अपने अपने राष्ट्र को समझने का मौका दिया है। सिर्फ झारखंड की एक महिला को नहीं, बल्कि पिछले 80 वर्षों में विभिन्न देशों एवं क्षेत्रों के 200000 से भी अधिक व्यक्तियों ने आकर अमेरिका को समझा। इसमें यू एस ए का इंटरनेशनल विजिटर्स लीडरशिप प्रोग्राम, वाणिज्य दूतावास एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।” इस राज्य प्रायोजित कार्यक्रम में वीएलपी के अधिकारी और स्वयंसेवक सुनिश्चित करते हैं कि हमारा प्रवास आरामदायक हो। हमने यहां घर जैसा महसूस किया।

महगामा विधायिका ने अमेरिका से  स्वदेश लौटने से पूर्व अपने फेसबुक पोस्ट के जरिये लिखी है अपनी बात ।

वो लिखती है हम ऐसे समय में आए हैं जब डेमोक्रेट राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्राइमरी चुनाव चल रही है और हम विभिन्न स्थानों पर मतदान देख सकते हैं। उस समय विश्व के सबसे मजबूत राष्ट्र अमेरिका का दौरा करना एक महान अवसर था जब विश्व महिला दिवस मना रहा था। यूएसए के दौरे पर आने के मेरे सपने महिला दिवस से ठीक 1 दिन पहले सच हो गए। हम एक ऐसे ही कार्यक्रम में विभिन्न राष्ट्रों की महिला राजदूतों से मिले।

अमेरिका के अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा किया। एक राष्ट्र में अलग-अलग समय, क्षेत्र, विभिन्न खाद्य पदार्थों का स्वाद लिया, अलग-अलग मौसम की स्थिति का अनुभव किया। अलग-अलग क्षेत्रों के स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों, सिनेटरो, लेजिस्लेटरो से मिलना एक अलग खुशी थी।

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अमेरिकी एवं भारतीय महिलाओं की तुलना करते हुए श्रीमती सिंह ने लिखा है कि यूएसए की महिलाएं निश्चित रूप से हम से बेहतर हैं। संसद में 23 फीसदी महिला प्रतिनिधित्व, 26 फ़ीसदी विधायक, हवाई अड्डों, होटलों, पुस्तकालयों, संग्रहालयों, अदालतों, कार्यालयों, स्कूलों, विश्वविद्यालयों आदि में कामकाजी महिलाएं निश्चित रूप से बेहतर अवसर होने पर साबित करती हैं। लेकिन महिलाओं के समान अधिकार के लिए अभी और चलना है।

दीपिका पांडे सिंह की पोस्ट 

#IVLP 2020 यूएसए की मेरी यात्रा के अंत की ओर है, जब यूएसए महिलाओं के मतदान के अधिकार के अपने 100 वें वर्ष का जश्न मना रहा है .. हाँ, अमेरिका की महिलाओं को अपना मतदान अधिकार प्राप्त करने के लिए 70 वर्ष तक संघर्ष करना पड़ा …!

मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे देश से आई जिसने अपनी स्वतंत्रता के बाद से वोट देने का समान अधिकार दिया था। मुझे गर्व है कि हमारे देश में महिला प्रधान मंत्री थीं, राष्ट्रपति और महिलाओं ने सभी प्रमुख कार्यालय रखे हैं … हाँ अमेरिका को अभी भी उस दिन को देखना है! ।।नहीं महिलाओं ने अब तक का सबसे अधिक पद संभाला है ।।

मैं इन दिनों में आशान्वित हूँ .. आने वाले वर्षों में हम संयुक्त राष्ट्र में एक महिला राष्ट्रपति देखेंगे ..

मैं अमेरिका के #DepboxofStates (बाहरी मामलों) को धन्यवाद देता हूं कि मुझे आपके राष्ट्र को समझने का मौका दिया गया है। लेकिन सिर्फ झारखंड की एक महिला ही नहीं है, लेकिन पिछले 80 वर्षों में विभिन्न देशों और क्षेत्रों के 2 लाख से अधिक व्यक्तियों ने आकर अमेरिका को जाना और समझा। IVLP..US वाणिज्य दूतावास एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ..

इस राज्य में प्रायोजित कार्यक्रम में #IVLP के अधिकारी और स्वयंसेवक सुनिश्चित करते हैं कि हमारा प्रवास आरामदायक था और हमने घर पर ये महसूस किया।

हम ऐसे समय में आए हैं जब डेमोक्रेट राष्ट्रपति चुनावों के लिए प्राइमरी चल रही है और हम विभिन्न स्थानों पर मतदान देख सकते हैं।

उस समय सबसे मजबूत राष्ट्र का दौरा करना जब राष्ट्र महिला दिवस मना रहा था, एक महान अवसर था। हम ऐसे ही एक कार्यक्रम में विभिन्न राष्ट्रों की महिला राजदूतों से मिले।

#UnitedNation में आने के मेरे सपने महिला दिवस से ठीक एक दिन पहले सच हो गए .।

अमेरिका के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों का दौरा किया, एक राष्ट्र में अलग-अलग समय क्षेत्र, विभिन्न खाद्य पदार्थों का स्वाद लिया, अलग-अलग मौसम की स्थिति का अनुभव किया ..

अलग-अलग क्षेत्रों के स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों के सीनेटरों, लीजिस्टलरों से मिलना एक ऐसी खुशी थी … वैश्विक स्तर पर ये महिलाएं राजनीति सहित विभिन्न क्षेत्रों में इसी तरह की समस्याओं और मुद्दों को लेकर जाती हैं …

संयुक्त राज्य अमेरिका की महिलाएं निश्चित रूप से हमसे बेहतर हैं। संसद में 23% महिला प्रतिनिधित्व 26% विधायक, हवाई अड्डों, होटलों, पुस्तकालयों, संग्रहालयों, अदालतों, कार्यालयों, स्कूलों, विश्वविद्यालयों में कामकाजी महिलाएं निश्चित रूप से बेहतर अवसर होने पर साबित करती हैं … लेकिन महिलाओं के लिए समान अवसर के लिए .. मील अभी भी चलना है ..

घरेलू हिंसा, डकैती, बलात्कार जैसे अपराध भी यहां रिपोर्ट किए जाते हैं लेकिन अपराधी को सजा सुनिश्चित की जाती है। हमारे प्रवास के दौरान ऐसा फैसला आया, एक मजबूत और प्रभावशाली फिल्म निर्माता के खिलाफ।

आशा है कि जब हम वापस पहुंचेंगे, तो हमें #NIRBHAYA के दोषियों की लंबे समय से प्रतीक्षित खबर सुनने को मिलेगी।

हमारा देश जो NRC, CAA, NPR जैसे मुद्दों पर जल रहा है … हम सिर्फ अमेरिका को देख सकते हैं कि विभिन्न राष्ट्रों के अप्रवासी कैसे सशख़्त राष्ट्र बना सकते हैं …

आरक्षण के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला 

वो लिखती है इस यात्रा पर, आरक्षण के बारे में सीखा (उन क्षेत्रों में जहां मूल अमेरिकी सीमित हैं) … सभी जनजातियों को अलग-अलग हिस्सों से एक भूगोल तक सीमित करने के लिए अजीब है … (हमारे देश के लिए यह कभी नहीं चाहेगा …) जनजातियों को बढ़ना चाहिए और उनकी भूमि पर फलते-फूलते हैं। हमारे भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के अनुसार, जो आदिवासियों और किसानों के हितों की रक्षा करता है।

ऐसी महिलाएँ जो व्यवसाय चलाती हैं और व्यवसाय शुरू करने के लिए अन्य महिलाओं का समर्थन करती हैं।

प्रतिनिधियों (ज्यादातर) जो विभिन्न क्षेत्रों से महिलाओं और अन्य समुदायों को चुनाव लड़ने के लिए प्रशिक्षित करने के लिए संगठन चला रहे हैं, ताकि घर में एक आनुपातिक प्रतिनिधित्व परिलक्षित हो …

दुनियां के सबसे पुराने लोकतंत्र को समझने के लिए सबसे बड़े लोकतंत्र से होना मुश्किल नहीं था.. यह हमारे संविधान का भी कहना था ।

लॉन्ग लाइव # डेमोक्रेसी

About मैं हूँ गोड्डा (कार्यालय)

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