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लगातार चार दिन चार रेप लेकिन चार लोग भी नही :राघव मिश्रा

जी, हम बात कर रहें उसी गोड्डा जिले की जहां अधिकांश क्षेत्र आदिवासी समुदाय से भरा पड़ा है ,गोड्डा की जवानी चरम पर है लेकिन आज भी बचपना गया नही है,यूं तो पिछले कुछ दिनों से पूरा देश रेप जैसी वारदात पर आग बबूला है,लेकिन इतने रेप होने के बावजूद हमारे आला कमान का कुछ न बोलना उनकी ताकत को भी दर्शाता जा रहा है !यही फर्क है हमारे देश और विदेशी सिस्टम में अगर हमारे देश मे कोई बड़ी घटना दुर्घटना होती है तो महज चंद मोमबत्तियां जलकर सब कुछ शांत हो जाता है ,लेकिन यही विदेशों में कोई बड़ी घटना दुर्घटना होती है तो महज कुछ ही घँटों में देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और अपराधियों की मनसा को खुली चुनौती देते हैं !
लेकिन हम क्या करें? “साहब” तो चुपचाप हैं !झारखण्ड में भी पिछले एक सप्ताह में रेप के कई मामले आये ,गुमला,चतरा, पाकुड़ और अब गोड्डा !गोड्डा में भी पिछले चार दिनों में लगातार चार केस रेप के आये जिसमे बीते दिनों गैंग रेप जैसे घिनोने कुकर्म हुआ एक नाबालिग आदिवासी लड़की के साथ सात लड़के ने मिलकर उसको हवस का शिकार बनाया है,लड़की रात से सुबह तक तड़पती रही,लेकिन,मीडिया में सिंगल कॉलम खबर बनकर रह गई और किसी ने कोई आंदोलन भी नहीं किया क्यों? क्या सिर्फ इसलिए कि उनका न तो मीडिया जगत से कोई सरोकार था,और न ही किसी उच्च वर्ग से थे? रेप तो रोज ही होते हैं, फिर किसी एक पर इतना हंगामा क्यों? क्या हक है हमें रोने और चिल्लाने का कि हाय हाय करें ,रेपिस्टों को फांसी पर चढ़ा दो के नारे लगाएं !उनके साथ यह करो,वह करो !जब हम बांकी बलात्कारों पर चुप्पी साधे रहते हैं, तो क्यों किसी एक पर हंगामा खड़ा करते हैं? क्या आंदोलन हर बलात्कार पर नहीं होना चाहिए?
मेरा एक मित्र का कहना है कि अगर, हर बलात्कार पर रोज हंगामा किया जाने लगा, तो आंदोलन-प्रदर्शनों की अहमियत खत्म हो जाएगी ! लेकिन, मैं इससे इत्तेफाक नहीं रखता, बल्कि रोज हल्ला मचाने से ही फर्क पड़ेगा ! किसी पत्थर पर रोज रस्सी घिसने से ही उस पर निशान बनता है ! क्या हमें ‘छोटे-मोटे’ बलात्कार पर चुप रहकर ‘बड़े’ का इंतजार करना चाहिए?
आज गोड्डा में पिछले चार दिनों लागातर चार रेप केस जिसमे एक गैंग रेप ,फिर विधायक चुप,सांसद खामोश,मुख्यमंत्री तक ने जनता कोई सन्देश देना तक उचित न समझे, और तो और शहर के आजकल के कुछ तथाकथित समाजसेवक,नेता ने भी अबतक कोई प्रतिक्रिया नही दी! आंदोलन धरना तो छोड़िए जनाब आज के डिजिटल जमाने मे ट्वीट या फेसबुक पोस्ट के माध्यम से ही संवेदना जताने का प्रयास किया गया आखिर क्यों ?हालांकि ऐसे मामलों पर कुछ महिला नेत्री सामने आई है और खुल कर महिला सुरक्षा की बात सरकार से की है ! लेकिन !
कुछ तथाकथित बड़े बलात्कारों पर अखबारों में कैंपेन शुरू हो जाते हैं !टीवी पर स्पेशल प्रोग्राम शुरू हो जाते हैं !लेकिन, किसी गरीब के साथ हुए रेप पर ज्यादा से ज्यादा एक मिनट की खबर चलाई जाती है !
कश्मीर में जाकर देखिए जनाब, रोज बलात्कार होते हैं ! छत्तीसगढ़ में जाइए, वहां भी रोज कोई न कोई लड़की हवस का शिकार होती है! पर नहीं, हमें तो बड़ी घटना पर शोर मचाने की आदत हो गई है !ठीक है, मान लिया कि बड़ी घटना को भुनाओ !
फिर आसाराम (मेरा बापू नहीं है) के मुद्दे पर क्यों सभी चुप हैं? उसका भी विरोध करो ! पर, यहां तो उल्टा ही है।
! आसाराम के विरोध में कम समर्थन में ज्यादा ‘हिंसक’ आवाज आ रही है, क्योंकि उसने राम नाम का चोला ओढ़ रखा है !जिस देश में राम के नाम पर कत्लेआम करने वाले लोग हों, उनसे और उम्मीद भी क्या की जा सकती है !
मीडिया से लेकर पुलिस और नेताओं तक के मुंह बंद हैं आसाराम के कुकर्म पर !हंगामा करना ही है, तो हर बार और हर किसी के लिए करो ! वरना शांत बैठ जाओ अपने घरों में और तमाशा देखते रहो !

राघव मिश्रा

About मैं हूँ गोड्डा (कार्यालय)

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