Home / ताजा खबर / अब सिल्वर स्क्रीन पर दिखेगी “बन्दना” की संघर्ष कथा,निर्देशक ने किया गोड्डा दौरा,2 महीने बाद होगी शूटिंग ।

अब सिल्वर स्क्रीन पर दिखेगी “बन्दना” की संघर्ष कथा,निर्देशक ने किया गोड्डा दौरा,2 महीने बाद होगी शूटिंग ।

गोड्डा/जिले में एक दशक से भी ज्यादा वक्त से बिना किसी स्वार्थ के उन दर्जनों बच्चों के लिए आसरा बनीं बन्दना मायानगरी का सफर तय करने की तैयारी में है। मुंबई से फिल्म डायरेक्टर रंजन सिंह राजपूत ने जो बातें बन्दना के बारे में कहीं वो किसी के भी दिल को छू जाएगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से बन्दना ने बिना किसी सरकारी मदद और स्वार्थ के बेघर और बेसहारा बच्चों के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया है उसे सामने लाना जरुरी है। क्योंकि ‘वंदना एक उड़ान’ देखने के बाद अगर एक भी और ‘बन्दना’ समाज में निकल आई तो समझ लीजिये हमारी मेहनत सफल हुई।

रंजन सिंह को कुछ महीने पहले मैं हूँ गोड्डा की ही खबर के जरिये बन्दना के संघर्ष और समर्पण की कथा पता चली थी। दरअसल बन्दना जिस पृष्ठभूमि से आकर अनाथ-बेसहारा बच्चों के लिए ममता का दूसरा नाम बन गई हैं वैसा उदाहरण और वैसा नाम काफी कम देखने और सुनने को मिलता है।

जिस तरह का काम बन्दना कर रही हैं उससे या तो कोई बड़ी संस्था जुड़ी होती है या फिर कोई बहुत बड़ा नाम। जहां से सबसे बड़ी जरुरत यानि आर्थिक मदद उस फलां शख्सियत तक पहुंचाई जाती है। लेकिन बन्दना के साथ इन दोनों का ही अभाव है। वो खुद को अभाव में रखकर अपने संस्था में पल रहे बच्चों की हर जरूरत पूरी करती रही हैं। बन्दना की इसी सोच, इसी समर्पण और इसी संघर्ष ने तेजकिरण फिल्म के रंजन सिंह राजपूत को मुंबई से गोड्डा तक खींच लाया।

रंजन सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि अगले तीन महीने में वंदना दुबे पर बनने वाली फिल्म बन्दना एक उड़ान की शूटिंग शुरु हो जाएगी। इसमें मुख्य कलाकार तो मुंबई से होंगे लेकिन बाकी स्टार कास्ट स्थानीय होंगे। उन्होंने ये भी साफ किया कि इस फिल्म में कोई स्टार नहीं होगा बल्कि एक्टर होगा। क्योंकि यहां बन्दना के किरदार को दर्शकों को दिखाना है। इस फिल्म में पत्रकार राघव मिश्रा सहायक निर्देशक के तौर पर काम करेंगे।
कौन हैं बन्दना दुबे?

बन्दना दुबे गोड्डा में बेसहारा बच्चों के लिए 2005 से काम कर रही हैं। 2007 में उन्होंने स्वामी विवेकानंद अनाथ आश्रम की शुरुआत की।

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लेकिन बन्दना लगातार सरकारी उपेक्षाओं का शिकार होती रहीं। सरकार की तरफ से वंदना को किसी तरह की आर्थिक मदद नहीं मिली। लेकिन जन सहयोग और समर्थन हमेशा उनके साथ रहा। इन सरकारी उपेक्षा पर झारखंड विधानसभा में भी सवाल-जवाब हो चुके हैं। इन उपेक्षाओं के बावजूद भी बन्दना अपने काम में जुटी रहीं और सिस्टम से लड़ते हुए अपने आश्रम में रह रहे बच्चों का खयाल रखती रही हैं।

बन्दना एक तरफ सरकारी सिस्टम की तरफ से उपेक्षा की शिकार होती रहीं तो वहीं दूसरी तरफ उसी सिस्टम के सितारों की तरफ से उनके काम की तारीफ भी की गई। संस्था का विजिटर रजिस्टर ऐसे नामों से भरे पड़े हैं जिन्होंने वंदना की इस सेवा भावना की सराहना की है।

2016 में वंदना को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों बाल कल्याण और विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें राजीव गांधी मानव सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। झारखंड राज्य स्थापना दिवस समारोह में 2016 में उन्हें उत्कृष्ट सेवा पुरुस्कार मिल चुका है।

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