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यहां 24 घंटे तक मुर्दा का होता रहा इलाज :अस्पताल प्रबंधन कि यह कैसी लापरवाही ?

कैदी की मौत के बाद, जेल प्रशासन व अस्पताल प्रबंधन का खुलकर सामने आयी लापरवाही

विधायक प्रदीप यादव भी पहुंचे, मामले की उच्च जांच कराने की मांग ।
गोड्डा/कैदी के इलाज के दौरान मौत के मामले में शुक्रवार की दोपहर के बाद से ही जेल प्रशासन, अस्पताल प्रबंधन स जिला प्रशासन की लापरवाही खुल कर सामने आयी।

 

जब निर्देश के बादवजूद शुक्रवार की शाम मृतक कैदी के शव को पोस्टमार्टम के लिए धनबाद नहीं ले जाया गया। कैदी महेन्द्र बेसरा के मौत के बाद 24 घंटे तक वार्ड में ही रखा गया।

 

इस दौरान वार्ड में अन्य जीवित मरीजों का इलाज किया जा रहा था। शुक्रवार की रात में वार्ड में कुल चार मरीज भर्ती थे जिसमें तीन बच्चे शामिल थे। अस्पताल प्रबंधन भी इस मामले पर पूरी तरह से लापरह साबित हुई।

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24 घंटे तक यह सिलसिला चलता है। आखिर में शनिवार को साढ़े ग्याहर बजे शव का पोस्टमार्टम करा कर परिजनों को सौंप दिया गया। इस दौरान एसडीओ फुलेश्वर मुर्मू, जेल अधीक्षक मनोज कुमार, सिविल सर्जन डॉ आरडी पासवान भी सदर अस्पताल पहुंचे। लेकिन पदाधिकारी सिर्फ मामले पर लीपापोती करते हुए नजर आए।

परिजनों ने कहा जेल प्रशासन ने किया मामले को दबाने का प्रयास :

मृतक कैदी महेन्द्र दास का पुत्र आनंदलाल बेसरा, पत्नी जोबा मुर्मू शुक्रवार को बारह बजे ही अस्पताल आ चुके थे। पुत्र आनंद लाल बेसरा ने बताया कि एक बार सिर्फ अस्पताल को पिता का शव दिखाने जेल के कुछ पदाधिकारी ने लाया।

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लेकिन इसके बाद जेल के अंदर बिठा दिया गया। इस दौरान जेल प्रबंधन के कुछ कर्मियों ने किसी से कुछ भी न कहने का दबाव भी बना रहा था। मतलब साफ है कि जेल प्रशासन कोई न कोई ऐसी बात है जो वह छिपा रहा है।

 

उसने कहा कि परिवार का एकमात्र कमाउ सदस्य अब उसके साथ नहीं है। पूरा परिवार उस पर ही निर्भर रहता था। वह अभी कॉलेज में पढ़ाई कर रहा है। उसके अलावे तीन बहन भी है। जिसमें दो की शादी अभी नहीं हुई है। आखिर हमलोग कहां जाए।

 

आखिर पोस्टमार्टम के लिए धनबाद क्यों नहीं भेजा गया शव :

इस पूरे मामले में जिला प्रशासन के पदाधिकारी द्वारा लीपापोती की गयी। इस पूरे प्रकरण में कई सवाल खड़े हो रहे है।

 

पहला सवाल है कि जब सब कुछ हो गया था, शव को धनबाद मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम कराने की भी बात पर मुहर लग गयी थी तो पोस्टमार्टम सदर अस्पताल में क्यों कराया गया।

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अगर प्रबंधन को पोस्टमार्टम सदर अस्पताल में ही कराना था तो 24 घंटे देरी से क्यों लगी। आखिर परिवार को दिन भर जेल काउंटर पर बिठा कर क्यों रखा गया।

विधायक प्रदीप यादव पहुंचे अस्पताल, मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग :

इधर शनिवार को सूचना पाकर पोड़ैयाहाट विधायक प्रदीप यादव सदर अस्पताल पहुंचे। जहां पर मृतक के परिजनों की सुध ली।

उन्होंने परिजनों को कुछ सहायता राशि भी प्रदान की। उन्होंने इस दौरान जेल अधीक्षक व एसडीओ से पूरे मामले की जानकारी ली।

जहां पर पदाधिकारी द्वारा भी घिसा पीटा जवाब दिया जा रहा था। उन्होंने इस दौरान कहा कि इस मामले को लेकर जेल आइजी व राज्य के मुख्य सचिव से मुलाकात करेंगे।

 

पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग किया जाएगा। अब तक जो सुनने में आया है इसमें जेल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे है।

 

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