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बाल कल्याण समिति की अध्यक्षा पर आश्रम की बच्ची के साथ अभ्रद व्यवहार करने का आरोप,अवसाद में गयी अनाथ आश्रम की बच्ची का हो रहा इलाज ।

जांच के नाम पर बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष की भूमिका सवालों के घेरे में ।
अभिषेक राज/बच्चों के कल्याण के लिए गठित जिला बाल कल्याण समिति की भूमिका सवालों के घेरे में है। शहर में पिछले करीब डेढ़ दशक से अनाथ बच्चों के लिए कार्य कर रहे स्वामी विवेकानंद अनाथ आश्रम के बच्चों के साथ बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष के रूखे व्यवहार एवं उल जुलूल सवालों से आश्रम के बच्चे हताश हैं। आश्रम में रहकर पल एवं पढ़ रही एक बच्ची तो अवसाद में चली गयी है। आश्रम में रहकर छठी कक्षा में अध्ययनरत बच्ची का इलाज फिलवक्त किया जा रहा है।
विगत 17 दिसंबर को बाल कल्याण समिति की एक जांच टीम शहर के राजेन्द्र नगर स्थित स्वामी विवेकानंद अनाथ आश्रम पहुंची थी। इस टीम का नेतृत्व महिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष कल्पना झा कर रहीं थी। उनके अलावे इस टीम में जिला बाल सरंक्षण पदाधिकारी रितेश कुमार, सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ मंटू टेकरीवाल, डॉ जुनैद आलम के अलावे चैंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष सह वार्ड पार्षद प्रीतम गाडिया भी थे।
मिली जानकारी के अनुसार, टीम को दरकिनार कर बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष ने आश्रम की बच्चों से अकेले में पूछताछ की। अनाथ बच्चों से प्रेम पूर्वक व्यवहार करने की जगह बताया जाता है कि बच्चों को डराया, धमकाया एवं बरगलाया भी गया। आश्रम के संचालन पर कटाक्ष किया गया। वर्षों से आश्रम में रहकर पल एवं पढ़ रहीं बच्चियों से आश्रम की संचालिका वंदना दुबे के बारे में अनर्गल टिप्पणी की गयी। कहा जाता है कि जांच टीम की अध्यक्ष द्वारा एक बच्ची से अभ्रद व्यवहार भी किया गया। अशोभनीय सवालों की झड़ी लगायी गयी। इतना ही नहीं जांच टीम सह बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष ने आश्रम का जेजे एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन नहीं किए जाने की चेतावनी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दी । इन बातों की शिकायत आश्रम की संचालिका बंदना दुबे ने पत्र लिखकर राज्यपाल, झारखंड की महिला, बाल विकास एवं कल्याण मंत्री समेत जिले के उपायुक्त से भी की है।
इस बीच बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष द्वारा अनाथ आश्रम की एक बच्ची के साथ किए गए दुर्व्यवहार के कारण कस्तूरबा स्कूल में छठी कक्षा में पढ़ने वाली उक्त बच्ची को गहरा अघात लगा है। बच्ची समिति की अध्यक्ष के दुर्व्यवहार से इतनी आहत है कि वह वर्तमान में अवसाद की शिकार भी हो गयी है।

संचालिका वंदना दुबे ने बताया कि सोमवार को उसे अस्पताल ले जाया गया। जहां पर चिकित्सक ने उसका काउंसेलिंग करवाने की सलाह दी है। बच्ची को बाहर घुमाने फिराने की जरूरत बतायी गयी है।
क्या है मामला :

राजेन्द्र नगर स्थित स्वामी विवेकानंद अनाथ आश्रम विगत वर्ष 2005 से ही चल रहा है। उसका उद्घाटन तत्कालीन उपायुक्त ने किया था। बिना किसी सरकारी सहयोग से अनाथ आश्रम विगत 14 वर्ष से चल रहा है। स्थानीय जनता के सहयोग के बल पर संचालित इस अनाथ आश्रम की खासियत यह है कि यहां रह कर पल रहे बच्चे अच्छे स्कूलों में भी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस नेक कार्य के लिए आश्रम की संचालिका सुश्री दुबे को पिछले वर्ष राष्ट्रपति द्वारा राजीव गांधी सेवा भावना पुरस्कार सम्मान से भी नवाजा गया था।
वर्ष 2015 में राज्य सरकार ने अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए जुबिनाइल जस्टिस एक्ट बनाया है। अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए कार्य करने वाली संस्थाओं का जेजे एक्ट के तहत निबंधन अनिवार्य किया गया है। अनाथ बच्चों के सरंक्षण के लिए जेजे एक्ट के तहत संस्था को निबंधित होना आवश्यक किया गया है।
साथ ही इस एक्ट में कहा गया कि जो संस्था पहले से इस क्षेत्र में काम कर रही है उसे प्राथमिकता के तौर पर निबंधित किया जाना है। संस्था की संचालिका ने इसके तहत आवेदन भी दिया। तत्कालीन जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने सभी मापदंडों के तहत आश्रम को अनुकूल बताया था। लेकिन प्रक्रिया जटिल होने के कारण निबंधन नहीं हो सका। कुछ माह पहले महिला बाल सरंक्षण पदाधिकारी के रूप में कल्पना झा जिले में पदस्थापित हुई। संचालिका वंदना दुबे ने बताया कि इसके पूर्व भी दो बार जेजे एक्ट के निबंधन के लिए जांच पदाधिकारी द्वारा जांच किया गया था। लेकिन विगत 17 दिसंबर को जांच के दौरान एक बच्ची से अभ्रद व्यवहार किया गया। बच्ची के अवसाद में चले जाने के कारण मामला तूल पकड़ने लगा है। आश्चर्य की बात है कि जब समिति की अध्यक्ष द्वारा अनाथ आश्रम की बच्चियों के साथ पूछताछ की जा रही थी तो उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग की इजाजत भी नहीं दी गयी।
बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष के रवैये पर टीका टिप्पणी का दौर चल रहा है। जांच टीम में शामिल समिति के एक सदस्य ने अपना नाम फिलवक्त नहीं छापने का अनुरोध करते हुए बताया कि समिति की अध्यक्ष ने टीम के सभी सदस्यों के सामने नहीं बल्कि अलग से अनाथ आश्रम की बच्चियों से पूछताछ की थी।
इस संबंध में ‘मैं हूँ गोड्डा ’ द्वारा बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष का मंतव्य जानने के लिए उनके मोबाइल पर कॉल करने पर हर बार स्वीच ऑफ बताया जाता रहा। जांच टीम में शामिल रहे बाल संरक्षण पदाधिकारी के मोबाइल पर कॉल करने पर इनकमिंग कॉल की सुविधा अस्थायी रूप से समाप्त हो जाने की बात बतायी गयी।

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