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मैनेजमेंट का यह कैसा मैनेज ?आखिर क्यों नही की जा रही है कार्रवाई ?क्या अंदर ही अंदर खेला जा रहा है सेटिंग गेम ?

शिकायत करके मामले का किया खुलासा, फिर सलटाने का प्रयास क्यों??

अभिजीत तन्मय/गोड्डा/जिला में बिचौलिया हावी है ये सभी जानते है लेकिन आज जिला परिषद की बैठक में डीडीसी सुनील कुमार ने भी ये मान लिया कि संथाल परगना में ब्लॉक ही रोजगार का सबसे बड़ा जरिया है।

जबसे घूस लेते हुए कई अधिकारी पकड़ा रहे है तबसे पदाधिकारी,अधिकारी,कर्मचारी और जनप्रतिनिधियों ने भी बिचौलियों(दलाल) को क्षेत्रों में छोड़ रखा है जो पैसे का डिमांड करते है,एक हिस्सा लेते है और जीहुजूरी करते हुए बाकी का हिस्सा पहुँचा देते है।

इसमें रिस्क नही रहता है। कोई भी लाभुक चढ़ कर बात नही कर सकता है।
भ्रष्टाचार निरोधक दस्ता से पकड़वा नही सकता है। अगर पकड़ाएगा तो वो दलाल जिससे मेरा कोई सम्बन्ध नही है ये कह कर आसानी से पल्ला झाड़ा जा सकता है।
वर्तमान समय मे सबसे ज्यादा कमीशनखोरी आवास योजना में चल रही है।
5000 से 25 हजार तक का कांटा फिक्स है जो लाभुक जिसमे सेट हो जाये।
पंचायत सचिव बीच की कड़ी होती है जो राशि का एक भाग ऊपर तक पहुँचाता है।

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पिछले कुछ महीनों से कुछ मुखिया पर आरोप लगे है घपलेबाजी की। बिना सूची में नाम वाले को आवास योजना का लाभ दिए जाने का भी मामला प्रकाश में आया था।
मेहरमा प्रखंड के तुलाराम भुस्का के मुखिया पर एफआईआर दर्ज करने के लिए आदेश निर्गत हो चुका था लेकिन मामला फिर जाँच पर जाकर अटक गया।
दूसरा मामला वर्तमान में ठाकूरगंगटी प्रखंड के मानिकपुर पंचायत का है ,जिसमे प्रखंड विकास पदाधिकारी ने 24 अगस्त को ही एफआईआर करने का आदेश निर्गत कर दिया।

लेकिन आज फिर जब मामला जिला परिषद की बैठक में जिप सदस्य निरंजन पोद्दार ने उठाया तो डीडीसी ने फिर से जाँच टीम गठित करने की बात कही।
आखिर कितनी बार होगी जाँच जबकि ऐसे सभी मामले बाद में मैनेज कर लिए जाते है।
नाम नही छापने और कैमरे के सामने बिना आए कुछ सदस्यों एवम कर्मचारियों ने कहा कि यहाँ पर जानबूझ कर ऐसे कुछ मामलों को उठाया जाता है ।
कार्रवाई की धमकी दी जाती है और बाद में उसी सदस्य द्वारा पदाधिकारी से उस मामले को खत्म कर देने का दवाब भी बनाया जाता है और इस बीच आरोपी से मांडवाली कर ली जाती है।

सभी जगह मिलाजुला कर एक ही जैसा हाल है। कहीं जनप्रतिनिधियों को मौका मिलता है तो कहीं पदाधिकारियों को लूटने का,कुछ जगह दोनों को प्राप्ति हो जाती है जैसे महागामा अनुमंडल अंतर्गत 13 करोड़ रुपये से बनने वाली गाइड वाल
इसकी स्पेशल ख़बर जो मैं हूँ गोड्डा के अगले अंक  में ।

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