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प्राइवेट और सरकारी विद्यालय के बीच खालीपन को भरने के लिए एक शिक्षक की अनूठी पहल ।

राघव मिश्रा/स्कूल के प्रधानाध्यापक सावन कुमार का मुख्य फोकस बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के साथ ही स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जागरुक करना भी है.उनका मकसद प्राइवेट और सरकारी स्कूलों के बीच के गैप को भरने का भी है, वे बच्चों को पढ़ाने के साथ साथ पर्यावरण बचाने और पेड़ पौधे लगाने का संदेश भी दे रहे है।

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झारखण्ड प्रदेश के सरकारी स्कूलों से खबरें आती हैं कि स्कूलों में शिक्षक नहीं है, शिक्षकों को अपने विषय का ज्ञान नहीं है..ऐसे कई वीडियो वायरल भी होते रहे हैं. लेकिन इसी झारखण्ड राज्य के गोड्डा जिले से एक शिक्षक सावन कुमार सामने आए हैं, जिन्होंने अपने स्कूल उत्क्रमित बुनियादी उच्च विद्यालय सुन्दरमोर में 150 छात्र छात्राओं के बीच अपनी सैलरी और बचत किए गए पैसे से स्कूल को खूबसूरत बनाने की ठानी है, यही नहीं शहरी छात्र छात्राओं को टक्कर देने के लिए वह गांव के स्कूली छात्रों को अपनी कमाई के पैसे से स्कूल बैग ,वाटर बोतल,जूता मौजा आदि बच्चों को देकर उसके मनोबल को बढ़ाने का काम कर रहे हैं ,साथ ही उत्क्रमित उच्च विद्यालय सुंदरमोर के नए स्कूल भवन में टाइल्स मार्बल भी लगवा रहे हैं ।ताकि प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को देखकर ग्रामीण बच्चों के मन मे किसी प्रकार की ग्लानि न हो ।
सावन कुमार ने मैं हूँ गोड्डा को बताया कि जब 2015 में उन्होंने इस स्कूल में योगदान किया था उस वक्त स्कूल में महज 4,5 बच्चे ही थे,लगातार स्कूल को अनूठा बनाने की प्रक्रिया ने आज स्कूल में काफी संख्या में छात्र छात्राओं की बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने शिक्षक दिवस के ठीक एक दिन पहले अपने दो माह की सैलरी के पैसे से बच्चों के बीच स्कूल बैग ,वाटर बोतल,जूता मौजा बांटकर एक अनूठी मिशाल पेस की है ।
यही नही स्कूल के प्रधानाध्यापक सावन कुमार कहते हैं कि मैंने खुद अपनी पढ़ाई संत थॉमस जैसे प्राइवेट स्कूल से की है,वहां के अनुशासन को मैं सरकारी स्कूल के बच्चों में दे रहा हूँ,साथ ही सभी स्कूली बच्चों का टाई, बेल्ट,आईडी कार्ड ,यूनिफॉर्म इत्यादि बन रहा है जिसे जल्द ही बच्चों के बीच बांटा जाएगा ।
वो बताते हैं कि पैसे के आभाव में भी बहुत से अभिवावक अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में नही पढा पाते हैं ,ऐसे में मेरे द्वारा यह छोटा सा कदम प्राइवेट स्कूलों और सरकारी स्कूलों के बीच के गैप को भरना है।ताकि किसी बच्चे या अभिवावक को यह महसूस न हो कि हमारा बच्चा किसी प्राइवेट स्कूल के बच्चों से कम है या वैसे स्कूलों में नही पढा पाने का मलाल है ।
सुन्दरमोर के इस बुनियादी उच्च विद्यालय में पहले भी प्रधानाध्यपक सावन कुमार ने कई ऐसे कार्यक्रम करवाए हैं जिससे बच्चों में स्कूल के प्रति जागरूकता बढ़ी है,पढ़ने की ललक तेज हुई है ।

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कल शिक्षक दिवस है और ऐसे में इस दिवस के आने के ठीक एक दिन पहले शिक्षक के द्वारा ऐसी पहल को बच्चों के अभिवावक ने भी सराहा है,ग्रामीणों ने भी ऐसी पहल की सराहना की है ।
जब हमने प्रधानध्यापक से जिक्र किया कि सरकार के द्वारा भी बच्चों को कई प्रकार की सुविधा दी जा रही ऐसे में आपके द्वारा अपने वेतन से ऐसी चीजें करने का सोच कैसे पैदा हुआ ?तो उन्होंने हमे बताया कि सरकार के द्वारा कई चीजें स्कूलों के पठन पाठन को बढ़ावा देने के लिए की जा रही है लेकिन सरकारी स्कूलों में बैग,वाटर बोतल,जूता मौजा,आईडी कार्ड,टाई बेल्ट इत्यादि का कोई आवंटन या योजना फिलहाल नही है इसलिए हमें लगा कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी ऐसी सुविधा देनी चाहिए जिससे उन बच्चों में स्कूल समय पर जाने और पढ़ने की जिज्ञासा बढ़ती रहे ,साथ ही उन्होंने बताया कि अगर हमें मौका मिला तो इस विद्यालय को राज्य के सरकारी मॉडल विद्यालय में एक नम्बर पर लाऊंगा ,मौके पे विद्यालय के शिक्षक श्रवण कुमार, राजेश कुमार चंद, मिथलेश कुमार, सुशील कुमार दास के साथ लिपिक कैलाश बिहारी एवं विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष कुलेश सह उपस्थित रहे ।।

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