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समाज को एक नई दिशा देने का एक छोटा सा प्रयास !

#दुनिया_के_दांव_पेंच_से_रखना_ना_वास्ता
#मंज़िल_तुम्हारी_दूर_है_लम्बा_है_रास्ता ….
#भटका_ना_दे_कोई_तुम्हें_धोखे_में_डाल_के..#इस_देश_को
समाज को एक सामाजिक नेता की नही बल्कि सामाजिक कार्यकर्ता की जरूरत है ! समाजिक कार्यकर्ता वे लोग होते हैं जो समाज में परिवर्तन की जरूरत महसूस करते हैं और इसके लिए अपना जीवन समर्पित कर देते हैं! ये वह जुनूनी लोग होते हैं जिनके पास सुनहरे भविष्य का विज़न होता है! कुछ लोगो में सामाजिक कार्यकर्ता के गुण स्वाभाविक रूप से पाए जाते हैं, जबकि बाकी लोग किसी दुखद या सुखद घटना या अनुभव के फलस्वरुप सामाजिक कार्य की तरफ मुड़ जाते हैं!चाहे आपके सामाजिक कार्यकर्ता बनने का जो भी कारण हो, आप यह कर सकते हैं क्योंकि इस क्षेत्र में किसी भी उम्र, साधन या पृष्टभूमि के लोग प्रवेश कर सकते हैं! आप जैसे लोग ही जो यह मानते हैं कि उनमें परिवर्तन करने की क्षमता है, दुनिया में बदलाव लाते हैं!आपको स्वतंत्र रूप से कार्य करते रहना चाहिए क्योंकि इसी से पता चलता है कि आप अपने लक्ष्य के प्रति कटिबद्ध हैं !आज समाज ही नहीं संसार की दशा किसी से छिपी नहीं है! क्या अमीर, क्या गरीब, क्या शिक्षित और क्या अशिक्षित, इस यथार्थ के विषय में सभी एक मत हैं कि आज का समाज बुरी तरह विकृत हो चुका है और संसार ऐसे विषम-बिन्दु पर पहुँच गया है कि यदि उसकी इस गति को यहीं पर रोक कर ठीक दिशा में न बढ़ाया गया तो युग-युग की संचित मानवीय सभ्यता का विनाश अवश्यम्भवी है !
वर्तमान दशा और परिवर्तन की पुकार किसी की आँख-कान से परे नहीं है !आज के असहनीय कष्ट सभी देखते, सुनते, और अनुभव कर रहे हैं किन्तु इस परिवर्तन की माँग को पूरा करने के लिए कौन आगे बढ़े, यह प्रश्न सामने खड़ा होकर स्तब्धता की स्थिति उपस्थित कर देता है ! निःसन्देह इस संक्रामक काल में परिवर्तन पूर्ण करने के लिए, सम्पूर्ण समाज का कर्तव्य है कि वह योगदान करे !किन्तु यह सर्वथा सम्भव नहीं,इस परिवर्तन को प्रस्तुत करने के लिए समाज के एक विशिष्ट वर्ग को ही आगे बढ़ना होगा,जो सिर्फ और सिर्फ युवा ही कर सकता है ,आज हम 21 वीं सदीं में अपना पदार्पण कर चुके है, लेकिन हमारा समाज आज भी 19 वीं सदीं में जी रहा है, समाज में इस नयी सदी कि नयी उर्जा का संचार करने के लिए, हमें नये उर्जावान नेतृत्व की आवश्यकता है,आज देश की आबादी का 70 प्रतिशत युवा वर्ग है, ऐसी स्थिती मे युवाओं को समझने के लिए, समाज कि बागडोर कहलाने वाले युवा,चाहे वो देश के किसी भी समाज, घराने या खानदान से हो ! समाज की प्रगति को बढावा देने में युवा वर्ग का जोश का उपयोग हो सकता है,लेकिन निगरानी अगर वरिष्ट बुद्धिजीवियो द्वारा की जाए तो एक सुदृढ़ समाज का निर्माण हो सकता है, और ये दोनों के तालमेल से समाज की की गाड़ी समय के साथ साथ हमेशा आगे चलती रहेगी !
हम इतने समझदार, बुद्धिमान और साधन सम्पन्न होने के बावजूद हम अगर समाज को कुछ नही दे सकते तो, हमारा इस समाज में पैदा होना ही व्यर्थ है,क्योंकि हमे यह कभी नही भुलना चाहिये कि, समाज मे पैदा होने से लेकर मरने तक और अंतिम यात्रा के वक्त हमने समाज से बहुत कुछ पाया, इसलिए हमे यह सोचना चाहिये की समाज को हमने दिया क्या है?
वैसे तो समाज के प्रति नैतिक जिम्मेदारियों का निर्वाहन का दायित्व तो प्रत्येक व्यक्ति का है, और ऐसा मैं मानता हूँ कि सभी को अपनी क्षमता के अनुरुप नैतिक जिम्मेदारियों का निर्वाहन करना चाहिए। लेकिन 21वीं सदी के इस सबसे व्यस्ततम् समय या युं कहें सबसे भीड़-भाड़ जैसे समय में,जहाँ लोग रोजमर्रा की जिंदगी में अपने आपको ही भूल जाते हैं,समाज की तो बात ही छोड़िये, ऐसे व्यस्ततम् समय में हमने देखा की Ujjwal ने #हाई_स्कुल_कम्युनिटी के अपने मित्रों के साथ मिलकर अपने आपको रोजमर्रा का जिन्दगी से परे रखकर,लोगों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर चलने का प्रयास किया है ,इस युवाओं की टोली को न राजनीति की लोभ है न किसी चीज की लालसा ,इनका मुख्य उद्देश्य है समाज गतिमान हो,और यह एक अच्छे सांचे में ढल सकें ! समाज को अच्छा संदेश मिले , बस रोटी और भात के लिए किसी की जान न जाय ,न सड़क पर तड़प कर कोई प्राण त्याग दे और उसे अस्पताल पहुँचाने के बजाय कोई उसका वीडियो बनाता रहे , आशा है कि हमारा यह छोटा सा प्रयास समाज को एक शसक्त व तनाव मुक्त समाज बनाने के विकास में सहयोगी होगा !
हमने विभिन्न पत्र पत्रिकाओं, इन्टरनेट पे वेवसाइटों और समाज के साथ उठते बैठते यह पाया है कि, कई लोग समाज से सम्बन्धित अनेकों प्रयास से ही काफी बिखरे से हैं, जबकि वे सभी सराहनीय और अत्यधिक प्रबल समाज को दर्शातें हैं !समाज की इन सब कमीयों को दुर करने के लिये हमें नये समाज का निर्माण करना होगा! ऐसे ही एक माध्यम बना है युवाओं की ये टोली ,इस टोली के सभी युवा अपने अपने कार्य क्षेत्र में अच्छे जगहों पर हैं ,इनके के द्वारा जो कुछ भी अभी किया जा रहा है वो अपने प्रथम चरण में है!आप सभी के सहयोग और मार्गदर्शन के द्वारा यह एक दिन शसक्त व तनाव मुक्त समाज को बनाने में अपना रोल बखूबी निभायेगा !बशर्ते युवा भटकाव और किसी खास विचारधाराओं से ग्रसित न हो !
चुनौती भरी सृजनतामय जीवन की अवधि के सौपान से गुजरना एक महान् साहस की बात है! आज विश्व का वह समाज का हर हिस्सा स्वार्थ और लालच के गहरे तल में गोते लगा रहा है ! इस भयानक दौर से बचने का एक ही विकल्प है “युवा”क्योंकि युवा के इस प्रकार से जागने पर ही समाज को अनुकूल रूप में ढालने से पीड़ित मानवता के लिए रामबाण औषधी सिद्ध होगी!ऐसी मेरी परिकल्पना ही नही अपितु मेरा दृढ विश्वास भी है!#करके_देखें_अच्छा_लगेगा!

Raghav Mishra

About मैं हूँ गोड्डा (कार्यालय)

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